झाबुआ~कई वर्षों बाद जिले को मिला गम्भीर आईएएस कलेक्टर सोमेश मिश्रा,जमीनी स्तर से बहादुर सागर तालाब को व्यवस्थित करने हेतु-~~

रच दिया इतिहास कलेक्टर ने-खोला बहादुर सागर तालाब का ऐतिहासिक गेट-असंभव कार्य संभव हो पाया-.................झाबुआ की जनता में हर्ष ही हर्ष ~~


झाबुआसंजय जैन~~

कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने बहादुर सागर तालाब के लिए जमीनी  स्तर की रणनीति बनाकर इसके गहरीकरण, शुद्धिकरण और सौन्दर्यीकरण हेतु बड़ी ही गंभीरता से कदम उठाया है। यह कार्य उनके द्वारा 30 अप्रैल 22 से प्रारंभ किया गया जो आज पूर्णता की ओर सतत अग्रसर है। सिर्फ 22 दिनों में ही तालाब को लगभग खाली कर दिया गया है। अब मिट्टी निकालने का कार्य सतत जारी है। संभवत: ऐसा करने वाले झाबुआ के यह पहले कलेक्टर होंगे,जिसे झाबुआ की जनता कभी भुला नहीं पाएगी। उनके इस कार्य से पूरे नगर में हर्ष व्याप्त है।






जितेंद्र सिंह राठौर के सतत प्रयास से हुआ यह प्रयास चरम पर  पहुँचा .......
प्राप्त जानकारी अनुसार जितेंद्र सिंह राठौर द्वारा अधिकतर  झाबुआ कलेक्टरो को इस तालाब की हो रही दयनीय स्थिति के बारे में मय दस्तावेजो सहित पिछले कई वर्षों से आगाह भी किया जा रहा था। परिणाम स्वरूप कभी जलकुम्भी  हटाने या श्रमदान करके इस मोहंती योजना की इतिश्री हो जाती थी। अंतत: कलेक्टर ने इसे संज्ञान में लेकर जमीनी स्तर पर उतरकर,एक सफल रणनीति तैयार की। जिसकी वजह से श्री राठौर का इतने वर्षों से चल रह यह प्रयास अब चरम पर  पहुँच चुका है।






बहादुर सिंह तालाब का इतिहास......
वर्ष 1766 में  इस तालाब का निर्माण महाराजा बहादुर सिंह जी द्वारा किया गया था जिसका कुल रकबा 68 बीघा था। जो आज की तारीख में अतिक्रमण के चलते कुछ कम हो चुका है,जिस और प्रशासन को ध्यान देना होगा। 1766 में  झाबुआ की जनसँख्या 1300 से 2000 के करीब ही थी। उस वक्त बिना तकनीक के भी महाराजा का विज़न कितना सही था कि आज झाबुआ की जनसंख्या 50 हजार के पार हो जाने के बाद भी यह तालाब झाबुआ को जल प्रदाय करने में सक्षम है,बशर्ते उसमें हुए अतिक्रमण,नियमित सफाई और एक सुनियोजित सीवेज सिस्टम की ओर ईमानदारी और जिम्मेदारी से ध्यान दे दिया जाय।






32 साल बाद,सही निर्णय के चलते असंभव् कार्य संभव हो पाया-खोला बहादुर सागर तालाब का ऐतिहासिक गेट
बहादुर सागर तालाब के दो ऐतिहासिक गेट में से गेट को रविवार को खोल दिया गया। रविवार को बड़वानी से आई टीम ने 2 घंटे के बाद इसे खोल दिया। इसमें जल संसाधन विभाग के कर्मचारी और उनकी टीम शामिल रही। टीम ने भारी गेट में नीचे की ओर जैक लगाया और ऊपर चेन पुली से खींच कर गेट खोल दिया। जल संसाधन विभाग की एसडीओ नीलम मेडा,मोहन सिंह गहलोत ज्ञान सिंह रावत ,कैलाश मंडलोई,राजू टैगोर भाव सिंह और विकास मंडलोई की इच्छाशक्ति और उनके सही निर्णय के चलते यह असंभव कार्य संभव हो पाया है। एसडीओ नीलम मेडा ने बताया अभी एक गेट खुल गया है। 4-5 दिन बाद दूसरा गेट खोलेंगे। इसके लिए फुटपाथ की जगह एक छेद करेंगे, ताकि ऊपर से ही गेट खोले या बंद किए जा सके।





 
सभी घाटों को खोलने और बीच के टीले को हटाने को देनी होगी पहली प्राथमिकता....
इस तालाब से सटे हुए छोटे-बड़े 13 घाट हुआ करते थे जिसमें से आज अब 7 से 8 ही नजर आ रहे है। यदि सारे घाट खोल दिये जाएँ और बीच का टीला हटा दिया जाय तो यह तालाब अपने पहले के सौंदर्य को अवश्य प्राप्त कर सकता है। जिसमे कोई संदेह है,ही नही।
.....................................केके त्रिवेदी-इतिहासकार






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 हाथ पैर धोने लायक भी नही है पानी.....
तालाब का पानी पीने के लायक तो क्या हाथ पैर धोने के लायक भी नही है। इस तालाब में कई घरों का मल मूत्र सीधे पहुच रहा है। तालाब खाली होते से ही मिट्टी जैसे-जैसे हटेगी सारा अतिक्रमण और गंदगी कहा से आ रही यह साफ  हो जाएगा। शासन को सीवरेज की सही प्लानिंग कर इसका व्यवस्थित निकास करना होगा। सभी धर्म के लोग अपनी पवित्र चीजो को इस ख़राब अपवित्र पानी में प्रवाहित करते है। इसके लिए पुलिया के दूसरी ओर दोनों तरफ  से बाउंड्री बनाकर स्थायी पोखर बनाकर दोनों तरफ  से गेट लगा देना चाहिए। इससे हर साल अनास पर पोखर के लिए हो रहे लाखो के खर्च बच जाएंगे,जो हर वर्ष काम भी आएगा। मैंने तालाब के सीमांकन का भी आवेदन काफी समय से दे रखा था,जो अब बड़ी आसानी से हो भी जाएगा। जिससे सारी स्थिति और अधिक साफ  हो जाएगी। विशेषकर मैं कलेक्टर महोदय और दैनिक दोपहर के पत्रकार जिला प्रमुख संजय जैन का बेहद आभारी हू,जिनके सहयोग और मार्गदर्शन  के बिना इतना बड़ा एतिहासिक जनहित का कार्य अपने चरम पर नही पहुँचा पाता।
.........................जितेंद्र सिंह राठौर-आरटीआय-कार्यकर्ता
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 पहले कलेक्टर को जाते हुए देखा,जनहित के लिए  बाइक से ....
मैंने झाबुआ के पहले कलेक्टर को  जनहित के लिए  कटीली झाड़ियों से होते हुए बाइक से जाते हुए देखा है। इससे साफ  जाहिर होता है कि कलेक्टर महोदय जमीन पर उतरकर कार्य सम्पन्न करवा रहे है। यह जनहित का कार्य झाबुआ के लिए अवश्य एक वरदान साबित होगा। झाबुआ की जनता  कलेक्टर महोदय को कभी भी भुला नहीं पाएगी।
.............................जितेंद्र सिंह सिसोदिया-निवासी-झाबुआ




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