धार~जन भावनाओं का हो सम्मान विजय स्तंभ को विजय मंदिर में ही स्थापित किया जाए~~

हस्ताक्षर अभियान में मायापुरी कॉलोनी की मातृशक्ति ने भी किए हस्ताक्षर~~

धार ( डाँ.अशोक शास्त्री )

विगत दिनों हुई एक प्रेस वार्ता में नगर के गणमान्य नागरिकों , राजनेताओं बुद्धिजीवियों , शोधकर्ता आदि की उपस्थिती मे कुछ लोगो ने  विजय मंदिर स्थित विजय स्तंभ के खंडों को किले में स्थांतरित करने की मांग की महाराजा भोज द्वारा निर्मित यह मंदिर दक्षिण के गांगेय राजा पर विजय कि कीर्ति और पराक्रम का प्रमाण है आज भी समस्त हिंदू समाज नगरवासी स्मृति के रूप में दशहरे के दिन विजय उत्सव उसी विजय मंदिर में मनाते है स्तंभ को किले में स्थापित करने से विजय मंदिर की पहचान ही समाप्त हो जाएगी  यह स्तंभ विजय मंदिर में ही स्थापित होना चाहिए तभी इसके संरक्षण की सार्थकता है  क्योकि किले में जाने के पश्चात इसकी पहचान कालांतर में समाप्त हो जाएगी और विजय मंदिर से एक साक्ष्य भी हट जाएगा जो उसके इतिहास की गवाही देता है वही अन्य समुदाय के लोग इस मंदिर को ईदगाह बना कर अवैध कब्जा किए हुए है । एसी स्थिती में मंदिर से सम्बंधित साक्ष्यों को वहीं संरक्षित करने की आवश्यकता है यह एक भुल हमारे गौरवशाली अतित को हमसे दुर कर सकती है और जो समाज अपने इतिहास और संस्कृतिक पहचानों को छोड़ देता है वह समाज समाप्त हो जाता है वह देश अपनी मुल पहचान को समाप्त कर देते है हम धार के वासी भारत के एक गौरवशाली अतित को अपने यहाँ रखे हुए है। यह हमारा सौभाग्य है  उस गौरवशाली अतित के मुल स्वरूप से कोई छेड़छाड़ ना हो इसका हमें प्रयास करना चाहिए
विजय मंदिर कीर्ति स्तंभ पुनर्स्थापना समिति
के संयोजक अभिषेक मिश्रा ने बताया की विजय स्तंभ को विजय मंदिर से हटाकर किले में स्थापित करने की नियत क्या है स्तंभ का हटना विजय मंदिर के अस्तित्व पर प्रश्न खड़ा करेगा वही किला मुस्लिम शासक द्वारा बनाए गए हैं वहां स्तंभ स्थापित करके उनके विजय की गौरव गाथा का गुणगान करना चाहता है ।
अतः उस स्तंभ को विजय मंदिर प्रांगण में ही स्थापित किया जावे नगरवासियों की  जनभावनाओं को देखते हुए हमने हस्ताक्षर अभियान प्रारंभ किया है जो बंधु भगिनी यह चाहते है कि विजय स्तंभ के खंडों को पुनः जोड़ कर विजय मंदिर प्रांगण में ही स्थापित किया जावे वे अपने नाम पते सहित पत्रक पर हस्ताक्षर करें और धार नगर की जनता की भावनाओं से उन सभी को अवगत करावे जो बंद कमरों में बैठ कर जनता के निति निर्धारक बने बैठे हैं ।


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