धार~मामला धार नगरपालिका का.........
3 साल बाद अब उपभोक्ता शुल्क बढ़ाने की तैयारी, 15 करोड़ खर्च के बाद भी 5 करोड़ का शुल्क भी नहीं मिल पा रहा ~~

नगरपालिका की स्थिति आमदनी चवन्नी-खर्चा रूपया, अब आय बढ़ाने के शासन के निर्देशों के तहत कार्रवाई ~~

पेट्रोल, डीजल के दाम दोगुने हुए विद्युत दरें बढ़ी, इसी के साथ बढ़े नपा में उपभोक्ता संबंधी व्यवस्थाओं के खर्च ~~

ेघर-घर कचरा संग्रहण के लिए 30 गाड़ियां दौड़ती है सड़कों पर, शहर के 3 तालाबों और सम्पवेलों से मोटरों के जरिये पेयजल आपूर्ति की जाती है ~~

धार ( डॉ. अशोक शास्त्री )।

3 साल बाद धार नगरपालिका शासन से प्राप्त निर्देशों के तहत उपभोक्ता शुल्क को बढ़ाने की तैयारी में लगी है। पीआईसी में इस प्रस्ताव पर मोहर लग चुकी है। निकाय उपभोक्ता शुल्क में करीब् 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने वाला है।  इस बढ़ोतरी से पेयजल सहित स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं के शुल्क में आंशिक बढ़ोतरी होगी। हालांकि इसके बावजूद नगरपालिका की वित्तीय स्थिति में कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला है। दरअसल आमदनी चवन्नी और खर्चा रूपया की तर्ज पर बुनियादी सुविधाओं को मुहैया कराया जा रहा है। नतीजे में प्रतिवर्ष निकाय को जेब से करोड़ों रुपए खर्च करना पड़ रहे हैं।
पेट्रोल-बिजली-डीजल दाम दोगुने हुए
धार नगरपालिका पेयजल सप्लाय और स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं पर साल के करीब 15 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। इसके एवज में उसे शुल्क के रूप में 5 करोड़ रुपए भी नहीं मिल पा रहे हैं। यही कारण है कि नगरपालिका लगातार आर्थिक मोर्चांे पर जुझती जा रही है। जिसका असर कर्मचारियों के वेतन से लेकर विद्युत बिलों के भुगतान सहित अन्य भुगतानों पर भी हो रहा है। निकाय व्यवस्थाओं को मुहैया कराने के बदले में मुनाफा कमाना तो दूर करोड़ों का घाटा उठा रही है। इस तरह की स्थिति सभी निकायों में उत्पन्न हो गई है। दरअसल बीते कुछ सालों में पेट्रोल-डीजल और विद्युत दरों में इजाफा हुआ है। इसका असर इसके उपयोग से जुड़े प्रत्येक सेक्टर में देखा जा रहा है। ट्रांसपोर्टेशन, यात्री परिवहन सहित कई सेक्टरों में शुल्क बढ़ोतरी हुई है। इधर नगरपालिका जैसे बुनियादी सुविधा मुहैया कराने वाले संस्थान करोड़ों का घाटा उठाते हुए सीमित शुल्क में सुविधाओं को मुहैया करवा रही है।
12 हजार घरों में नल कनेक्शन
नगरपालिका पेयजल व्यवस्था पर करीब साल के 5 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। इसके एवज में उसे शुल्क के रूप में 2 करोड़ रुपए भी नहीं मिल पा रहे हैं। बीते कुछ सालों में बाजार का अध्ययन किया जाए तो केबल जैसी सुविधाओं का शुल्क दोगुना करीब 250 से 300 रुपए महीना हो गया है। वहीं नगरपालिका पानी का सिर्फ 100 रुपए महीना ही ले पा रही है। औसत रूप से सभी प्रकार के खर्च  को जोड़ने पर 1 घर में पानी सप्लाय पर नगरपालिका को 380 रुपए खर्च कर रही है। उसे शुल्क के रूप में सिर्फ 100 रुपए प्राप्त हो रहे है। पेयजल मानव जीवन के लिए ही सबसे महत्वपूर्ण जरूरत है। इसके बावजूद इसका शुल्क नाम मात्र का है। नगरपालिका के रिकार्ड में अभी करीब 12 हजार के लगभग घरेलू और व्यवसायिक नल कनेक्शन है।
17 हजार मकानो से कचरा संग्रहण
नगरपालिका शहर के 30 वार्डों में 17163 घरों से वाहनो के माध्यम से कचरा संग्रहण करती है।  शुल्क के रूप में महज 30 रुपए प्रतिमाह लिए जाते हैं।  वास्तवित रूप से सभी प्रकार के व्यवस्था से जुड़े खर्च जोड़कर निकाय को पूरे महीने में प्रति घर 490 रुपए का खर्च आ रहा है। यही कारण है कि खर्च अधिक और शुल्क सीमित लिया जा रहा है। बीते 3 सालों में कोरोना संक्रमण के कारण शुल्क बढ़ोतरी भी नहीं की गई है।
बॉक्स-1
यह गलत है- 100 रुपए महीना भी देने से बचते है
बुनियादी सुविधाओं को मुहैया कराने में जहां करोड़ों खर्च हो रहे है। वहां पेयजल जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था के तहत प्रतिमाह का 100 रुपए शुल्क चुकाने में भी बड़े पैमाने पर लोग बचते है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति पौ चौपाटी से जुड़े क्षेत्रों और मुस्लिम बस्तियों की है। यहां पर लोगों पर पुराना शुल्क बकाया है। मुहिम चलाकर पैसे लेने के लिए घर-घर जाना पड़ता है।  यह वह इलाके है जहां पर हर घर में केबल का कनेक्शन है। ऐसे लोग एक दिन टीवी बंद होने पर तुरंत 300 का भुगतान करके अपना मनोरंजन नियमित रखते है, लेकिन जलकर का पैसा सालों तक नहीं चुकाते है।
चित्र है


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