झाबुआ~निजी स्कूलों की किताबें और ड्रेस सिर्फ  कुछ चुनिंदा दुकानों पर, ठगे जा रहे अभिभावक~~

निजी स्कूलों को सूचना पटल पर चस्पा करना थी-5 पुस्तक विक्रेताओं की सूची-जिम्मेदारों ने आदेश को ताक में रखा-सांठगांठ के चलते औपचारिकता बन कर रह गया आदेश ~~


झाबुआसंजय जैन~~

1 अप्रैल से स्कूलें 100 फीसदी क्षमता के साथ खुल गई हैं। जिसके चलते निजी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के लिए अभिभावकों को मोटी फीस के साथ महंगी किताबें और ड्रेस आदि की समस्या से भी जूझना पड़ रहा। शासन के निर्देशों के बावजूद भी निजी स्कूलों की किताबें केवल निश्चित दुकानों पर ही उपलब्ध हैं। निजी स्कूल संचालकों और पुस्तक विक्रेताओं के गठजोड़ को खत्म करने के लिए कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने 5 अप्रैल को आदेश जारी किया था कि सभी निजी स्कूल पुस्तक और शाला गणवेश उपलब्ध कराने वाली कम से कम 5-5 दुकानों के नाम विद्यालय के सूचना पटल पर स्वच्छ एवं स्पष्ट रूप से चस्पा किये जाय। बावजूद इसके जिम्मेदारों ने इस आदेश को ताक में रखते हुए,अभी तक किसी भी स्कूल का निरीक्षण तक नहीं किया। जिससे इस आदेश का पालन हो सके।
सांठगांठ के चलते औपचारिकता बन कर रह गया आदेश ..........
वैसे भी अप्रैल का आधे से अधिक महीना बीत चुका है,जिसके कारण स्कूलों के दबाव के चलते अधिकांश अभिवावको ने पुस्तके और शाला गणवेश स्कूलों की सेटिंग वाली दुकानों से खरीद भी ली है। यह आदेश साठगांठ के चलते सिर्फ  एक औपचारिकता बनकर रह गया है ,ऐसा साफ  प्रतीत हो रहा है। इस आदेश का असर स्कूल संचालकों पर कतई दिखाई नहीं दे रहा। शिक्षा विभाग भी कलेक्टर के आदेश का पालन कराना भूल गया है या फिर यह कहें कि निजी स्कूल संचालकों से मिला हुआ है।





 
अप्रैल का आधे से अधिक महीना बीत चुका,अधिकांश अभिभावकों ने किताबें भी खरीद ली.....
आदेश के 18 दिन बाद भी किसी भी निजी स्कूल ने अपने यहां संचालित होने वाले पाठ्यक्रम और शहर की किन पांच दुकानों पर उपलब्ध है, इसकी सूची अब तक निजी स्कूलों ने  सूचना पटल पर चस्पा नहीं की है। हालांकि ऐसे आदेश का अब ज्यादा फायदा अभिभावकों को नहीं है क्योंकि अप्रैल का आधे से अधिक महीना बीत चुका है और ज्यादातर अभिभावकों अपने बच्चों के लिए कोर्स की किताबें खरीद चुके हैं।






ठगे जा रहे अभिभावक......
नवीन शिक्षण सत्र में निजी स्कूल संचालक अभिभावकों से नई कक्षा की किताबें मंगवाने लगे हैं। निजी स्कूलों की किताबें किसी एक विशेष दुकान पर मिलने की वजह से अभिभावक मोलभाव नहीं कर पाते हैं बल्कि उन्हें मुंह मांगे दाम चुकाने को मजबूर होना पड़ रहा है। अभिभावक ठगे जा रहे हैं।  5 अप्रैल को कलेक्टर ने आदेश जारी किया था सभी निजी स्कूल अपने यहां संचालित होने वाले पाठ्यक्रम और वे किन पांच दुकानों पर उपलब्ध है,इसकी सूची विद्यालय के सूचना पटल पर स्वच्छ एवं स्पष्ट रूप से चस्पा किये जाय। लेकिन इस आदेश का पालन अब तक किसी भी निजी स्कूल ने नहीं किया है।






तीन गुना महंगी है निजी प्रकाशकों की किताबें......
जिले में 265 से अधिक निजी स्कूल हैं। इन स्कूलों में निगम और सीबीएसई पाठ्यक्रम के बजाए निजी प्रकाशकों की पुस्तकें पढ़ाई जा रही है। यह पुस्तकें निगम और सीबीएसई की तुलना दो से तीन गुना मंहगी है। वहीं ये किताबें किसी एक विशेष दुकान पर मिलने की वजह से अभिभावकों को मुंह मांगे दाम देना पड़ रहे हैं। हर साल स्कूल संचालकों और पुस्तक विक्रेताओं के गठजोड़ से त्रस्त अभिभावक प्रशासन के पास शिकायतें लेकर तो पहुंचते हैं,लेकिन कार्रवाई नहीं होती।






