धार~मामला सामुदायिक भवन का.....

15 लाख के भुगतान के चक्कर में 45 लाख का भवन खराब होने की स्थिति ~~

दो माह पहले कलेक्टर ने किया था दौरा, ठेकेदार ने किया था काम पूर्ण करने का वादा, 1 इंच काम भी नहीं किया ~~

धार ( डॉ. अशोक शास्त्री )।

शासकीय उद्यान लालबाग परिसर में 45 लाख के खर्च से बनाए जा रहे  सामुदायिक भवन का काम बंद पड़ा है। इस भवन को पिछले 5 सालों से बनाया जा रहा है। इसके बावजूद इसका काम आज तक पूर्ण नहीं हुआ है। इस मामले में नगरपालिका की लापरवाही और आर्थिक दिक्कतें काम पूर्ण होने में रोड़ा बनी हुई है। दरअसल निर्माण करने वाले ठेकेदार का करीब 15 लाख रुपए का भुगतान अटका हुआ है। इसके कारण ठेकेदार काम पूर्ण नहीं कर रहा है। ऐसी स्थिति में भवन जीर्णशीर्ण होने की स्थिति में पहुंच गया है।
कलेक्टर से किया था पूर्ण का वादा
22 अप्रैल को कलेक्टर डॉ पंकज जैन ने लालबाग में नवीन उद्यान नवग्रह वाटिका का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने सामुदायिक भवन का भी निरीक्षण किया था। भ्रमण के दौरान अधूरी स्थिति देखकर उन्होंने नपा अधिकारियों से जानकारी ली थी। इस दौरान ठेकेदार भी मौजूद थे, जिन्होंने उस दौरान कुछ दिनों में जालियां और गेट लगाने सहित रंग-रोगन पूर्ण करने का वादा किया था। कलेक्टर के दौरे को पूरे 2 माह बीत गए है। इस दौरान ना ठेकेदार को निकाय से भुगतान मिला है ना ही ठेकेदार ने 1 इंच का काम आगे बढ़ाया है।
शुभारंभ पर दिखाए थे सपने
लालबाग में निर्माणाधीन भवन को सामुदायिक भवन का नाम दिया गया था। इसके निर्माण के शुभारंभ के दौरान जनता को बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे। लोगों को बताया गया था कि इस भवन के माध्यम से कमजोर वर्ग के लोगों को अपने वैवाहिक और बर्थडे पार्टी जैसे आयोजन करने के लिए नाम मात्र के शुल्क पर सुविधा मुहैया कराई जाएगी। निर्माण प्रारंभ होने के बाद से करीब 5 वर्ष होने आए है। भवन का काम 90 प्रतिशत पूर्ण होने के बाद बंद पड़ा है। इधर देखरेख के अभाव में फ्लोरिंग क्षतिग्रस्त होने लगी है। भवन धूल-मिट्टी से खराब दिखने लगा है।
और भी संपत्तियां बदहाल
नगरपालिका के पुराने अधिकारियों की लापरवाही के कारण इस तरह के हालात बने है। लालबाग का सामुदायिक भवन ही नहीं बल्कि निकाय के द्वारा करोड़ों की राशि निवेश किए गए कई काम धूल खा रहे है। ऐसे कामों में थोक सब्जी मंडी में निकाय द्वारा बनवाई गई 22 दुकानें भी शामिल है।  करोड़ों खर्च कर इन दुकानों का निर्माण कराया गया था। कई वर्ष बीत गए है, निकाय के अधिकारी राजनैतिक अड़ंगेबाजी के कारण दुकानों का आवंटन पात्र लोगों को भी नहीं कर पा रहे हैं।
पैसा अटकने से ठेकेदार मजबूर
शहर के अधूरे निर्माण कार्यों को पूर्ण ना कर पाने में ठेकेदार भी मजबूर है। दरअसल ठेकेदारों का लाखों का भुगतान अटका पड़ा हुआ है। इधर भुगतान ना होने के कारण काम रूके है। वहीं सीमेंट, सरिये सभी के दाम बढ़ गए है। सोने से घढ़ाई महंगी पड़ रही है। मुनाफा तो दूर मजदूरी निकालने में भी दिक्कतें हो रही है। इधर पैसा अटकने से ठेकेदार सभी दूर से मुश्किलों में आ गए है। इधर निकाय की अपनी दिक्कतें है। आमदानी अट्ठन्नी और घोषणाएं हजार। इसके कारण पैसा नहीं है और भुगतान में दिक्कतें हो रही है।


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