झाबुआ~ऑक्सीजन में अब हम आत्मनिर्भर- फिर भी जिला अस्पताल में लगे ऑक्सीजन प्लांट से क्या नहीं हो पा रही पूर्ति..~~

पहले हर महीने 350 से 400 सिलेंडर खरीदना पड़ते थे,अब भी खरीदने पड़ते हैं इतने ही सिलेंडर- हर माह डेढ़ लाख रु.की चपत~~

सिर्फ  बच्चों को ज्यादा प्रेशर से ऑक्सीजन देने के लिए पड़ रही सिलेंडर की जरूरत~~


 झाबुआसंजय जैन~~

कोरोना काल में सामने आई ऑक्सीजन की कमी के बाद अब हम खुद आत्मनिर्भर बन गए। गंभीर मरीजों को सांसें देने के लिए अब ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदने की जरूरत नहीं है। सिर्फ  बच्चों को प्रेशर से ऑक्सीजन देने के लिए ही सिलेंडर की खरीदना पड़ रहे हैं। ऑक्सीजन में अब जिला आत्मनिर्भर फि र भी अस्पताल को हर माह डेढ़ लाख रुपए की चपत लग ही रही हैं। 




ऑक्सीजन में हम आत्मनिर्भर,लेकिन अब भी डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा खर्च हो रहे......
कोरोना काल के अलावा जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर की खरीदी पर ही हर माह डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा खर्च होते थे और अब भी ेडेढ़ लाख रुपए से ज्यादा खर्च हो रहे हैं। औसतन हर माह 350 से 400 सिलेंडर खरीदने पड़ते थे। बाकायदा इसके लिए प्रति सिलेंडर 374 रुपए चुका रहे थे। बीमारियों के सीजन के समय तो सिलेंडर खपत का आंकड़ा 500 से 700 तक पहुंच जाता था। पूरे साल औसतन हर महीने 1.50 लाख रुपए से ज्यादा की राशि सिर्फ  ऑक्सीजन खरीदी के चुकाना पड़ते थे। ऑक्सीजन में हम आत्मनिर्भर, बावजूद इसके अब भी डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा खर्च हो रहे हैं। यानी पिछली खपत के मुताबिक 350 से 400 सिलेंडर अब भी बाहर से खरीदने पड़ रहे हैं। 374 रुपए के हिसाब से हर महीने 1.50 लाख रुपए से ज्यादा की राशि सिर्फ  ऑक्सीजन खरीदी के लिए चुकाना पड़ते हैं।





 
भविष्य के लिए भी तैयार.....
कोरोना से ली गई सीख के बाद ऑक्सीजन आपूर्ति में जिले में कमी नहीं है। रुटीन में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए तो प्लांट सेे ही पूर्ति होने लगी है। भविष्य में यदि ऑक्सीजन खपत बढ़ती हैं तो भी ऑक्सीजन की कमी अब नहीं आएगी। 




ऑक्सीजन प्लांट से कर रहे पूर्ति .....





 जिला अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट चालू होने के बाद अब आईसीयू के मरीजों के लिए  सिलेंडर खरीदी की बिलकुल जरूरत नहीं पड़ती। प्लांट से बनने वाली ऑक्सीजन से ही पूर्ति हो जाती है।👌






प्लांट पूरे समय चालू.....
सीधे वार्ड में सप्लाई 1 हजार एलपीएम क्षमता का एक प्लांट पूरे समय चालू रहता हैं। इससे बनने वाली ऑक्सीजन सीधे लाइन के जरिये आईसीयू वार्ड में पहुंचा दी गई। जो वार्ड में भर्ती मरीजों तक सीधे नली के जरिये पहुंच जाती है। प्लांट से बनने वाली ऑक्सीजन से ही पूर्ति हो जाती है।





 
नवजात बच्चों के लिए ही सिलेंडर की जरूरत.......
जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत अब सिर्फ  एसएनसीयू वार्ड में भर्ती होने वाले नवजात बच्चों के लिए ही पड़ रही है। क्योंकि प्लांट से बनकर आ रही ऑक्सीजन का प्रेशर कम है। जबकि बच्चों को ज्यादा प्रेशर से ऑक्सीजन देना पड़ती है। इस कारण सिर्फ  इसी वार्ड में ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। खरीदी के वास्तविक आंकड़े अभी मेरे पास नहीं है। मै इसे दिखवाता हु,ऐसा तो होना नहीं चाहिए। 





  ............................जीएस बघेल-सिविल सर्जन -झाबुआ




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