*चुनावी चुलबुल भाग 2* (व्यंगात्मक लेख)

चुनावी मेंढक और विलक्षण प्रजातियां~~

अनुराग डोडिया रिंगनोद~~

हा तो साहब जी नामांकन शुरु हो चुके है कुछ शुभ मुहुर्त कुछ सर्वार्थ सिद्धि योग कुछ राजयोग तो कुछ अपने आकाओ के आदेश के लिए रुके होंगे कि कब नामांकन जमा करे खैर वो तो कर ही देंगे चुनाव आते ही बिन बारीश कुछ विलुप्त होती विलक्षण और बहुमुखी प्रतिभा की धनी प्रजातिया देखने को मिलती है कुछ छोटी सी लालच मै आकर अपना अमूल्य मत खो देते है फिर 5 साल रोते है क्योकीं साफ आदेशात्मक निर्देश होते है की चुप रह तेरा काम कर दिया था एक बार का सुख और 5 साल का संताप मरता क्या ना करता ईन्ही प्रजातियो मै शुमार होते है रायचंद साहब चुनावी मैंढक जो या तो चने के झाड पर चढा कर थोडा सा फायनेंस करके भोले भालो को  जबरन ये बोलकर कि अपन ही जित रहै है सब सम्भाल लेंगे चुनाव लडवाकर बेहतरीन तरीके से हरवाने के बाद गधा मजदुरी करवाते है और जितना लगाया उससे ज्यादा का काम निकलावाते है और कुछ रायचंद जी ये कह कर के सब देख लेंगे तुम तो बस व्यवस्था फुल रखना सुर्खी लेने का ठिया हो या चाय नाश्ते की होटल अपना कोई पट्ठा या कार्यकर्ता हो व्यवस्था टाईट होना चाहिए बोलकर बेचारो का पैसा पानी की तरह बहवा देते है कुछ महाशय अलग ही तरह के जन्तु होते है ये विशेषकर किंग मैकर होते है ईनका ध्यैय वाक्य होता है "अपन किंग मैकर है राजा बनाते है बनते नही सुनाते है सुनते नही" चाहे फिर राजा खुद राजा बने या नही या तुक्का लग भी जाए तो अक्सर एसे राजा फिर खुद किंग मैकर साहब को प्रजा तक मै नही गिनता फिर एसे साहब बस हर जगह यही कहते है अपनो ने ही बनवाया है पुछ लेना अपना ही आदमी है खेर अभी तो चुनावी मैंढको की बारीश के छींटे ही है टर्राना बाकी है और चुनावी चुलबुल के मजेदार व्यंगात्मक लेख आपके साथ है ही कई प्रकार की और प्रजातियो का जिक्र होगा लैकिन अपने अमूल्य मत का उपयोग सही किजिए लालच मै मत फसीए अपना अच्छा बुरा देखकर ही बिना लालच वोट किजिए ताकी बाद मै पछताना ना पढे ललैकिन अपने बहुमुल्य मत का ऊपयोग अवश्य करे ईसे व्यर्थ ना गवाएं अपना भविष्य अपने साथ हमारी और से यही निवेदन तब तक चुनाव से सम्बन्धित खबरो और लेख के लिए बने रहै विचार न्युज की श्रंखला चुनावी चुल बुल के साथ तब तक के लिए जय राम जी की


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