भोपाल~पुलिसकर्मी केरु सिंह निगवाल का ड्यूटी के दौरान सड़क दुर्घटना में निधन~~

*हुज़ूर आप सिर्फ अपनी राजनीती रोटियां सेकने कब तक पुलिस का उपयोग करेंगे ~~

भोपाल सैयद रिजवान अली~~

सबसे मिलनसार हर दिल अजीज पुलिसकर्मी प्रधान आरक्षक
केरूसिंह निगवाल जो कि धार जिले के मनावर थाने पर भी रहे वर्तमान में धार जिले केअमझेरा थाने पर ड्यूटी के दौरान सड़क दुर्घटना में उनका निधन हो गया उनके निधन पर अचानक ही मन में आया के चार लाइन लिखू उनके बारे में लिखते हुए उन्हें में सच्ची श्रद्धांजलि अपनी कलम के माध्यम से दे रहा हूं कि  ।
आपने सोचा कम से कम 18 से 20 घंटे ड्यूटी करने वाला पुलिसकर्मी अपने को कैसे फिट रख पाएगा। कहीं होती है क्या ऐसी ड्यूटीहुजूर कभी आपने इनके लिए कोई बात की जो इन पुलिसकर्मियों के ड्यूटी टाइम, वेलफेयर, वेतन विसंगति आदि के विषय में अपनी रिपोर्ट पेश करें. और अगर पिछले समय में किसी समिति द्वारा कोई रिपोर्ट पेश की गई तो उस पर क्या कार्यवाही हुई ! खैर आपकी नजर में तो माननीय सुप्रीम कोर्ट भी कुछ नहीं है. उनके भी आदेशों को आज तक लागू करना उचित नहीं समझा गया, जो उन्होंने पुलिस सुधार एक्ट के रूप में निर्देशित किया था !

पुलिस विभाग को छोड़कर, जिसमें खासकर कांस्टेबल पुलिसकर्मी जो 18 से 20 घंटे ड्यूटी करता है. और कोई ऐसा विभाग जो 18 से 20 घंटे ड्यूटी करता हो. और हां अगर इतनी ड्यूटी उस विभाग के द्वारा जैसे कि रेलवे या सरकारी हॉस्पिटल इमरजेंसी वार्ड करते भी हैं तो 3 चरणों में उन्हें 8 घंटे की ड्यूटी के बाद 16 घंटे रेस्ट मिलता है. लेकिन पुलिस के साथ ऐसा कुछ भी नहीं. आइए किसी दिन किसी पुलिसकर्मी के साथ किसी चौराहे पर चिलचिलाती धूप एवं भड़कती पब्लिक के बीच किसी प्वाइंट पर 8 घंटे बराबर खड़े रह कर देखिए उस दिन के बाद सफेद कुर्ता पायजामा पहनना भूल जाएंगे.

ट्रैफिक के दुरुस्त आवागमन के लिए अगर कोई पुलिसकर्मी आपको किसी चौराहे पर 2 मिनट के लिए रोक देता है, तो आप अपनी एयर कंडीशन कार में बैठे-बैठे उसको गाड़ी रुकवाने के बदले वर्दी उतरवाने की धमकी देते हैं! अभी तक इस तरह के जितने वीडियो है, उन पर आपने क्या कार्यवाही की अगर यही वीडियो किसी पुलिसकर्मी के आए होते तो आप पता नहीं कर गए होते उसकी जाँच से लेकर उसे विभागीय फंदे पर टांग दिया होता।

एक पुलिसकर्मी जिसको साइकिल भत्ता दिया जाता है और आप उससे अपेक्षा करते है की वो आपकी बुलेट ट्रेन की तरह काम करें हर घटना पर अपेक्षा की जाती है कि वह 5 मिनट में पहुंचे आपने कौन से संसाधन मुहैया कराया है। जिससे ये 5 मिनट में पहुंच जाएं वह उनकी व्यक्तिगत मोटरसाइकिल होती है और इसमें मासिक वेतन से मिलाने वाली रकम से घर खर्च  के बाद जेब के पैसे का पेट्रोल डालना पड़ता है।  

बाहर के अपराधी गैर जिला गैर प्रदेश ले जाने पड़ते हैं जिनके साथ पुलिसकर्मी स्वयं का व अपराधी का यात्रा खर्चा खाना खर्चा स्वयं वहन करता है जो कि उसे तुरंत देना पड़ता है और उसका टीए-डीए 3 साल 4 साल बाद किस तरह आधा-अधूरा मिलता है वह भी केवल पुलिसकर्मी का ना कि उस अपराधी पर खर्च किए गए खुराक का पुलिसकर्मी जब ड्यूटी से वापस थाने पहुंचता है तो रात 12:00 बजे उसे बताया जाता है कि फलां जगह पर सुबह 5:00 बजे  सीआईपी ड्यूटी या सुरक्षा ड्यूटी हेतु पहुंचना है। जो कि 20  किलोमीटर से 100 किलोमीटर तक दूरी हो सकती है ! उसका यात्रा खर्चा खाने का खर्चा सब कुछ स्वयं अपने पास से करना पड़ता है चाहे जैसे हो।

हालांकि राजपत्रित अधिकारी जो हर तरह से सक्षम होते हैं उन्हें इसकी चिंता बिल्कुल नहीं करनी पड़ती ! उन्हें यात्रा के लिए गाड़ी एवं ड्यूटी के लिए होटल में कमरा या गेस्ट रूम उपलब्ध कराया जाता है। अगर कुछ पैसा एडवांस इनको भी मिले जिससे कि इस तरह की ड्यूटी में कोई दिक्कत ना हो तो हुज़ूर आपकी इनपर बड़ी कृपा होगी। पुलिस विभाग में कार्यरत एक पुलिस वाले को छोड़ कर सारे राज्यके कर्मचारी एक साल में लगभग 90 दिन अवकाश के कारण छुट्टी पर रहते हैं। जबकि एक पुलिस वाला इन अवकाशों का एक घंटे भी उपयोग नहीं कर पाता और ड्यूटी करते हुए यह अवकाश गुजर जाते हैं।

1861 का पुलिस एक्ट है, जो की अंग्रेजों द्वारा इसलिए बनाया गया था की पुलिसकर्मियों ने उनके द्वारा की जा रही ज्यादतियों के विरुद्ध 1857 में  क्रांति का ऐसा अलख जगाया था, जिस के महानायक मंगल पांडे थे। जो स्वयं एक पुलिसकर्मी थे।  उसको दबाने के लिए 4 साल बाद 1861 में दमनकारी पुलिस एक्ट बनाया गया. क्योंकि उस समय पुलिस विभाग के बड़े पदों पर अंग्रेज ऑफिसर होते थे और छोटे पदों पर भारतीय होते थे। लेकिन अब जब बड़े और छोटे दोनों पदों पर भारतीय हैं तो फिर इस दमनकारी एक्ट के बदलाव के लिए भी हुज़ूर कुछ की जिये। पुलिसकर्मी आपके अनुशासन  नामक हंटर की मार से इतना लाचार और बेबस हो चुके हैं की परिवार में कब बैठकर चायकी चुस्की बच्चो के साथ ली होगी उसे पता ही नहीं। हाल ही में सड़क दुर्घटना में दुखद निधन प्रधान आरक्षक केरूसिंह निगवाल का हुआ ऐसे अनेक पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान स्वर्ग लोग जा चुके हैं शासन प्रशासन इनकी लंबी ड्यूटी के बारे में सोचें और सहयोग करें।


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