धार~भक्ति के तीन मार्ग बताए गए नारद भक्ति स्वदरे भक्ति तथा भोजने भक्ति~ पंडित रमाकांत जी व्यास ~~

श्री सांवरिया सेठ श्री सांवरिया सेठ अट्ठारह महापुराण समिति द्वारा आयोजित श्री ब्रह्म पुराण की कथा के तृतीय दिवस प्रसिद्ध भागवताचार्य परम पूज्य पंडित रमाकांत जी व्यास द्वारा श्री ब्रह्म पुराण की कथा के दौरान बताया कि द्वारकापुरी की स्थापना ब्रह्मा जी द्वारा स्वर्ग के चौथाई भाग को काटकर की थी । कथा के दौरान गुरुदेव द्वारा बताया कि यदि सभी मनुष्य परोपकार की भावना से जिए तो हर घर, हर गांव ,हर शहर द्वारका बन सकता है भक्ति के संबंध में गुरुदेव द्वारा बताया गया कि बाल्यावस्था में की गई भक्ति अमृत के समान होती है युवावस्था में की गई भक्ति दूध के समान होती है  बुढ़ापे में की गई भक्ति पानी के समान होती है जिस प्रकार अमृत का फल पूरे जीवन तक रहता है दूध का फल भी कई वर्षों तक रहता है तथा पानी का फल तत्काल समाप्त हो जाता है इसलिए हमेशा भक्ति बालक अवस्था से ही करना चाहिए। सूर्यवंश के महाराज अंबरीष के द्वारा एकादशी व्रत की स्थापना की गई थी तभी से एकादशी का व्रत प्रारंभ हुआ है । भक्ति के तीन मार्ग बताए गए हैं जिसमें नारद भक्ति स्वदरे भक्ति तथा भोजने  भक्ति। गुरुदेव ने कथा के दौरान बताया कि यदि भक्ति में किसी पतित हो जाता है तो वह भोगी बन जाता है यदि योग में पतित होता है तो वह रोगी हो जाता है कई प्रकार के रोग से लग जाते हैं ज्ञान में कोई पतीत हो जाता है तो वह अत्यंत लालची हो जाता है। महापुरुषों के सानिध्य से ही ईश्वर प्राप्ति संभव है इसके बिना दूसरा कोई उपाय नहीं है। महाराज अमरीश की 100 रानियां थी नारी के मुख्य रूप से तीन स्वभाव हैं उत्तम कोटि की नारी जो की पतिव्रता होती है पति के हर कार्य में मंत्री की भांति सलाह देती है पति की सेवा दासी के समान करती है भोजन कराने में माता के समान और शयन कराने में अप्सरा के समान होती है । तथा अपने हर कार्य में पति को ही आगे रखती है गुरुदेव ने कथा में आगे बताया कि अतिथियों को पहले भोजन कराना चाहिए यदि हम अतिथि के पहले भोजन कर लेते हैं तो अतिथि को कराया गया भोजन झूटा हो जाता है इसी प्रकार यदि अतिथि के साथ में भोजन करते हैं तो भी अतिथि के द्वारा भोजन करने के उपरांत ही हमें अपने हाथ धोना चाहिए यदि हम पहले हाथ धो लेते हैं तो अतिथि को कराया गया भोजन झूठा हो जाता है। इसी कड़ी में गुरुदेव द्वारा बताया गया कि ईशवाकू को मध्य  भारत का राजा बनाया गया इसी वंश में  मांधाता उनके पुत्र का नाम था जिनके द्वारा अपनी राजधानी ओकारेश्वर बनाई गई थी उनके द्वारा ही मणियों से ओंकार पर्वत का निर्माण किया गया था आज भी ओकारेश्वर ने ओंकार पर्वत ओम के आकार में विद्यमान है 18 पुराणों की रचना 4718 वर्ष पूर्व ब्रह्मा जी द्वारा की गई थी जिसमें धर्म की रक्षा के बारे में राजा हरिश्चंद्र एवं उनकी पत्नी तारा का वृतांत धर्म की रक्षा हेतु करना बताया गया है उक्त जानकारी 18 महापुराण समिति के श्री वरिष्ठ सदस्य  पंडित अशोक मनोहर जोशी द्वारा देते हुए बताया कि आज के महापुराण कथा में नगर के  संभ्रांत नागरिक तथा जिले के आसपास के कई नगर तथा गांव के नागरिक उपस्थित हुए भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष श्री जगदीश जी जाट मनासा, बिरला ग्रासिम के असिस्टेंट मैनेजर श्री पीयूष जी जोशी विशेष रूप से कथा का श्रवण करने हेतु पधारे ।आज की कथा में उपस्थित होने वालों में श्री महेंद्र दुबे, श्री कमलेश दुबे ,श्री जगदीश जी जोशी,  हिंदू नेता श्री अशोक जी जैन, श्री दशरथ सिगा श्री नितेश शर्मा श्री महेश शर्मा श्री अश्विन चौहान श्री अश्विन जोशी श्री गोपाल दास गुप्ता श्री राजीव भारद्वाज ब्राह्मण एकता मंच की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती मीना दुबे श्रीमती सरोज सोनी श्रीमती चंद्रकला शर्मा श्री विठ्ठल गर्ग महापुराण कथा के मुख्य सूत्रधार श्रीमती सोनिया अशोक जोशी  अधिवक्ता श्री सतीश चंद्र सोनी अधिवक्ता श्री आनंदी लाल व्यास जिला न्यायालय धार के स्टेनो जगदीश जी पोरवाल श्रीमती नीलोफर सुभाष जी जोशी श्री संतोष जी पांडे प्रदीप जी बाफना मदन जी मालवीय तथा मीडिया की ओर से श्री संजय जी शर्मा अशोक जी शास्त्री तथा अन्य पत्रकार बंधु भी विशेष रूप से उपस्थित रहे उक्त जानकारी सांवरिया सेठ महापुराण समिति के अध्यक्ष श्री स्वयं प्रकाश सोनी जी द्वारा दी गई।


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