झाबुआ~ स्वच्छता सर्वेक्षण-6 कैटेगरी में सिंबल ऑफ  क्लीननेस के सम्मान से नवाजने की तैयारी,नपा को मिलेंगे 600 अंक~~

बाजार,होटल,हॉकर्स जोन,स्कूल,ऑफिस,अस्पताल स्वच्छ मिले तभी मिलेंगे ये नंबर~~


झाबुआसंजय जैन~~

स्वच्छता सर्वेक्षण में अब सम्मान अवार्ड को भी जोड़ा गया है जिसके नगरीय निकाय को 600 अंक मिलेंगे। इसे 6 कैटेगरी में बांटा गया है जिसमें स्वच्छ कार्यालय,अस्पताल,बाजार, स्कूल,शैक्षणिक संस्थान,प्रतिष्ठान में होटल, रेस्टोरेंट के अलावा स्वच्छ हॉकर्स जोन को भी शामिल किया गया है। इसके लिए 2 फरवरी तक संबंधित नगरीय निकाय को मेल पर आवेदन कर दिया गया है। हालांकि हकीकत यह है कि बाजार सहित अस्पताल व स्कूलों के अलावा कार्यालयों में भी रखे गए मापदंड पूरे नहीं हो पाएंगे क्योंकि इसके लिए काफी कुछ करने की जरूरत होगी। नगर पालिका अब 6 कैटेगिरी में स्वच्छता को लेकर काम करना होगा। इसमें शहर के अलग-अलग क्षेत्रों को बांटना होगा। इनमें स्वच्छ कार्यालय, स्वच्छ अस्पताल व नर्सिंग होम, स्वच्छ बाजार, स्वच्छ विद्यालय व शैक्षणिक संस्थान,स्वच्छ प्रतिष्ठान में होटल और रेस्टोरेंट और स्वच्छ हॉकर्स जोन को शामिल करना होगा। अब देखना यह है कि नगर के इस हालात पर झाबुआ कौन से पायदान पर खड़ा होता है .....?






हकीकत यह है ..... कैटेगिरी में जिन बिंदुओं पर मिलेंगे नंबर,उनमें अभी पूरी तरह फेल
1-स्वच्छ कार्यालय....
 इसमें 25 बिंदु दिए गए हैं जिन पर समिति नंबर देगी। इन बिंदुओं में कार्यालय भवन की स्थिति, स्वच्छता समिति का गठन, प्रतिदिन झाड़ू लगती है या नहीं,साफ  पानी की व्यवस्था,लोगो के लिए शौचालय,महिलाओं के लिए अलग से शौचालय,उसमें पानी की व्यवस्था, कार्यालय परिसर में 4 डस्टबिन होना चाहिए। हर कक्ष में नीले और हरे रंग की डस्टबिन होना के अलावा 3 साल में सेप्टिक टैंक को साफ  किया है या नहीं, इसकी जानकारी कर्मचारियों को होना चाहिए।
हकीकत....
तहसील कार्यालय में कहीं पर भी चार डस्टबिन नहीं रखे गएहैं। परिसर में भी प्रतिदिन झाड़ू नहीं लग पाती है। शौचालयों की हालत खराब है। परिसर में ही बाहर से आने वाले लोगों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। हर कक्ष में दो-दो डस्टबिन नहीं दिखाई देते हैं।






2-स्वच्छ अस्पताल....
अस्पताल भवन की स्थिति,साफ  पीने के पानी की व्यवस्था,मरीजों और आगंतुकों के लिए पृथक से शौचालय की व्यवस्था,दिव्यांग,महिलाओं और वृद्धजनों के लिए अलग शौचालय,कचरा संग्रहण के लिए उपकरण,जैविक कचरे के निष्पादन की व्यवस्था, शौचालय के अंदर और बाहर हाथ धोने की व्यवस्था,साबुन के अलावा गैलरी, प्रतीक्षा कक्ष और अस्पताल परिसर में साफ-.सफाई के साथ सौंदर्यीकरण है या नहीं।
हकीकत.....
जिला अस्पताल में मरीजों के लिए ही शौचालय की व्यवस्था तो है लेकिन आगंतुकों,मरीजों के परिजनों,वृद्धों के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल परिसर में ही काफी गंदगी के अलावा पानी भरा रहता है। अस्पताल में साफ. सफाई है लेकिन हाथ धोने के लिए अलग से साबुन आदि की कोई व्यवस्था नहीं है।






3- स्वच्छ बाजार.....
बाजार में स्वच्छता समिति का गठन करना, शौचालय की व्यवस्था,शौचालयों में पानी और साबुन का होना, हर दुकान पर गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखना,व्यापारियों को पता है कि सेप्टिक टैंक और सीवेज की समस्या,समाधान के लिए पोर्टल पर शिकायत की जा सकती है, इसकी जानकारी उन्हें है या नहीं।
हकीकत......
बाजार में नगर पालिका ने लोगों के लिए शौचालय तो बनाए हैं लेकिन पानी और साबुन की दिक्कत है। हर दुकान पर बाजार में गीला और सूखा कचरा नहीं रखा जा रहा है। दुकानों के बाहर डस्टबिन होना चाहिए लेकिन ऐसा कहीं पर भी नहीं दिखाई देता है।






4-हॉकर्स जोन और स्कूल.....
बाजार में हॉकर्स जोन के लिए समिति का गठन किया जाना चाहिए। हॉकर्स जोन में शौचालय की व्यवस्था की गई है या नहीं। हाथ धोने के लिए साबुन, नियमित झाड़ू लग पाती है या नहीं। पीने के साफ  पानी की व्यवस्था है या नहीं। चार डस्टबिन होना जरूरी है।
हकीकत....
हाथ ठेले जहां सब्जी मंडी के पास खड़े रहते हैं वहां की नाली इस कचरे से पटी पड़ी है। पानी सहित डस्टबिन की कोई व्यवस्था नहीं है। शौचालय की  कोई व्यवस्था नहीं हैै। कई स्कूल भवन काफी पुराने है। यहां के शौचालय में पानी की व्यवस्था नहीं है।






दुकानदारों को जागरूक किया जा रहा है.........
अब इस पर काम किया जाएगा। बाजार में प्लास्टिक की थैलियों के उपयोग को रोकने के लिए हमारा अभियान चल रहा है। दुकानदारों को इसके लिए जागरूक किया जा रहा है।
...............एल.एस.डोडिया-सीएमओ,नगर पालिका-झाबुआ




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