झाबुआ~दो सत्र इंतजार में बीते -175 निजी स्कूलों को अब तक नहीं मिली आरटीई राशि,केंद्र ने 60 फीसदी  राशि भेजी.....पर नहीं दे रही राज्य सरकार~~


गरीब वर्ग के बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने वाले निजी स्कूल को फीस प्रतिपूर्ति राशि सत्र खत्म होते ही देने का नियम~~



झाबुआसंजय जैन~~

कोरोना के दौरान स्कूल भले ही नहीं खुले,लेकिन आरटीई के तहत बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाया गया। दो सत्र पूरे हो गए पर अब तक आरटीई की फीस प्रतिपूर्ति की राशि निजी स्कूलों को नहीं मिल पाई है। जबकि 2022-23 के लिए नया शैक्षणिक सत्र फिर शुरू हो गया है । मगर निजी स्कूल संचालकों को अब भी राशि का इंतजार है ।




  नहीं दे रही राशि राज्य सरकार......





स्कूल संचालकों ने 2020-21 में आरटीई के तहत बच्चों को नि:शुल्क ऑनलाइन पढ़ाया। इसके बाद 2021-22 में पहले तो ऑनलाइन पढ़ाया। इसके बाद सितंबर में 50 फीसदी क्षमता के साथ स्कूल खुले। स्कूलों में ऑफलाइन पढ़ाया। जनवरी में फिर ऑनलाइन पढ़ाया गया। इसके बाद स्कूलों को आरटीई के तहत राशि मिलना थी,लेकिन दो सत्र 2021-22 एवं 2022-23 गुजर गए,अब तक राशि नहीं मिल पाई है। जिले के175 से ज्यादा मान्यता प्राप्त निजी स्कूल संचालित हैं। खास बात यह है कि केंद्र सरकार ने स्कूलों की 60 फीसदी फीस प्रतिपूर्ति राशि दे दी है,लेकिन राज्य सरकार की ओर से यह राशि जारी नहीं हुई है।






आंदोलन करने के लिए होना पड़ेगा मजबूर ........
आरटीई राशि के भुगतान में विलंब से निजी स्कूल संचालकों का सब्र अब टूटने लगा है। प्राइवेट स्कूल के संचालकों के अनुसार पिछले दो सत्र की आरटीई की राशि अब तक हमको नहीं मिल पाई है। जबकि गरीब वर्ग के बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने वाली निजी स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति राशि सत्र खत्म होते ही देने का नियम है। हम सभी ने आरटीई के तहत ऑनलाइन बच्चों को पढ़ाया है। केंद्र सरकार से राज्य सरकार को आरटीई की 60 फीसदी राशि मिल भी गई है। राज्य सरकार को 40 फीसदी राशि मिलाकर स्कूलों को फीस की प्रतिपूर्ति राशि जारी करना है,लेकिन राज्य सरकार भुगतान हीं नहीं कर रही है। जल्द ही स्कूलों को राशि का भुगतान नहीं हुआ तो हम स्कूल संचालकों को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा ।






इसलिए स्कूल संचालक मांग रहे राशि.....
-कोरोना संक्रमण के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई कराई। इसमें नेट के साथ ही स्टाफ  के वेतन भत्ते पर पैसा खर्च हुआ है ।
-ऑनलाइन पढ़ाई के चलते स्कूलों की बस,मैजिक भले ही बंद रही लेकिन कई स्कूलों ने लोन पर ये ले रखी है। जबकि बैंकों को समय पर किस्त अदा की गई। पूरे दो सत्र तक बसें करीब करीब बंद रही।
-स्कूलों में जो कर्मचारी और स्टाफ  कार्यरत है,उन्हें वेतन भी स्कूलों ने बांटा। जो स्कूल किराये के भवन में चल रहे हैं , उन स्कूल संचालकों ने किराया भी चुकाया। वहीं बिजली का बिल भी चुकाया।






जल्द ही राशि जारी कर दी जाएगी........
अभी तीन दिन पहले स्कूलों को फीस की प्रतिपूर्ति राशि को लेकर ट्रेनिंग हुई है। प्रपोजल तैयार कर ऑनलाइन चढ़ा भी दिया जायेगा। बहुत जल्द ही स्कूल संचालको को उनकी राशि जारी कर दी जाएगी।
................................रालुसिंह सिंगार ,डीपीसी-झाबुआ।




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