झाबुआ~विद्यार्थियों को नहीं खोज रहे शिक्षक...... कैसे होगी पढ़ाई पूरी~~

आंकड़े ही नहीं है,इससे हास्यास्पद बात क्या हो सकती है ~~

शिक्षा विभाग की उदासीनता के चलते ड्रॉप आउट विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने की कोशिश कैसे होगी कामयाब~~



झाबुआसंजय जैन~~

मप्र बोर्ड के हाईस्कूल या हायर सेकंडरी स्कूल तक पहुंचकर बीच में पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को सरकारी स्कूल के शिक्षक नहीं खोज रहे हैं। आ अब लौट चलें योजना के तहत बच्चों व उनके परिजनों को मोबाइल और घर पहुंचकर हाईस्कूल और हायर सेकंडरी की आयोजित की जाने वाली परीक्षा में शामिल करने के लिए भी नहीं मना रहे है।






शिक्षा की मुख्यधारा में लाने की कोशिश ...........
आ लौट चलें योजना के तहत ड्रॉप आउट विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्य धारा में लाने की कोशिश की जा रही है। प्रदेश सरकार चाहती है कि यदि कोई बच्चा किसी मजबूरी या फेल होने के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर सका है। उसे आगे पढ़ने का मौका मिलना चाहिए। जिससे वह कम से कम अपनी 10वीं और 12वीं तक की पढ़ाई पूरी कर सकें। इसके लिए प्रदेश स्तर पर एक माह से एक्सरसाइज चल रही है।





 
जिले के हजार विद्यार्थी ......
पहले सरकारी स्कूलों का पिछले 3 साल का डेटाबेस तैयार किया गया। जिसमें ऐसे विद्यार्थी थे जिन्होंने 10वीं या 12वीं में फेल होने के बाद या फिर 9वीं और 11वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी या ओर भी कोई कारण रहा हो ओर बोर्ड परीक्षा में नामांकन करवाने के बाद परीक्षा में शामिल नहीं हुआ।\विद्यार्थियों ने किसी कारण से पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। उसमें ऐसे विद्यार्थी भी मिले जिन्होंने स्कूल छोड़ा,लेकिन इसके बाद व्यावसायिक शिक्षा या अन्य पाठ्यक्रम में प्रवेश ले लिया था। ऐसे विद्यार्थियों की संख्या कम थी।  






शिक्षा विभाग की उदासीनता.........
शिक्षा विभाग की उदासीनता के चलते ड्रॉप आउट विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने की कोशिश कैसे होगी कामयाब....? शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों के अभिभावकों से संपर्क नहीं किया जा रहा है। अभिभावकों को यह बताने की जहमत भी नहीं की जा रही है कि पढ़ाई पूरी करने से जीवन में क्या लाभ होगा...? आ लौट चलें योजना में उन्हें हायर सेकंडरी या हाईस्कूल की परीक्षा पास करने का एक मौका मिला है इसे छोड़े नहीं। जबकि प्राप्त जानकारी नुसार अन्य जिलों में अभिभावकों से संपर्क कर इसकी अहमियत के बारे में बताया जा रहा है। जून व दिसंबर में परीक्षा होना है,ऐसे में जो आगे परीक्षा देना चाहते है वे अपनी सुविधा के अनुसार आवेदन कर सकते है।






फीस सरकार देगी.......
ऐसे बच्चें जो परीक्षा देना चाहते है,उनकी परीक्षा फीस सरकार भरेगी। बच्चों को केवल रजिस्ट्रेशन शुल्क ही देना होगा। वह भी नाममात्र होगा।






माशि मंडल का सिलेबस होगा लागू ........
मप्र राज्य ओपन स्कूल द्वारा आयोजित इस परीक्षा में माध्यमिक शिक्षा मंडल का सिलेबस लागू होगा। परीक्षा की तैयारी बच्चों को करना होगी। परीक्षा में शामिल होने के लिए इस साल दो बार समय दिया जाएगा। शिक्षा विभाग के अनुसार परीक्षा इसी साल जून और दिसंबर में प्रस्तावित है।






डाटा बेस में नाम नहीं है तो यह करना होगा.......
जो विद्यार्थी परीक्षा में भाग लेंगे उनका नाम स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा तैयार कराए गए डाटा बेस में होना चाहिए। विद्यार्थी जिनका नाम डाटाबेस में नहीं हैं,परंतु ड्रॉपआउट की परिभाषा में आते हैं। ऐसे विद्यार्थी डीईओ के प्रमाणीकरण के बाद इस परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। इसके लिए उन्हें विधिवत आवेदन करना होगा।
  ००००००००००००००बॉक्स  खबर ०००००००००००००००००००००
चिंतनीय बात तो यह है कि शिक्षा विभाग के पास ड्राप आउट विद्यार्थियों के आंकड़े ही नहीं है। इससे हास्यास्पद बात क्या हो सकती है ....? । इस बारे में  जिला शिक्षा अधिकारी ओपी बनडसे संपर्क किया तो उन्होंने पहले दो तीन बार फ़ोन ही रिसीव नहीं किया,जब रिसीव किया तो कहा मै थोड़ी देर में आंकड़े आपको देता हु। डीएओ को भी आकड़ो के बारे में कोई जानकारी नहीं है,उन्होंने कहा आप रामसिंह मचार से बात कर लेवे। अंत में मचार ने भी बताया मुझे भी आंकड़े नहीं मिल रहे है। अंतत: खबर लिखे जाने तक कोई भी जिम्मेदार ड्राप आउट विद्यार्थियों का आंकड़े देने में समर्थ नहीं था और यह खबर हमें बिना आंकड़े से प्रकाशित करनी पड़ी।  




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