झाबुआ~डॉ रामशंकर चंचल की लघु कथाओं पर लघु फिल्मों का निर्माण ~~





झाबुआ। प्रख्यात साहित्यकार डॉ रामशंकर चंचल की लघु कथाओं पर आधारित बेहद खूबसूरत सुखद अहसास कराती ,लघु फिल्मों का निर्माण किया जा रहा है। इसके पूर्व भी डॉ चंचल की लघु फिल्म 'काली' का निर्माण इशरो द्वारा किया गया था जिसे नेशनल अवार्ड ही मिला था। हाल में ही उनकी लघु कथा 'रहस्य' पर  बेगुसराय के बेहद  प्रख्यात लघु फ़िल्म निर्माता निर्देशक डॉ अनिल पतंग द्वारा एक सार्थक सृजन पर प्रेरक फिल्म 'रहस्य' नाम से ही बनाई गई है,जो नारी विवशता और खामोशी की विचारणीय प्रश्न खड़ा करती और सभी को सोचने को विवश कर देती है। फिल्म लघु है पर विषय और चिंतन गहरा और विचारणीय है।





बेहद गर्व महसूस होता है आदिवासी अंचल में साहित्य सेवा में वर्षो से समर्पित डॉ रामशंकर चंचल की फिल्मों का निर्माण होना और उसके प्रभावशाली लेखन से देश और समाज को सही दिशा निर्देश देना अद्भुत है। आदिवासी अंचल की डॉ रामशंकर चंचल वो हस्ती है, जिसने कई इतिहास अपने लेखनी के माध्यम से इस जिले को दिए है। डॉ चंचल आदिवासी अंचल में रहते साहित्य की अद्भुत कथाओं के माध्यम से देश को अमूल्य योगदान अपनी फिल्मों के माध्यम से भी देकर सम्मानित किया है। इस जिले को प्रदेश को इस सार्थक प्रेरक फिल्म 'रहस्य' पर डॉ चंचल को देश विदेश से बधाई दी जा रही है। वही जिले से उनके साहित्य मित्रो , गणमान्य नागरिक और परिचितों द्वारा भी लगातार उन्हे बधाई और शुभकामनाएं दीं जा रही है।




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