झाबुआ~केवी में पहली कक्षा की किताबें 500 रुपए की,निजी स्कूलों में 3500 का सेट-वहीं केंद्रीय विद्यालय में चल रहा सेव पेपर अभियान *पुस्तकोपहार*~~


झाबुआसंजय जैन~~

1 अप्रैल से स्कूलें 100 फीसदी क्षमता के साथ खुल गई हैं। जिसके चलते निजी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के लिए अभिभावकों को मोटी फीस के साथ महंगी किताबें और ड्रेस आदि की समस्या से भी जूझना पड़ रहा। शासन के निर्देशों के बावजूद भी निजी स्कूलों की किताबें केवल निश्चित दुकानों पर ही उपलब्ध हैं। जबकि केंद्रीय विद्यालय के विद्यार्थियों को शहर की किसी भी स्टेशनरी पर किताबें मिल जाती है।





 
हो रहे हर साल हजारों अभिभावक ठगी का शिकार ........
दोपहर टीम ने पूरे मामले की पड़ताल की तो सामने आया कि केंद्रीय विद्यालय में केवल एनसीईआरटी की किताबें इस्तेमाल की जाती हैं, उदाहरण के तौर पर केवी के विद्यार्थियों को पहली कक्षा की किताबें महज 500 रुपए में उपलब्ध हैं। जबकि निजी स्कूलों में इसी कक्षा की किताबें 3500 रुपए तक की बेची जा रही हैं। निजी स्कूल की दिल्ली के प्रकाशकों से सांठगांठ इसकी वजह है। निजी स्कूल विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की किताबों की जगह दिल्ली के प्रकाशकों की किताबें खरीदने को कहा जाता हैं,वहीं प्रकाशक अपनी किताबें केवल अनुबंधित स्टेशनरी को ही उपलब्ध कराते हैं। इस तरह प्रकाशक, निजी स्कूल और दुकानदार की सांठगांठ से हर साल हजारों अभिभावक ठगी का शिकार हो रहे हैं।






200 पेज की कॉपी अब 172 पन्ने की बिक रही.....
कोरोना काल के दो साल की तुलना में इस वर्ष कॉपी-किताब के अलावा पेन-पेंसिल,लंच बॉक्स और पानी की बोतल आदि की डिमांड बढ़ रही है। ऐसे में कच्चे माल की पर्याप्त आवक न होने के कारण स्टेशनरी के सभी सामान 15 से 20 फीसदी तक महंगे हो गए हैं। दो महीने में सर्वाधिक वृद्धि कागज की कीमत में हुई है।





 
केंद्रीय विद्यालय में चल रहा सेव पेपर अभियान *पुस्तकोपहार* ......
एक तरफ  जहां निजी स्कूल अभिभावकों की जेब खाली करने में लगे हैं। वहीं केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य जेपी बोहरे ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा सेव पेपर *पुस्तकोपहार*अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत विद्यार्थी अपनी पुरानी किताबें अपने से एक वर्ष जूनियर विद्यार्थी को देते हैं। इससे न केवल जरूरतमंद विद्यार्थियों को किताबों की मदद मिलती है,बल्कि नई किताबों के लिए पेपर की बचत भी होती है।






***पड़ताल-1****
एलकेजी के पर्चे में 16 कॉपी-किताबें, बिल भी कच्चा थमाया
स्टेशनरी की दुकान से मिले एक पर्चे में एलकेजी के विद्यार्थी के लिए 16 कॉपी-किताबें दी गईं। नाम न छापने की शर्त पर अभिभावक ने बताया कि सात किताबें और 9 प्रकार की कॉपियां शामिल थी,16 किताबों की कीमत 2810 रुपए लगाई गई। इसके अलावा कलर,कवर आदि थमाकर कुल 3369 रुपए देने को कहा। इतना ही नहीं जब दुकानदार से पक्का बिल मांगा तो दुकानदार बोला किताबों में पहले से टैक्स कटा है और मैंने किताबों की लिस्ट बनाकर दी है। इसका पक्का बिल नहीं दिया जाता।






****पड़ताल-2****
एक किताब मांगी,तो बोले पूरा सेट ही लेना पड़ेगा.....
झाबुआ मुख्य बाजार स्थित स्टेशनरी की दुकान पर जब एक अभिभावक ने पहली कक्षा की ईवीएस विषय की एक किताब मांगी तो दुकानदार ने एक किताब देने से मना कर दिया। बोला आपको पूरा सेट ही लेना पड़ेगा। इतना ही नहीं किताबों के साथ कॉपी,रोल,स्केल,पेन-पेंसिल और स्टेशनरी की अन्य सामग्री का पूरा सेट बनाकर दिया जा रहा है।






दिल्ली के निजी स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के निर्देश....
दिल्ली सरकार ने वर्ष 2021 में प्रदेश के सभी निजी स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें ही इस्तेमाल करने के निर्देश जारी किए हैं। इससे न केवल छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पाठ्यक्रम में समानता मिलेगी,बल्कि बस्ते का वजन भी कम होगा। लेकिन प्रदेश में फिलहाल इस विषय पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।






कागज के रेट अब 80 रुपए किलो..........
कागज के रेट कोरोना काल में 52 रुपए किलो तक पहुंच गए थे,लेकिन अब 80 रुपए किलो का भाव है। पहले 200 पेज की कॉपी जहां 45 रुपए की थी और अब अप्रैल माह से 55 रुपए यानी 10 रुपए महंगी हो चुकी है।। इतना ही नहीं घाटे की भरपाई के लिए कंपनियों ने 200 पेज की कॉपी 172 पेज की कर दी है। इसके अलावा 5 रुपए का पेन 7 रुपए और प्लास्टिक की सामग्री भी 10-20 रुपए महंगी हो चुकी है।
.............मनीष गांधी-महावीर स्टेशनरी-झाबुआ





 
स्कूल मनमानी कर रहे हैं तो कार्रवाई की जाएगी......
फिलहाल अभिभावकों की ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। इस संबंध में शासन के स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी स्कूल द्वारा अभिभावकों को एक निश्चित दुकान पर नहीं भेजा जा सकता है। मैं इस संबंध में कल ही दिशा-निर्देश जारी करूंगा और यदि कोई स्कूल इस तरह मनमानी कर रहा है तो उस पर कार्रवाई भी की जाएगी।
.............ओपी बनडे-जिला शिक्षा अधिकारी-झाबुआ




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