कई शुभ संयोगों में शुरू हो रहे आषाढ गुप्त नवरात्रि- ज्योतिषाचार्य शास्त्री ~~

नवरात्रि 30 जून से शुरू होगी जो 8 जुलाई होगी समाप्त~~

धार। गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की विधि - विधान के साथ पूजा की जाती है। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है।   मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ अशोक शास्त्री ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि नवरात्रि का पावन त्योहार आदिशक्ति मां दुर्गा को समर्पित माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साल भर में कुल चार नवरात्रि आते हैं। जिसमें से दो चैत्र व शारदीय और दो गुप्त नवरात्रि होती हैं। आषाढ़ मास में पड़ने वाले नवरात्रि को आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी , माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धुम्रावती, मां बंगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है। इस साल गुप्त नवरात्रि बेहद शुभ संयोग में शुरू हो रहे हैं। गुप्त नवरात्रि के पहले दिन ग्रह - नक्षत्रों की स्थिति इस दिन का महत्व बढ़ा रही हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 30 जून 2022 से शुरू होंगे, जो 8 जुलाई 2022 को समाप्त होंगे।
प्रथम दिवस बन रहे कई योग
डॉ  शास्त्री के अनुसार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के प्रथम दिन यानि 30 जून को गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, आडल योग और विडाल योग बन रहे हैं। इस दिन ध्रुव योग सुबह 09 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। पुनवर्सु नक्षत्र मध्य रात्रि पश्चात 1:07 जुलाई 1 तक रहेगा। इसके अलावा पुश्य नक्षत्र का भी निर्माण हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इन सभी योगों को शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना गया है। गुप्त नवरात्रि की घटस्थापना 30 जून गुरुवार को होगी। गुप्त नवरात्रि प्रतिपदा तिथि 29 जून को सुबह 8 बजकर 21 मिनट से 30 जून को सुबह 10 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। घटस्थापना मुहूर्त सुबह 5 बजकर 48 मिनट से सुबह 6 बजकर 59 मिनट है।
मां को लाल रंग के वस्त्र अर्पित करें
ज्योतिषाचार्य डॉ शास्त्री ने बताया कि मां दुर्गा की गुप्त नवरात्रि में पूजा करने से पहले स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा सामग्री को एकत्रित कर, पूजा का थाल सजाएं। मां दुर्गा की प्रतिमा को लाल रंग के वस्त्र अर्पित करे। मां को लाल पुष्प चढ़ाना शुभ माना जाता है।  सरसों के तेल से दीपक जलाकर ‘ॐ दुं दुर्गायै नम:’ मंत्र का जाप करना चाहिए । अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें। आखरी दिन माता पूजन के बाद घट विसर्जन करें।
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