भोपाल~ मध्य प्रदेश रेत नियम 2019 की धारा 3(6) की भी अवहेलना हो रही है~~

नर्मदा  अवैध रेत खनन को प्रशासन का आशीर्वाद श्री मुकेश~~

नर्मदा का पानी पूर्णत प्रदूषित मेघा पाटकर~~

भोपाल सैयद रिजवान अली~~


वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता नर्मदा बचाओ आंदोलन नेत्री मेघा पाटकर और मुकेश भगोरिया ने इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया को प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के 2015 और सर्वोच्च अदालत के 2013' राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के 2017, तथा 2019 के मध्य प्रदेश रेत tv vv (खनन, परिवहन, भंडारण एवं व्यापार )नियम, 2019 का हो रहा है खुला उल्लंघन!
      मध्य प्रदेश की जीवन रेखा मानी जाती रही नर्मदा नदी का की बर्बादी का मुख्य कारण है, अवैध रेत खनन! देश के कुछ अन्य नदियों की तरह, जैसे यमुना और ताप्ती, नर्मदा के बेसिन  ही क्या, नदी पात्र की भी रेत निकाल ली जाने से, नर्मदा का भू जल चक्र खत्म होकर नदी के बहाव और जल प्रवाह पर गंभीर असर पड़ता ही रहा है।
      नर्मदा बचाओ आंदोलन ने 2014 से उच्च न्यायालय में याचिका चला कर 6/5 /2015 को न्यायाधीश खानविलकर जी के न्याय पीठ ने सरदार सरोवर के डूब क्षेत्र की जमीन में, जो सरोवर के अलावा किसी भी कार्य के लिए उपयोग में लाना मना है वहां, रेत खनन के खिलाफ मनाई हुकुम जारी किया, जो आदेश आज भी जारी है। उसी प्रकरण में पर्यावरणीय मुद्दों पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण की भोपाल खंडपीठ से सुनवाई हुई। उसमें बड़वानी, धार, खरगोन, अलीराजपुर के जिलाधिकारी और पुलिस  प्रशासक को कोर्ट के समक्ष हाजिर होकर आगे खनन रोकने, चेक पोस्ट लगाने, जप्त किये वाहन नहीं छोड़ने आदि संबंधी आश्वासन और शपथ पत्र देना पड़ा था। लेकिन आज तक इसका पालन नहीं हुआ ।
     आंदोलन ने कई बार रात बेरात जाकर अवैध खनन रुकवाया और वाहन, मशीनें बड़वानी, धार जिले में जप्त  करवाई। लेकिन जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षकों  को एक नहीं अनेक बार ठोस जानकारी (स्थल, उत्खनन, परिवहन, वाहन क्रमांक, रेत की मात्रा, प्रभाव आदि संबंधी)  देकर आगाह किया है ।हर संबंधित अधिकारी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का 27/2/ 2012 का राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकारण दिल्ली का 2013 का आदेश और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का 2015 का आदेश से भलीभांति परिचित होते हुए उस पर क्यों नहीं हो रही कार्यवाही? लेखा अधिकारी और पुलिस कर्मचारी के आगे होने से माफिया को पूर्व में ही खबर मिलकर हमला होता है, जिसका प्रमाण है कल लालू डावर नाम के पुलिस कर्मचारी पर हुआ रेत माफियाओं का हमला। 
हम इसका निषेध करते हैं और हमले के लिए भी  अधिकारियों को ही दोषी मानते हैं।
   नर्मदा घाटी के डूब क्षेत्र की मालीकी नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की ही है होते हुए उस जमीन में रेत खनन करने के लिए मालिकाना हक रखने वाले कार्यपालन यंत्री दोषी माने जाएंगे। यह सूचना नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण में कुछ साल पहले ही देकर रोकने कहा था, आज तक नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई है।  
