झाबुआ~महिलाओं को पीरियड फ्रेंडली वातवारण देगा ***महिमा***~~

प्रदेश में पहला पायलट प्रोजेक्ट आदिवासी बाहुल्य जिले में नवाचार के माध्यम से जिला प्रशासन द्वारा महिलाओं को पीरियड फ्रेंडली वातावरण प्रदान करने हेतु मिशन महिमा का शुभारंभ~~

महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकें.........जिला कलेक्टर सोमेश मिश्रा~~


झाबुआ। संजय जैन~~

विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर झाबुआ में विभिन्न ग्रामो से आयी स्वयं सहायता समूह की सदस्यों,किशोरी बालिकाओं और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में मिशन महिमा का शुभारम्भ किया गया। यह कार्यक्रम जिला कलेक्टर सोमेश मिश्रा और मुख्य कार्यपालन अधिकारी की अध्यक्षता में यूनिसेफ  और अन्य सहयोगी संस्थाओ इन्हेबिटेड,ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन, एलआईसी के अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। मिशन महिमा आदिवासी बहुल जिले में मासिक स्वास्थ्य स्वच्छता प्रबंधन की सुविधा के लिए एक विशिष्ट पहल है। अभियान सफल हुआ तो रतलाम सहित पूरे प्रदेश में लागू हो सकता है। मेरे रतलाम के पत्रकार साथी मुकेश पूरी गोस्वामी और अदिति मिश्रा का इस खबर को बनाने में मुझे भरपूर सहयोग मिला है,जिसका परिणाम आप इस खबर को पढ़ रहे है।





 
इनकी रही उपस्थिति .....
नागेश पाटीदार-वॉश ऑफिसर,यूनिसेफ  मध्य प्रदेश,जितेन्द्र सीनियर मैनेजर टीआरआईएफ ,सुश्री स्वाति इन्हेबिटेड सुश्री पूनम मराठा एलआईसी एवं जेपीएस ठाकुर सीएमएचओ झाबुआ द्वारा माहवारी प्रबंधन और स्वच्छता के विभिन्न विषयों पर उद्बोधन दिया गया। उद्बोधन में यह कहा गया की मिशन के तहत लिए गए राजनीतिक हस्तक्षेप को जन जन तक पहुचाने हेतु जमीनी कार्यकर्ताओ को गहन रूप से प्रशिक्षित करना होगा जो समुदायों में माहवारी प्रबंधन से संबंधित मुख्य बातों को जन जन तक पहुंचाएंगे और सुविधा प्रदान करेंगे।






दी जाएगी विशेषज्ञों द्वारा समझाइश ......
यूनिसेफ  की पहल पर कलेक्टर सोमेश मिश्रा द्वारा पायलट प्रोजेक्ट में थांदला और पेटलावद ब्लॉक से शुरुआत होगी,जिसे आगे पूरे जिले में लागू किया जाएगा। जिला प्रशासन,यूनिसेफ  और एलआईसी के मदद से प्रारंभ में 50 हजार सेनेटरी पेड निशुल्क बांटे जाएंगे। समारोह में स्कूली बच्चियों और एनएसएस,एनसीसी की वॉलेंटियर की मौजूदगी में विशेषज्ञों द्वारा समझाइश भी दी जाएगी। अभियान का उद्देश्य पीरियड के दौरान स्वस्थ,स्वस्च्छ माहौल हर एक महिला को देना है। इसे रोजगार से भी जोड़ा जा रहा है। थांदला में सेनेटरी पेड बनाने के लिए आजीविका मिशन के तहत महिला समूह का प्लांट भी शुरु किया गया है। पेटलावद में भी दूसरा प्लांट जल्द शुरु होगा।






