झाबुआ~दो सत्र इंतजार में बीते -175 निजी स्कूलों को अब तक नहीं मिली आरटीई-करीब 1 करोड़ रुपया जिला शिक्षा केंद्र पर फंस गया -छोटे स्कूल बंद होने की कगार पर~~

गरीब वर्ग के बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने वाले निजी स्कूल को फीस प्रतिपूर्ति राशि सत्र खत्म होते ही देने का नियम~~


झाबुआसंजय जैन~~

कोरोना के दौरान स्कूल भले ही नहीं खुले,लेकिन आरटीई के तहत बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाया गया। दो सत्र पूरे हो गए पर अब तक आरटीई की फीस प्रतिपूर्ति की राशि निजी स्कूलों को नहीं मिल पाई है । शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत शुरू की गई सरकारी योजना में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को पढ़ा रहे जिले के175 से ज्यादा मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों का करीब 1 करोड़ रुपया जिला शिक्षा केंद्र पर फंस गया है। यह उन बच्चों की फीस है जिनका प्रवेश सरकार ने निजी स्कूलों में कराया था और फीस सरकार द्वारा स्कूलों को दी जाना थी। जबकि 2022-23 के लिए नया शैक्षणिक सत्र फिर शुरू हो गया है । मगर निजी स्कूल संचालकों को अब भी राशि का इंतजार है ।





 
स्कूल संचालक बोले-हम बहुत परेशान हैं,नया सत्र शुरू होने वाला है,ऐसे में हम बच्चों को कैसे शिक्षा दे पाएंगे....?
 जिले के करीब 175 निजी स्कूल है,जिन्हें सत्र 2020-2021 और 2021-2022 का भुगतान नहीं हुआ है,कुछ ऐसे भी स्कूल है जिनका इससे पहले का भी भुगतान बकाया है। इनका कहना है कि नया सत्र शुरू होने वाला है और भुगतान को सरकार ने नहीं किया है। ऐसे में हम बच्चों को कैसे शिक्षा दे पाएंगे। छोटे स्कूल तो बंद होने की स्थिति में आ गए है। राज्य सरकार की योजना है कि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाया जाए। ताकि वे भी निजी स्कूलों पढ़ने वाले बच्चों की तरह शिक्षा हासिल कर सकें और अपने सपने पूर कर सकें। इस योजना के तहत फीस की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार द्वारा जिला और राज्य शिक्षा केंद्र के जरिए की जाती है।




फीस प्रतिपूर्ति की राशि नहीं दी गई....





 जिले करीब 175 निजी स्कूलों का संचालन होता है,जहां प्रतिवर्ष 1 से 1 द़ेढ़  हजार बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। प्रावि-मावि के लिए फीस प्रतिपूर्ति का अलग-अलग मापदंड है। इन स्कूलों को लंबे समय से फीस प्रतिपूर्ति की राशि नहीं दी गई थी। सरकार ने 2019-2020 तक का तो अधिकांश बकाया भुगतान कर दिया है। किन्तु सत्र 2020-2021 और 2021-2022 भुगतान नहीं हो पाया है।






सरकार केवल उलझाए रखना चाहती है....
 इसके लिए अधिकारियों का कहना है कि फीस प्रतिपूर्ति के लिए पोर्टल चालू है,कई स्कूलों ने जानकारी अपलोड नहीं की है। दूसरी तरफ  स्कूल संचालकों का कहना है कि सरकार ने प्रक्रिया इतनी जटिल कर रखी है कि उसे पूरा करने में समय लग रहा है। कोरोना काल के दौर में पढ़े बच्चों की जानकारी के साथ प्रत्येक के बायोमेट्रिक अंगूठे निशान सहित तमाम जानकारी भरना है। आरोप है कि सरकार केवल उलझाए रखना चाहती है। हालात यह है कि 10-20 स्कूल को बंद होने की स्थिति में है। पहले ही कोरोना काल के दौरान स्कूल को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, उस पर यदि सरकार भी समय पर फीस प्रतिपूर्ति की राशि नहीं देगी तो क्या होगा.....?






प्रक्रिया चल रही है.......
दो सत्र का बकाया है,भुगतान के लिए पोर्टल खुला हुआ है। जानकारी भरने के लिए सभी को प्रशिक्षण भी दिया गया था। यदि कोई दिक्कत है तो पूछ सकता है। स्कूल संचालक जैसे ही जानकारी अपलोड कर देंगे,आगे की प्रक्रिया राज्य स्तर शुरू हो जाएगी।
................................रालु सिंह सिंगार ,डीपीसी-झाबुआ।




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