धार~मामला धार नगर पालिका का
ये गलत है... पैसा भुगतने को तैयार,सिस्टम लगाने से परहेज~~

100 लोगों ने वाटर रिचार्चिंग सिस्टम के लिए सुरक्षा निधि जमा कराई, दो ने लगाए ~~

धार ( डॉ. अशोक शास्त्री )।


शहर में भू जल स्तर बढ़ाने में सहायक रेन वाटर रिचार्चिंग सिस्टम को लेकर लोगों में जागरूकता का अभाव है। यूं तो नगर पालिका ने शासन द्वारा निर्धारित करीब 1500 स्क्वेयर फीट से अधिक के भवनों में सिस्टम लगाना अनिवार्य किया है। इसके बावजूद धार में नाम मात्र के घरों में नियमों का पालन किया जा रहा है। रिचार्जिंग सिस्टम लगाने की अनिवार्यता के चलते निकाय में सुरक्षा निधि के तौर पर 7 से लेकर 12000 तक की रािश जमा कराई जाती है। ये निधि सिस्टम लगाने के बाद लोगों को लौटा दी जाती है। शहर में बीते कुछ वर्षों में 100 से अधिक नियमांतर्गत आने वाले मकान मालिकों ने निर्माण अनुमति लेने के दौरान रूफ रैन वाटर रिचार्चिंग सिस्टम लगाने के लिए सुरक्षा निधि जमा करवाई है। इसमें से महज दो लोग अपनी सुरक्षा निधि लेने वापस आए हैं। करीब 98 लोगों ने पैसा भुगतना स्वीकार किया लेकिन सिस्टम लगाने से परहेज रखा।
सैकड़ों मकान दायरे में
रूफ रैन वाटर रिचार्चिंग सिस्टम की वर्तमान में पर्यावरणविद् और भू वैज्ञानिक भी पैरवी कर रहे हैं। बारिश के पानी के संचयन से जमीन का जल स्तर बनाए रखने की आवश्यकता बताई जा रही है। नगर निकायों ने भी एक निश्चित मापदंड से अधिक बड़े मकानों में इसे अनिवार्य कर दिया है। विगत 10 वर्षों में महज 100 लोगों से सुरक्षा निधि जमा कराई गई है। हकीकत यह है कि 1500 स्क्वेयर फीट से बड़े मकान 100 नहीं सैकड़ों की संख्या में पिछले एक दशक में धार में बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राप्त निधि में लोगों ने अपने निजी कर्ज को जोड़कर बड़े-बड़े मकान बनाए हैं। इन मकानों में न निर्माण अनुमतियां ली गई है और न ही रिचार्चिंग सिस्टम लगाए गए हैं। सबसे मुख्य बात यह है कि बड़े-बड़े शासकीय भवनों में भी सिस्टम नहीं लगाया गया है। ठेकेदारों की मजबूरी है कि टेंडर के दौरान सम्मिलित कार्यों में वाटर रिचार्चिंग सिस्टम की राशि नहीं जोड़ी जाती है। ऐसे में ठेकेदार टेंडर के अनरूप ही निर्माण करते हैं।
गिर रहा है जल स्तर
धार जिले में अलग-अलग क्षेत्रों में भू जल स्तर लगातार घट रहा है। ऐसे में धार नगरीय क्षेत्र भी शािमल है। 400-500 फीट खनन के पश्चात नलकूपों में पानी आ रहा है। धार नगरी को साढ़े 12 तालाब की नगरी कहा जाता है। इसके आसपास अभी भी 4-5 तालाब जीवित अवस्था में है। इसके कारण यहां पर जल स्तर अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम गिरा है।
इनका कहना है
27 को जनजागरण रैली
वाटर रिचार्चिंग सिस्टम लगाने के लिए नियम बने हुए हैं। ये नियमों से अधिक जनजागरूकता और वर्तमान की आवश्यकता का विषय है। हम इसके प्रति गंभीर है। 27 जून को शहर में वाटर रिचार्चिंग सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए जनजागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं। उम्मीद है आगे इसके बेहतर परिणाम मिलेंगे। अब निर्माण अनुमतियों को जारी करने के बाद प्राथमिकता से रिचार्चिंग सिस्टम की जांच की जाएगी।
-निशिकांत शुक्ला, सीएमओ नपा धार
चित्र है


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