किताबों के साथ स्कूल ड्रेस का भी यही हाल........
निजी स्कूलों में चलने वाली किताबों के साथ उनकी ड्रेस भी बाजार में चुनिंदा दुकानों पर ही उपलब्ध है। परिणामस्वरूप किताबों की भांति अभिभावकों को स्कूल ड्रेस के लिए भी मुंह मांगे पैसे चुकाने होते हैं। खास बात तो यह है कि शहर में स्टेशनरी की करीब आधा सैकड़ा से अधिक दुकानें हैं। वहीं रेडीमेड गारमेंट्स की संख्या इनसे दोगुनी है। लेकिन शहर में 90 फीसदी स्कूल 2 से 4 स्टेशनरी और रेडीमेड दुकानों पर सेट हैं।





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करना यह था,लुटेरों पर अंकुश लग जाता.........
आदेश में सूचना पटल के साथ -साथ पुस्तक और शाला गणवेश उपलब्ध कराने वाली कम से कम 5-5 दुकानों के नाम की सूची की एक प्रतिलिपि भी स्कूलों के लिए जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर अनिवार्य रूप से तय सीमा के भीतर पहुंचाने का आदेश जारी करना था। जिससे बड़ी आसानी से प्रभावी लुटेरों दुकानदारों पर अंकुश लग जाता,ऐसा हमारा मानना है ।





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प्रशासन सख्त हो तो ही खत्म हो सकेगी निजी स्कूलों की मनमानी.........
यह समस्या हर साल की है। नवीन शिक्षण सत्र प्रारंभ होते ही निजी स्कूल संचालक अभिभावकों को विशेष दुकान से किताबें खरीदने के लिए मजबूर करते हैं, जिससे अभिभावक मोलभाव नहीं कर पाता है। अच्छा कमीशन पाने के लिए निजी स्कूल निजी प्रकाशकों के महंगे पाठ्यक्रम अभिभावकों से खरीदवाते हैं। प्रशासन को चाहिए कि इस मोनोपोली को खत्म करने के लिए सख्ती से कदम उठाए जाएं। यदि कलेक्टर साहब ने पांच-पांच दुकानों का आदेश निकाला है तो उसका ठीक पालन कराना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
..........जितेंद्र सिंह राठौर- रहवासी- झाबुआ





 
जानकारी ली जाएगी..........
कलेक्टर साहब की ओर आदेश निकला था लेकिन अभी तक किसी भी निजी स्कूल ने स्कूल पुस्तक और शाला गणवेश उपलब्ध कराने वाली कम से कम 5-5 दुकानों के नाम विद्यालय के सूचना पटल पर स्वच्छ एवं स्पष्ट रूप से चस्पा नहीं किये हैं। सभी स्कूलों से इस संबंध में जानकारी ली जाएगी।
.............मानसिंह हटीला,बीआरसीसी-झाबुआ  






कड़ी करवाई की जाएगी.......
कलेक्टर साहब के आदेश के परिपालन के तहत मै स्वत: केंद्रीय विद्यालय और मिशन स्कूल पर निरीक्षण के लिए गया था।  वहां पर सूचना पटल पर कोई भी सूची चस्पा नहीं की गयी थी । मैंने चेतावनी देते हुए उन्हें तुरंत सूची चस्पा करने हेतु कहा है। अब यदि कोई भी स्कूल निरीक्षण के दौरान इस आदेश का उल्लंघन करते पायी गयी तो कलेक्टर साहब से चर्चा एवं मार्गदर्शन लेकर कड़ी करवाई की जाएगी। हुआ तो मान्यता भी रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है ।
.............ओपी बनडे-जिला शिक्षा अधिकारी-झाबुआ





 
डीईओ से चर्चा करेंगे......
निजी स्कूलों को स्कूल पुस्तक और शाला गणवेश उपलब्ध कराने वाली कम से कम 5-5 दुकानों के नाम विद्यालय के सूचना पटल पर स्वच्छ एवं स्पष्ट रूप से चस्पा के लिए कहा था। यदि उनके द्वारा सूची चस्पा नहीं की गई है तो इस संबंध में डीईओ से चर्चा की जाएगी। किसी अभिभावक की यदि इस संबंध में शिकायत प्राप्त होती है तो कार्रवाई की जाएगी।
...........सोमेश मिश्रा-कलेक्टर-झाबुआ





 




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