धार~अटल सरकार का जवाब हाईकोर्ट में एडमिट है कि यह कमाल मौलाना मस्जिद है-शहरकाजी ~~

भोजशाला व कमाल मौलाना मस्जिद विवादित परिसर को लेकर दायर याचिका पर शहरकाजी ने कहा- पहले भी 9 बार केस लगे सभी हुए अमान्य ~~

धार ( डाँ.अशोक शास्त्री )।

केन्द्रीय पुरातत्व विभाग अधीन विवादित परिसर कमाल मौलाना मस्जिद व भोजशाला को लेकर हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा याचिका दायर होने के बाद भोजशाला मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। पिछले 6 साल से बसंत उत्सव पर शुक्रवार ना होने के कारण मंगलवार को हिन्दुओं का पूजन सत्याग्रह व शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय की नमाज शांति से अदा हो रही थी। याचिका दायर होने के बाद शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के बाद मीडिया ने शहरकाजी वकार सादिक से याचिका को लेकर सवाल किए। इस मुद्दे पर शहरकाजी ने पुरानी घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि इसको लेकर पहले भी कुछ लोग कोर्ट गए है। वहा पर मुस्लिम समुदाय को पार्टी नहीं बनाया गया था। उस दौरान केन्द्र में अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार थी।  केन्द्र ने हाईकोर्ट में जवाब एडमिट किया था जिसमें लिखा था कि यह कमाल मौलाना मस्जिद है। भोजशाला कहां है यह स्थापित तथ्य नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी तक हमें कोई नोटिस नहीं मिला है। यदि समुदाय में किसी को भी मिलेगा तो हम लोग जवाब प्रस्तुत करेंगे। शहरकाजी ने कहा कि उपासना स्थल विशेष उपबंध अधिनियम 1991 लागू है। इसमें 1947 के पूर्व के इस तरह के स्थलों को यथावत रखने का प्रावधान है। यह संसद में पास हुआ है। केन्द्र सरकार को इसे संज्ञान लेना चाहिए और अधिनियम का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई करना चाहिए। इसमें 3 साल की सजा का प्रावधान भी है।
पहले हुआ था एग्रिमेंट
पहले एग्रिमेंट हुआ था हिन्दू संगठन के लोगों और हमारे मध्य उस दौरान के लोगों ने स्वीकार किया था यह मस्जिद है।  हम यहां पर जाएंगे लेकिन नारे लगाना और पूजा नहीं करेंगे। इसके बाद नियम का उल्लंघन होने लगा। तत्कालीन कलेक्टर ने स्वयं संज्ञान लेते हुए प्रतिबंध लगा दिया। जिसके बाद यह लोग कोर्ट गए थे। जहां पर केन्द्र ने जवाब के तौर पर इसे मस्जिद बताया है। इसके बाद भी 9 लोग कोर्ट जा चुके है। सभी की याचिका अमान्य हुई है।
शहर में सद्भावना, हम कभी आमने-सामने नहीं हुए
शहरकाजी श्री सादिक ने मीडिया से यह कहा कि आप लोगों की जवाबदेही बढ़ गई है। आप खबरें भेज देते है। चैनल वाले उसे कैसे दिखाते है यह आपके हाथ में नहीं है। मेरा निवेदन है कि इसे डिबेट का विषय ना बनाए।  शहर के हालात कैसे भी हो यहां अमन-चैन बना रहे। यहां पर 50 हजार हिन्दू भी इकट्ठा हुए है। कभी आपस में विवाद नहीं हुआ। मस्जिद के नाम पर भी कभी हिन्दू-मुस्लिम सीधे आमने-सामने नहीं टकराए है।


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