    आज की ताजा खबर है कि धरमपुरी, तहसील,जिला धार म.प्र. के ग्राम गुलाटी में नर्मदा नदी के किनारे नदी के पात्र से  सरदार सरोवर डूब क्षेत्र में, जहां म.प्र. उच्चतम न्यायालय जबलपुर के आदेश दिनांक 6/5/2015 के तहत अवैध रेत खनन पर सख्त रोक है; उसके बावजूद आदेश की अवमानना करते हुए  खनिज विभाग एवं ठेकेदार आज ग्राम गुलाटी में रेत खनन का उद्घाटन करने जा रहे है| एक तरफ नर्मदा नदी में पानी नही है  और मच्छली एवं जलीय जीवों पर पर्यावरणीय असर हो रहा है, नदी सूखती जा रही है; फिर भी दूसरी ओर रेत खनन करने की अनुमति देने का दावा कर  रहे है, धार जिले के खनिज अधिकारी| उमरी भी अवैध ही मानी जाएगी!
       धार जिले के मनावर, धरमपुरी,में चले अवैध रेत खनन के खिलाफ कई आवेदन SDM मनावर एवं जिलाधीश महोदय धार को दिए जा चुके है| लेकिन बार बार शिकायतों के बाद भी शासन-प्रशासन नही दे रहा ध्यान, अवैध रेत खनन कर्ताओं पर कोई ठोस कार्यवाही नही की जा रही है| कुक्षी में ही केवल कभी जप्त हुए वाहन तो दो दिन बाद फिर कार्यरत होते रहे| पिछले वर्ष भी नामजद शिकायत की गई थी, लेकिन कोई कार्यवाही नही हुई| शिकायत करने पर 3-4 वाहन पकडते है और उन स्थानों पर भरसक अवैध रेत खनन चलता रहता है| 24 जून की शिकायत पर कल उरदना में 3 ट्रेक्टर जप्त कर बाकानेर चौकी पर खड़े किये है| लेकिन उरदना में आज भी 15 से 20 ट्रेकरों से अवैध खनन कार्य जारी है|   तहसीलदार महोदय धरमपुरी, द्वारा नर्मदा नदी में  पिछले माह में नाव द्वारा अवैध रेत खनन करने वालों की नावों  को जप्त कर तोड़ दी गई थी लेकिन अवैध रेत खनन नही रुका, आज भी जारी है| यह सब शासन प्रशासन की कमजोरी मानी जाए या भागीदारी?
      मध्य प्रदेश रेत नियम, 2019 की धारा 3(6) के अनुसार "नर्मदा नदी में -------प्रतिबंध रहेगा।"
       इस समूचे कानूनी दायरे को उल्लंघित करते हुए चल रहा अवैध रेत खनन नर्मदा नदी को बर्बाद कर रहा है, इसमें कोई शंका नहीं । जल भंडारण का आधार रही रेत  जहां जल जल ग्रहण का प्रत्यक्ष क्षेत्र है या जल संचय होता है वहां से निकलने पर नदी की धारा ही खत्म होने लगती है। 
      नर्मदा का जलस्तर 2019 से आज तक कभी सरदार सरोवर की पूर्ण जल ऊंचाई तक न बढ़ने का तथा गर्मी में क्या, आज तक  जुलाई 2022 तक भी नर्मदा सुखी रूखी रहने का एक मुख्य कारण यही है। इससे केवटों का परिवहन, मछुआरों का मत्स्य व्यवसाय ही नहीं, बड़वानी सहित घाटी के शहरी- ग्रामीण क्षेत्र पेयजल और सिंचाई भी प्रभावित होकर फसलों पर असर किसान- मजदूर, मछुआरे सभी को गहरा नुकसान पहुंचा रहा है
      जब कि नर्मदा में पानी की मात्रा कम होने पर, उस में बहती शहर की गंदगी और औद्योगिक क्षेत्र से फेंकी जा रही अवशिष्ट पदार्थ की मात्रा बढ़ने पर, नर्मदा का पानी पूर्णत प्रदूषित होकर की जनता इस पानी से ही बीमारियां भुगत रही है, जो कि जीवन पर, जीने के अधिकार पर गंभीर हमला है| इससे निजी अस्पतालों की संख्या तो बढ़ रही है लेकिन जनता हैरान है|
        इस सब पर कड़ी कार्रवाई के लिए न्यायालय पर दस्तक देना होगी ही लेकिन घाटी के बुद्धिजीवी और श्रमजीवीयों ने मिलकर सोचना होगा, क्या नर्मदा बचानी है या नहीं?


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