धार~मामला महाराष्ट्र बस हादसे का.......
खलघाट में बारिश जारी नर्मदा उफान पर, सर्चिंग टीमें अभी भी नदी में जुटी ~~

दुर्घटना की खबर पूरे देश में फैलने के बाद भी हेल्पलाईन पर परिजनों की गुमशुदगी और यात्रा करने को लेकर एक भी कॉल नहीं ~~

महाराष्ट्र से सीएम के निज प्रतिनिधिमंडल ने दुर्घटना स्थल का किया दौरा, 13वें मृतक के नाम को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई ~~

नेशनल हाईवे के अधिकारियों ने किया दौरा, राजमार्ग पर कुछ स्थानों पर सुधार कार्य के दिए निर्देश ~~

धार ( डॉ. अशोक शास्त्री )।

जिले के खलघाट क्षेत्र में मंगलवार को भी मानसून सक्रिय रहा है। तेज-मध्यम बारिश के मध्य नर्मदा नदी का बहाव उफान पर है। इसके बाद भी नदी क्षेत्र पर एनडीआरएफ की टीमें मंगलवार को बस के नदी में गिरने से डूबे यात्रियों के सर्चिंग अभियान में जुटी हुई है। अब तक 12 लोगों के शव सोमवार को निकाल दिए गए थे। कुछ और यात्रियों के होने की संभावनाओं के मद्देनजर सर्चिंग अभियान को दूसरे दिन भी जारी रखा गया है।  इधर दूसरे दिन मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के निज सचिव मंगेश चिवड़े और अन्य सदस्यों ने खलघाट पहुंचकर दुर्घटना स्थल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने धार-खरगोन प्रशासन द्वारा दुर्घटना के दौरान किए गए बचाव के प्रयासों की सराहना की।
यात्रियों का अधिकृत आंकड़ा नहीं
सोमवार को हुए बस हादसे में सवार यात्रियों की संख्या का अनुमान किसी के पास भी नहीं है। इंदौर बस स्टैंड से प्राप्त आंकड़े के अनुसार 12 यात्री सवार थे और कंडक्टर और ड्रायवर मिलाकर करीब 14 लोगों के होने की स्थिति आंकी जा रही है। 12 शव मिल चुके है। नर्मदा में फिलहाल इतना तेज बहाव है कि यदि और यात्री नदी में डूबे होंगे तो उनका बचना और शव मिलना लगभग असंभव हो रहा है।
हेल्पलाईन की घंटी नहीं बजी
सोमवार सुबह महाराष्ट्र राज्य परिवहन विभाग की बस के नदी में गिरने के बाद यात्रियों से जुड़े लोगों की मदद के लिए धार प्रशासन के अधिकारियों के नंबर के साथ धामनोद स्वास्थ्य केन्द्र का नंबर भी हेल्पलाईन नंबर के तौर पर जारी किया गया था। 12 शव मिलने के बाद से बीते 24 घंटों में हेल्पलाईन नंबर पर किसी भी तरह की घायल या मृतक यात्री और बस दुर्घटना से संबंधित जानकारी के लिए कोई फोन नहीं आया है। बस दुर्घटना की खबर राष्ट्रीय स्तर पर फैलाने के बाद भी हेल्पलाईन नंबर पर कोई घंटी नहीं बजी है। संभावना है कि यात्रियों की संख्या 12 ही रही होगी। 
राजस्थान-महाराष्ट्र भेजे गए शव
बीते दो दिन सोमवार-मंगलवार खलघाट क्षेत्र में मानसून लगातार सक्रिय है। दुर्घटना की खबर के बाद खरगोन और धार के प्रशासनिक अधिकारियों ने तुंरत मोर्चा संभाला था। वहीं कमिश्नर से लेकर पुलिस महानिरीक्षक भी मौके पर पहुंचे थे। तमाम अधिकारियों के प्रयास से दुर्घटना के बाद लगातार सर्चिंग करके 12 लोगों के शव नर्मदा से निकाले गए थे, जिन्हें रात में ही   महाराष्ट्र एवं राजस्थान में यात्रियों के गृह जिले रवाना करवा दिया गया है। इधर एक मृतक इंदौर का होने से उसका शव परिजनों के साथ इंदौर भिजवाया गया है।
13वीं लाश को लेकर भ्रम दूर हुआ
बस दुर्घटना में नर्मदा से निकली लाशों को लेकर अलग-अलग आंकड़ों से भ्रम फैल रहा है। अधिकृत जानकारी के अनुसार कुल 12 शव निकाले गए हैं। 13 लाशों को लेकर भ्रम की स्थिति बनने का मुख्य कारण एक आधार कार्ड रहा है। दरअसल मृतकों के पास से मिले दस्तावेज में कमलाबाई पति लिम्बा जी पाटिल अमलनेर का दस्तावेज भी सामने आया था। इसके बाद कमलाबाई के शव को लेकर पूछताछ शुरु हुई। इधर महाराष्ट्र से आए दूसरे मृतकों के परिजनों ने स्थिति स्पष्ट की कि कमलाबाई जीवित है और महाराष्ट्र में है। संभवत: कमलाबाई के दस्तावेज उनके किसी परिचित के जेब में थे।
बॉक्स-1
हादसे की जांच शुरु, पीटीआरआई-एनएचए के अधिकारी पहुंचे
बस दुर्घटना के बाद अब हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। इस दुर्घटना का सीधे कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है। चूंकि सुबह करीब 9-10 के मध्य दुर्घटना हुई है। इस दौरान ट्रॉफिक लोड ज्यादा नहीं रहता है। ऐसी स्थिति में बस का सीधे नीचे गिर जाने के कारणों का पता किया जा रहा है।  इसको लेकर मंगलवार को पुलिस ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (पीटीआरआई) के एडीजी जी जर्नादर और एआईजी ने मौका-मुआयना किया। इधर नेशनल हाईवे अथॉरिटी (एनएचए) के अधिकारी भी खलघाट पहुंचे थे। प्रेस से चर्चा में श्री जर्नादन ने प्रारंभिक निरीक्षण में ओवर स्पीड या ध्यान भटकने से दुर्घटना होने की आशंका जताई है। उल्लेखनीय है कि इस दुर्घटना में एक भी व्यक्ति के जिंदा नहीं मिला है। संभावना है कि ऊंचाई से नीचे गिरने के दौरान बस के सीमेंटेड बैस से टकराने से यात्रियों को आंतरिक चोंटे आने से या बेहोश होने से  तैर नहीं पाए। इसके अलावा महाराष्ट्र की बस में खिड़कियों में कांच के पहले लोहे के पाईप लगे होने से खिड़की से निकलने का रास्ता नहीं था। इस तरह के तमाम कारणों का पता किया जा रहा है जिससे इस बात की जानकारी मिल सके कि यात्रियों में जीवित एक भी क्यों नहीं बचा।


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