झाबुआ~शिक्षा भी महंगी -कॉपी-किताबों के दामों में 25 फीसदी तक का इजाफा-रबर,पेंसिल,शार्पनर के दाम भी बढ़े~~

कॉपियों के पेज कम कर दाम बढ़ाए,128 पेज की कॉपी में अब 120 पेज आ रहे~~


झाबुआसंजय जैन~~

महंगाई की मार से शिक्षा विभाग भी अछूता नहीं रहा है। पिछले साल की तुलना में इस बार कॉपी-किताबें जहां 25 फीसदी तक महंगी हुई हैं,तो वहीं रबर, पेंसिल और शार्पनर के दामों में भी 10 से 20 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है।





 
छूने लगे आसमान शिक्षा की हर चीज के भाव .....
स्टेशनरी व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है, कि रद्दी के दामों में बढ़ोत्तरी के चलते शिक्षा की हर चीज के भाव आसमान छूने लगे हैं। इसका सीधा असर इस बार अभिभावकों पर पड़ेगा। दो साल से स्कूली फीस की मार झेल रहे पेरेंट्स को इस साल कॉपी-किताबों की बढ़ी हुई कीमतों ने अभी से परेशान कर दिया है। दो साल से कोरोना संक्रमण के चलते बच्चों की ऑनलाइन क्लास में अभिभावकों को किताब-कॉपियों पर कम खर्च करना पड़ा था,लेकिन अब सब ओपन होने के बाद से स्कूलों में बच्चों की कक्षाएं भी ऑफलाइन हो गई हैं। ऐसे में किताब-कॉपियों के दामों में बढ़ोत्तरी का असर लोगों की जेब पर दिखेगा। रद्दी महंगी होने से पिछले साल के हिसाब से इस बार कॉपियों के दाम 20 से 25 प्रतिशत बढ़े हैं। जबकि किताबों के दाम 10 से 20 प्रतिशत बढ़े हैं।





 
इस तरह बढ़े दाम......
164 पेज की कॉपी पहले 30 रुपए में आती थी,जो अब 35 से 40 रुपए हो गई। 28 पेज की कॉपी 5 रुपए में आती थी,जो अब 20 पेज की होने के साथ 8 से 10 रुपए में मिल रही है। वहीं 10 रुपए वाली रॉयल कॉपी पेज कम होने के बाद भी 15 रुपए में मिल रही है। रफ  कॉपी पहले 20 रुपए में आ जाती थी,इसके दाम अब 25 से 30 रुपए हो गए हैं। 192 पेज की कॉपी 25 से 35 रुपए की हो गई। 120 पेज की कॉपी 15 रुपए की थी,वह अब 20 में मिल रही है। इसके अलावा रबर,पेंसिल या शार्पनर के सेट भी अब 55-60 रुपए हो गए हैं।






अभिभावक बोले.............
हर तरफ  महंगाई की मार ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया....
स्कूलों के हिसाब से कॉपी-किताबों के दाम भी अलग-अलग हैं। जिन स्कूलों की फीस अधिक है। उनकी ड्रेस सहित अन्य सामग्री भी महंगी है। अब दामों में इजाफा होने से दोहरी मार पड़ रही है। उन्होंने कहा कि इन दिनों हर तरफ  महंगाई की मार ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है।
................जितेंद्र सिंह राठौर-अभिभावक-झाबुआ





 
अच्छे स्कूलों में पढ़ाना मुश्किल ........
 हर साल किताबों-कॉपियों सहित अन्य सामग्री के दाम बढ़ते हैं,ऐसे में आम लोगों का बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाना मुश्किल हो जाएगा।
.................निखिल भंडारी-अभिभावक-झाबुआ





 
कीमतों में दो तरीके से इजाफा किया गया.........
कॉपियों की कीमतों में दो तरीके से इजाफा किया गया है। एक तरफ  ब्रांडेड कंपनियों ने कॉपियों के दाम बढ़ाने की जगह कॉपियों के पेज कम कर दिए,जबकि कुछ कंपनियों ने साइज-लंबाई,चौड़ाई कम की है। इसके अलावा लोकल ब्रांड की कॉपियों ने दाम बढ़ाने के साथ कुछ पेजों की संख्या भी घटाई है। उन्होंने बताया कि 128 पेज की कापी 120 पेज की हो गई है। कुछ कंपनियों ने पेज कम करने के साथ कीमत भी 15 से 20 रुपए बढ़ा दी है। 64 पेज की कापी जो 10 रुपए में आती थी,वह अब 48 पेज होने के साथ 15 रुपए की हो गई है।
................मनीष गांधी-महावीर स्टेशनरी-झाबुआ  




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