धार~आज से शुरु होगी सरकारी खरीदी
समर्थन मूल्य से ज्यादा रुपए मंडी में मिल रहे ~~

41 हजार किसानों ने करवाया पंजीयन, किंतु मंडी की ओर किसानों का रुख ~~

स्लॉट बुक करने में आ रही तकनीकी दिक्कत ~~

धार ( डाँ.अशोक शास्त्री )।

सोमवार 28 मार्च से जिले में सरकारी खरीदी शुरु हो रही हैं, इस साल धार में दतिया मॉडल पर गेहूं की खरीदी होगी। खरीदी के पहले की तैयारियां जिला प्रशासन द्वारा सोसायटी में पूरी कर ली गई हैं, इस मर्तबा किसानों को एसएमएस नहीं आएगा। किसानों को स्वयं ही स्लॉट बुक करने के बाद तय समय को अपनी उपज लेकर आना होगा। साथ ही पूरी उपज एक ही बार में लेकर आनी होगी, किसान अपनी तहसील के किसी भी उर्पाजन केंद्र पर अपनी उपज की तुलवाई स्लॉट के अनुसार कर सकेगा। हालांकि सरकारी खरीदी शुरु होने के पहले ही कई किसानों में मंडी में अच्छे भाव मिलने के कारण व्यापारियों को अपनी उपज बेच दी हैं, किसानों का वर्तमान में मंडी की ओर रुख ज्यादा है।
41 हजार किसानों का पंजीयन
सरकार ने खरीदी में व्यवस्था सुधारने के साथ ही गेंहू खरीदी का मूल्य भी पिछले वर्षों की तुलना में बढ़ाया है। गत वर्ष गेंहू का दाम 1975 रुपए प्रति क्विंटल था, जबकि इस मर्तबा समर्थन मूल्य 2015 रुपए तय किया गया है। यानी पिछले साल की तुलना में आंशिक वृद्धि की गई है। हालांकि मंडी में इससे बेहतर किसानों को मूल्य मिल रहा हैं, वर्तमान में प्रति क्विंटल गेंहू मंडी में 2250 रुपए तक बिक रहा है। ऐसे में मंडी में 200 रुपए से अधिक मिलने व उपज की पूरी रकम में समय पर प्राप्त हो रही हैं, जबकि सरकारी खरीदी का भुगतान एक सप्ताह में होता है। जिले में सरकारी खरीदी के लिए 41 हजार 800 के करीब किसानों ने अपना पंजीयन करवाया है।
स्लॉट बुक करने में तकनीकी दिक्कत
गेहूं खरीदी के लिए जिले में 109 केंद्र बनाए गए हैं, इसमें 20 साइलो खरीदी केंद्र है। जबकि 47 केंद्र ऐसे है, जिनकी खरीदी गोदाम के नजदीक होगी। ऐसे में किसान की उपज खरीदने के बाद सीधे गोदाम में चली जाएगी, इसी प्रकार 41 खरीदी केंद्र अपने स्तर पर समिति के माध्यम से खरीदी करेंगे। इस साल करीब दो लाख टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य रखा गया हैं, हालांकि किसान जीतना गेंहू लेकर आएगा उतना पूरा गेहूं उनसे खरीदा जाएगा। वहीं किसानों को इस बार गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुक करना है। जिसमें तकनीकी दिक्कतों का सामना किसानों को करना पड रहा है। इस वजह से ही अभी तक महज कुछ किसानों ने ही स्लॉट बुक करने का काम किया है।


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