बहुत बुरी है मप्र में मेंस्ट्रुएशन हाइजीन की स्थिति......
मध्यप्रदेश देश में तीसरा सबसे पिछड़ा राज्य है,सिर्फ 60 प्रतिशत महिलाएं सेनेटरी पेड का इस्तेमाल कर पाती हैं। बिहार और ओड़ीसा के बाद सबसे कम है। शहरी क्षेत्रों में 74 प्रतिशत जबकि,ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 15 प्रतिशत। यूनीसेफ  के अनुसार मप्र में हर साल 26 प्रतिशत महिलाओं को माहवारी संबंधी गंभीर समस्या होती है,लगभग 12 से 13 प्रतिशत की जीवन को खतरा हो जाता है। 78 प्रतिशत महिलाओं को अन्य स्वास्थ्य दिक्कत और एनीमिया होता है। राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन सर्वे अनुसार 48 प्रतिशत किशोरियां माहवारी प्रारंभ होते ही स्कूल छोड़ देती है। इतनी बड़ी संख्या में प्रभावित होने और इतनी बड़ी समस्या के बावजूद माहवारी को लेकर आज भी खुलकर बात नहीं होना भी अपने आप में सवाल है।






महिमा के सामने हैं ये बड़ी चुनौती.......
- गांव में बहुत कम आदिवासी महिलाएं अन्तर्वस्त्र-पैंटी उपयोग करती हैं। उन्हें सेनेटरी पेड इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना होगा।
- आदिवासी समाज में टोने-टोटके और जादू जैसी भ्रांतियां अधिक होती है,जिससे महिलाएं माहवारी से संबंधित बात नहीं करती।
- माहवारी के दिनों में महिलाओं को बिना बिस्तर के सुलाने,भोजन,पानी आदि नहीं छूने सहित कई भ्रांति हैं, जिन्हें दूर करने के लिए परिवार को समझाना होगा।
.गरीबी और अशिक्षा के कारण परिवारों में माहवारी को लेकर बात करना सहज नहीं होता, ऐसे में शासकीय अमले के लिए बात करना भी आसान नहीं होगा।
- मजदूरी के लिए परिवार अक्सर गुजरात या अन्य जिलों में जाते रहते हैं, ऐसे में परिवार की महिलाओं से लगातार संपर्क मुश्किल होगा।






अभियान सफल हुआ तो बदलेगा जीवन........
चिकित्सकों का मानना है कि झाबुआ में अभियान सफल हुआ तो किशोरियों और महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। न केवल बीमारियों और संक्रमण की दर कम होगीए मातृ मृत्यु दर भी कम हो सकता है। आने वाले समय में महिलाओं के जीवन में उन दिनों में होने वाली दिक्कतों को लेकर परिवार में समझ बढ़ने पर महिलाओं के जीवन में व्यापक सुधार आएगा।






एक साल तक इस तरह चलेगा अभियान.......
एक साल तक अभियान के तहत एक्शन प्लान के साथ काम होगा। पीरियड शाला भी लगाई जाएगी,जिसमें महिलाओं को समझाया जाएगा। इसके लिए कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन जो गांव स्तर पर काम करते हैं से लेकर जिला प्रशासन के उच्च अधिकारी तक प्रेरित करेंगे। मास्टर ट्रेनर को लगातार प्रशिक्षित भी किया जाएगा। लगभग 600 वॉलेंटियर मिलकर करीब 5 लाख महिलाओं तक पहुंचेंगे और सतत रूप से प्रेरित करेंगे। दोनों ब्लॉक के चिन्हित स्थानों पर 150 हेंड वॉशिंग मशीन,15 सेनेटरी पेड वेंडिंग मशीन भी लगाई जा रही हैं।
..............................नागेश पाटीदार-वॉश ऑफिसर,यूनिसेफ -मध्य प्रदेश






चुनौती बड़ी ह,लेकिन हम हर संभव प्रयास करेंगे.......
नवाचार के तहत अभियान को हम जिले में यूनीसेफ  की मदद से प्रारंभ कर रहे हैं। आदिवासी परिवारों को प्रेरित करना,समझाना बड़ी चुनौती है,लेकिन अगर लगातार ईमानदार प्रयास किए जाएं,तो निश्चित सफलता मिलेगी। इसके लिए अधिकारियों, कर्मचारियों, समाजसेवियों की मदद भी ली जाएगी। कोशिश रहेगी कि महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकें।
...............................सोमेश मिश्रा,कलेक्टर झाबुआ ।





 




Share To:

Post A Comment: