धार~ऐसे तैयार होते हैं नए सरकारी दस्तावेज~~

सरकारी रिकार्ड में मंदिर-भूमि खंडेराव के नाम से दर्ज, अब इसके आगे गलत जानकारी से जुड़वा लिया देवनारायण मंदिर ~~

( धार से डाँ.अशोक शास्त्री )

ऐसे तैयार होते हैं नए सरकारी दस्तावेज.....
सरकारी रिकार्ड में मंदिर-भूमि खंडेराव के नाम से दर्ज, अब इसके आगे गलत जानकारी से जुड़वा लिया देवनारायण मंदिर
शासन संधारित है ग्राम बिल्लोद का मंदिर, पंचायत ने भी लिखा रिकार्ड में देवनारायण नाम से कोई मंदिर नहीं
मराठो के देव-देवक में शामिल हैं खंडेराव, पुजारी भर्ती में शासन विरुद्ध वाद दायर कर पारित आदेश में उल्लेखित करवाया देवनारायण मंदिर
धार। नालछा जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बिल्लोद में शासन द्वारा संधारित खंडेराव महाराज मंदिर को देवनारायण मंदिर साबित किया जा रहा है। इसके लिए बकायदा शासन के साथ ही मुकदमें-दावे के माध्यम से गलत जानकारियों के आधार पर नवीन रिकार्ड तैयार किए जा रहे हैं। इस मामले में 4 लोगों की भूमिका मुख्य रूप से सामने आई है। जिसमें दो लोग महू तहसील इंदौर के निवासी है और दो लोग दिग्ठान क्षेत्र के निवासी है। गलत जानकारियों के आधार पर शासन को गुमराह करके मंदिर-भूमि व दो समुदाय में विवाद खड़ा करने की कोशिशें की जा रही है। सबसे मुख्य बात यह है कि इस मंदिर के संरक्षक के तौर पर जिला कलेक्टर है। उल्लेखनीय है कि धार में 250 करोड़ रुपए (वर्तमान कीमत) जमीन अफरा-तफरी मामले में मुकदमों के माध्यम से तत्कालीन एसडीएम से स्टेट द्वारा दान में दी गई भूमि जो बाद में सरकारी भूमि हुई है। उसे निजी बताकर आदेश पारित किया गया था। हालांकि उस मामले में अब तत्कालीन एसडीएम को जेल भी जाना पड़ा है, लेकिन एक आदेश के आधार पर आगे के मुकदमों के फैसले आरोपित पक्ष ने अपने पक्ष में करवाए थे। इस मामले को लेकर श्री महंत प्रह्लाददास वेदाचार्य ग्राम बिल्लोद ने कलेक्टर को भी शिकायत की है।
खंडेराव मराठा देवता, देवनारायण लोक देवता
ग्राम बिल्लोद में भगवान खंडेराव के मंदिर के साथ उनकी कृषि भूमि भी है। यह भूमि रोड बनने से अब मुख्य मार्ग पर आ गई है। मंदिर के खंडेराव महाराज मूल रूप से मराठा देवता माने जाते है। वहीं भगवान देवनारायण जिन्हें लोक देवता की संज्ञा दी गई है, वे गुर्जर समाज के आराध्य माने जाते हैं। जहां एक और शासकीय रिकार्ड में दर्ज नाम से छेड़छाड़ की जा रही है। वहीं दो समुदाय में वैमन्स्य फैलाने की कोशिशें हो रही है। सबसे मुख्य बात यह है कि ग्राम पंचायत ने भी प्रमाण पत्र जारी कर स्पष्ट लिखा है कि पंचायत रिकार्ड में उक्त मंदिर सरकार के रिकार्ड की तरह श्री खंडेराव महाराज मंदिर प्रबंधक श्रीमान कलेक्टर महोदय है। श्री देवनारायण मंदिर ग्राम बिल्लोद में कहीं नहीं है। ग्राम पंचायत में इसका रिकार्ड भी दर्ज नहीं है। इसके बावजूद मंदिर में खंडेराव को श्री देवनारायण देव बताकर पूजा-अर्चना की जा रही है।
एसडीएम के आदेश में चढ़ा पहले श्री देवनारायण
पिछले 4-5 साल से श्री खंडेराव महाराज मंदिर को श्री देवनारायण मंदिर बताने का विवाद चल रहा है। अब इस मामले में एसडीएम कोर्ट से 15 फरवरी 2022 को पारित एक आदेश से पहली मर्तबा सरकारी रिकार्ड में दर्ज श्री खंडेराव मंदिर को बदलते हुए श्री देवनारायण खंडेराव महाराज मंदिर नाम लिखा गया है। सबसे मुख्य बात यह है कि मंदिर में पुजारी की नियुक्ति को लेकर चार लोगों ने आवेदन किए। वहीं इसमें मप्र शासन के विरुद्ध आवेदन लगाया गया। इस मामले में चार में से एक व्यक्ति तुलसीराम बैरागी ने  अपना पुजारी पद आवेदन निरस्त करने  की मांग की। श्री बैरागी ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम था कि यह गुर्जरों के देवता है। उसे आवेदन करने के बाद ज्ञात हुआ कि यह देवनारायण मंदिर है और इसमें गुर्जर समाज के व्यक्ति ही पूजा करते हैं, चूंकि में बैरागी हूं इसलिए मैं अपना आवेदन वापस लेता हूं। इसके पश्चात एक अन्य आवेदक अंकुश पिता विष्णुप्रसाद चौधरी ने दूसरे आवेदक विजयसिंह गुर्जर का नाम आगे बढ़ाते हुए उसे पुजारी का दायित्व देने पर सहमति जताई। शेष दो आवेदकों में एक की योग्यता मापदंडों के तहत नहीं पाई गई। जिसके बाद विजयसिंह पिता मदनसिंह गुर्जर निवासी महू जिला इंदौर को पुजारी घोषित किया गया। इन आवेदनों से पुजारी नियुक्ति का विवाद सुलझ गया, लेकिन इस आदेश में आवेदन के आधार पर श्री देवनारायण खंडेराव मंदिर के मामले में आदेश पारित हो गया।


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