झाबुआ~13 हजार से ज्यादा बच्चों को वापस स्कूल पहुंचाने का लक्ष्य~~

इस वर्ष पहली कक्षा में 32 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिलाने का काम चुनाव से  हुआ प्रभावित~~


झाबुआसंजय जैन~~

स्कूल चलो अभियान का पहला चरण एक जून तक चलाया गया । अभियान के दौरान जिलेभर में 13 हजार से ज्यादा हजार ऐसे बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाना है,जो आउट ऑफ  स्कूल दर्ज हैं। नवीन शैक्षणिक सत्र में पहली कक्षा में 32 हजार से ज्यादा बच्चों को प्रवेश दिलाने का लक्ष्य भी स्कूलों को मिला हुआ है।




आउट ऑफ  स्कूल माना है13 हजार से ज्यादा बच्चों को ..........................
राज्य शिक्षा केन्द्र ने एजुकेशन पोर्टल पर एक सूची अपलोड की है जिसमें जिले के 13 हजार से ज्यादा बच्चों को आउट ऑफ  स्कूल माना है। स्कूल चलो अभियान के दौरान इन बच्चों को तलाश कर सरकारी स्कूलों में उनके नाम लिखवाने हैं। जो छात्राएं पांचवीं कक्षा पास कर मिडिल में पढ़ने नहीं जा रही हैं उनके नाम भी समीप के सरकारी छात्रावास में दर्ज कराने हैं।





 
प्रवेश दिलाने का काम चुनाव से  हुआ प्रभावित..........................
स्कूल चलो अभियान का पहला चरण 1 जून तक चला। अभी तक 13 हजार बच्चों में से 120 बच्चों को तलाश कर उनके नाम स्कूल में दर्ज कराए गए हैं। बच्चों को सर्च करने व स्कूल तक पहुंचाने का काम और तेज गति से हो पाता लेकिन पंचायत व निकाय चुनाव में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने के कारण स्कूल चलो अभियान की गतिविधियां प्रभावित हैं। वहीं नवीन शैक्षणिक सत्र में पहली कक्षा से लेकर 12 क्लास के बच्चों के एडमीशन की मैपिंग व फीडिंग का काम बीआरसी कार्यालयों के माध्मय से कराया जा रहा है।






स्कूलों तक किताबें पहुंचें तब वितरण होगा शुरू......................
नवीन शैक्षणिक सत्र के छात्र-छात्राओं के लिए एनसीईआरटी की किताबें ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालयों तक पहुंचा दी गई हैं। उनको स्कूलों तक पहुंचाने के लिए कोर्स की किताबों का वितरण होगा। इस साल स्कूली छात्राओं को साइकिल वितरण में देरी होगी क्योंकि अभी तक साइकिल सप्लाई करने से संबंधित टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है क्योंकि टेंडर की शर्तों में आनन-फानन में बदलाव किए जाने से मध्यप्रदेश से बाहर के सप्लायर टेंडर नहीं डाल पा रहे हैं। सरकारी स्कूलों के बच्चों को गणवेश का वितरण अगस्त के बाद हो सकेगा क्योंकि एनआरएलएम से गणवेश की सप्लाई होना है। पिछले साल भी काम की गति धीमी होने के कारण गणवेश बनाने का काम स्लो गति से चला था इसलिए गणवेश बंटने में देरी हुई थी।




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