*मुंबई~देश के विकास के लिए एक बेहद सराहनीय संकल्पना है बार्टर बाजार या विनिमय बाज़ार: शशि दीप*~~

मुंबई।/बाकानेर सैयद अखलाक अली~~

विगत 17 अप्रैल, 2022, रविवार को मुंबई के स्ट्रीट कनेक्ट कम्युनिटी ग्रुप की ओर से एक अभिनव   बाजार का आयोजन किया गया जिसका नाम था - बार्टर बाजार या विनिमय बाजार। पुराने जमाने जब रुपए पैसे का चलन नहीं था तो लोग एक चीज देकर दूसरी चीज लेते थे और अपनी जरूरतें पूरी करते थे। आज हमारे पास न पैसों की कमी है न बाजार में चीजों की कमी है। इसके परिणामस्वरूप घर में नित नए सामान और विश्व में फेंके गए सामान भरते जा रहे हैं। इसी उपभोक्तावाद में अल्प विराम लगाने के लिए "बार्टर बाजार" आयोजित किया गया जो "स्ट्रीट कनेक्ट उत्सव" में होने वाले स्वेप काऊंटर का ही विस्तृत रूप है। इस समारोह में पुस्तकें, खिलौने, गृहसज्जा की वस्तुएं, खेल से संबंधित चीजें, जंक ज्वेलरिस और पौधों  के  काउंटर तो थे ही, साथ ही टैलेंट बार नामक एक नया और अनूठा आयोजन था जिसमें आप टैलेंट एक्सचेंज करके एक दूसरे के गुणों से लाभान्वित हो सकते हैं। दर्शकों की सेवा के लिए दो होममेड  फूड स्टॉल भी थे । एक मंच था जहां अनुष्ठान के संचालक श्री सूरज बड़ी मुस्तैदी से संचालन कर रहे थे। उन्होंने एक के बाद एक अनेक लोकप्रिय गीत गाकर लोगों का मनोरंजन किया और माहौल की रौनक बढ़ा दी। समारोह की शुरुआत हुई  नृत्य गुरू रीतू मानेक की सुदक्ष शिष्याओं द्वारा प्रस्तुत की गई  अनुपम गणेश वंदना नृत्य से,  जिससे वातावरण में एक पवित्र अनुभूति छा गई। मशहूर लेखिका शशि दीप ने अपनी उत्साहवर्धक उपस्थिति से आयोजकों को गौरवान्वित किया। बार्टेर बाज़ार की प्रशंसा में उन्होंने अपनी भावनाओं को सशक्त शब्दों में अभिव्यक्त किया,  सुमधुर स्वर में  सरस्वती वंदना गायीं, प्रेरणामूलक कविता पढ़ी।इस समारोह में सबसे ज्यादा दिल को छू लिया घरकुल विद्यालय के विशेष रूप से योग्य विद्यार्थियों ने, जिन्होंने बड़ी सहजता से  खिलौने वाले काउंटर को संभाला और इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर आयोजकों को व उपस्थित लोगों को गर्वित किया। सबसे आनंद की बात यह है कि लोग आते गए और सामान का विनिमय करते रहे , एक समय ऐसा आया कि लगभग सभी सामानों का विनिमय हो चुका था। पौधे सारे चले गए थे, बड़ी संख्या में आज के बच्चों ने पुस्तक विनिमय किया यह आशाव्यंजक है। समारोह के संतोषपूर्ण ढंग से खत्म होने पर आयोजकों की खुशी देखते ही बन रही थी।इस समारोह की सफलता का सारा श्रेय उन सबकी इस मानसिकता को जाता है कि सामानों की कद्र करें और उन्हें नष्ट न होने दें। इससे पृथ्वी बेहतर बनेगी।


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