झाबुआ~सालों बाद हुयी ऐतिहासिक अतिक्रमण मुहिम......अति का अंत तो होना ही था......लोगों में हर्ष  ~~

शहर में फैला अतिक्रमण सख्ती से हटाया गया-मुहिम सतत जारी रहेगी....

* निज पर शासन फिर अनुशासन* की तर्ज पर,हटाना होगा नगर पालिका द्वारा किया गया अतिक्रमण भी ......


झाबुआसंजय जैन~~

शहर सालों से अतिक्रमण की चपेट में था। हालत यह थे चौड़े मार्ग भी अतिक्रमण से संकरे हो गए थे। ऐसे में लोगों को निकलने के लिए जगह तक नहीं मिल पाती थी। बड़ी संख्या में खरीदारी के लिए बाजार आने वाले लोगों को निकलने के लिए पांच फीट जगह भी नसीब नहीं होती थी। अधिकारियों ने शहर से अतिक्रमण हटाने को लेकर योजना बनाई। जिसके चलते आज बुधवार से झाबुआ की पहली ऐतिहासिक अतिक्रमण मुहिम के तहत सिद्धेश्वर कॉलोनी ,राजवाड़ा चौक,आजाद चौक,मुख्य बाजार बस स्टैंड,नगर पालिका रोड,अस्पताल रोड के अधिकतर,अतिक्रमण को जमीजोद कर,मुहिम का एक कठोर अंदाज में आगाज किया। साथ ही सर्किट हाउस के सामने के कुछ अतिक्रमण जहा कल बह मुहिम जारी रहेगी । 






अब बचे है यह क्षेत्र अतिक्रमण मुहिम से  .............
शहर का हृदय स्थल राजवाड़ा चौक के आस पास प्रमुख बैंके  होने का कारण यह पर आये दिन जाम और विवाद होते रहते है । सड़क के दोनों ओर दुकानदार और ग्राहकों के वाहन खड़े रहते हैं। जबकि बैंक परिसर के मकान मालिकों को बैंक को पार्किंग की समुचित व्यवस्था देनी होती है जो कि नियम में भी है । अत: ऐसे मकान मालिकों पर भारी जुर्माने की व्यवस्था लागू करनी होगी।





 
न बन जाये मुहिम सोडा इफ़ेक्ट की तरह .............
कमल टाकीज गल्ली,कुम्हार वाड़ा,सम्पूर्ण हुडा क्षेत्र,पावर हाउस रोड और बस प्रवेश मार्ग के अतिक्रमणो को चिन्हित कर उसे भी हटाए।  इससे शहर कुछ ही समय में अतिक्रमण मुक्त हो जायेगा। यह मुहिम सोडा इफ़ेक्ट की तरह न बन जाये इस पर प्रशासन को सतत नजर रखनी होगी।  यदि कोई अतिक्रमण दोबारा करता है,तो दोषियों को कठोर कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान तय करना होगा।





 
मुक्त करना चाहिए झाबुआ के नगर पालिका के चारो प्याऊ को भी अतिक्रमण से .......
नगर पालिका को नजूल भूमि पर दानदाताओ द्वारा बनाये गए चारो प्याऊ-पहला  कोर्ट परिसर,दूसरा राजवाड़ा,तीसरा कालका माता मंदिर,चौथा बस स्टैंड गोल चकरी के पास और पांचवा प्याऊ बस स्टैंड के भीतर की तो क्या बात करे,वो तो अपना अस्तित्व ही खो चुका है । नगर पालिका को भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए,इस मुहीम के तहत इन चारो प्याऊ को अतिक्रमण से मुक्त करके प्याऊ को सुचारु रूप से प्रारम्भ करने की बहुत आवश्यकता है । चारो प्याऊ को अतिक्रमण से मुक्त करना चाहिए जिस पर प्रभावी लोगों का कब्जा हो चुका है ।





 न होने पावे,मुहिम में किसी भी तरीके का पक्षपात.........
समाचार प्रकाशित होने पर प्रशासन का हौसला कुछ कमजोर हो जाता है। इसलिए प्रशासन को चाहिए कि इस अतिक्रमण मुहिम में किसी भी तरीके का पक्षपात न होने पाए,क्योंकि झाबुआ में पहली बार ऐसी कठोर मुहिम जनता ने देखीं है ।






नगर पालिका द्वारा किया गया अतिक्रमण भी हटाना होगा .........
झाबुआ की धरोहर राजवाड़ा के मुख्य द्वार के बाहर ही नगरपालिका द्वारा पक्का मंच-स्टेज बनाकर नजूल की भूमि पर अतिक्रमण कर रखा है,जिसे उन्हें * निज पर शासन फिर अनुशासन* की तर्ज पर तत्काल हटाना चाहिए। इससे दो फायदे अवश्य होंगे-एक तो राजवाड़े का सौंदर्य लौट आएगा और इस क्षेत्र की पार्किंग की समस्या का हल भी हो जायेगा ।
.............जितेंद्र सिंह राठौर- रहवासी- झाबुआ






दिख रहा हमे,आज हमारा पुराना सुंदर शहर झाबुआ......अति का अंत
दुकानदार बाहर तक दुकानों का सामान रखते हैं। लोगों को निकलने के लिए जगह नहीं मिलती हैं। प्रशासन का हौसला कम न होने देंग। आज इतने वर्षों बाद जनता में हर्ष है। हमे आज हमारा पुराना सुंदर शहर झाबुआ दिख रहा है। अति का अंत तो होना ही था,प्रशासन को ढेरों साधुवाद।
.........जितेंद्र सिंह सिसोदिया रहवासी- झाबुआ












किसी को भी बख्शा नहीं जायेगा............
आज शहर में फैला अतिक्रमण सख्ती से हटाया गया। शहर में अन्य स्थानों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी,मुहिम सतत जारी रहेगी।
किसी को भी बख्शा नहीं जायेगा ।
..............सोमेश मिश्रा-कलेक्टर-झाबुआ






पक्षपात की गुंजाइश है ही नहीं.....
आज से मुहिम शुरू की गयी है। आने वाले दिनों में भी यह मुहीम जारी रहेगी। दोबारा  अतिक्रमण करने पर सख्त कार्रवाई भी की जायगी। किसी भी तरह के पक्षपात की गुंजाइश है  ही नहीं।
..........एलएन गर्ग-अनुविभागीय अधिकारी-झाबुआ






अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद थे.......
आज बुधवार से शहर में फैला अतिक्रमण सख्ती से हटाया गया । शहर का बाजार पूरी तरह अतिक्रमण की चपेट में था। लोगों की आवाजाही के लिए बनाए गए गलियारों पर दुकानदारों ने अतिक्रमण कर लिया था।  सड़कें,गलियारे और सरकारी जमीन पर लोगों का अतिक्रमण बढ़ता ही जा रहा था और कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता ही होती आई थी। जिससे अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद थे। जिसका खामियाजा लोगों को उठाना पड़ता था। बाजार में अतिक्रमण के कारण लोगों का निकलना मुश्किल हो गया था। आए दिन विवाद होते रहते थे।
..........एलएस डोडिया-मुख्य नगरपालिका अधिकारी-झाबुआ




Share To:

Post A Comment: