धार~पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं है, स्कूल ने कर दी 3 दिन के लिए विद्यार्थियों की छुट्टी  ~~

शिक्षकों की कमी से जुझता मुख्यालय का ‘मॉडल’ स्कूल, हायर सेकेंडरी में शिक्षक कम तो मावि में शिक्षक ही नहीं
मॉडल स्कूल के शिक्षक करते है ‘पढ़ाने का प्रबंधन’ कभी मॉडल की कक्षा देखते है तो कभी मावि में जाकर बच्चों को देते है शिक्षा ~~

केमेस्ट्री, जीव विज्ञान-संस्कृत विषय के शिक्षक पद रिक्त, अंग्रेजी के एक शिक्षक के भरोसे से हिन्दी-इंग्लिश मीडियम की पढ़ाई ~~

धार ( डाॅ. अशोक शास्त्री )।


जिले के सरकारी स्कूल शिक्षकों की कमी से जुझ रहे हैं। मॉडल स्कूल जैसी विशिष्ट संस्थाओं में शिक्षकों की कमी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। हालात यह है कि मॉडल स्कूल में एक परिसर एक शाला के तहत संचालित होने वाले माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक ना होने के कारण बच्चों को तीन दिवस का अवकाश दिया गया है। विद्यालय में सिर्फ 10वीं और 12वीं बोर्ड के बच्चों की कक्षाएं संचालित की जा रही है। इसमें भी हालात यह है कि विषयवार शिक्षक ना होने पर पीरियड्स खाली जा रहे है। सोमवार को कुछ ऐसा ही नजारा जिला मुख्यालय के मॉडल स्कूल में कक्षा 12वीं में दिखाई दिया। जहां पर केमेस्ट्री विषय के शिक्षक ना होने के कारण विषय का पीरियड नहीं लगा और बच्चों ने एक-दूसरे को पढ़ाकर विषय ज्ञान से खुद को जोड़े रखा।
जो है उन पर अतिरिक्त भार
मॉडल स्कूल हिन्दी और इंग्लिश दोनों माध्यम में संचालित होता है। इसी के साथ कक्षा 6ठीं से 8वीं तक माध्यमिक विद्यालय भी दोनों माध्यम में संचालित हो रहा है। मॉडल स्कूल में 10 शिक्षक पदस्थ है। जिसमें प्रत्येक कक्षा के 125 से अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाने का जिम्मा है। यहां पर केमेस्ट्री, जीव विज्ञान, विज्ञान, संस्कृति, अंग्रेजी सहित हिन्दी विषय पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक नहीं है। हालात यह है कि अंग्रेजी विषय के 1 शिक्षक के जिम्मे दोनों माध्यम के विद्यार्थी है। सबसे मुख्य बात यह है कि यहां पर पदस्थ शिक्षकों का कोई दोष नहीं जा रहा है। दरअसल जितने भी शिक्षक है वे लगातार मॉडल के दोनों माध्यमों में शिक्षकों की कमी पूर्ति करने सहित माध्यमिक विद्यालय की कक्षाओं को भी देख रहे है। आसान भाषा में स्कूल के परिदृश्य को समझा जाए तो कक्षा 6 से 12  तक संचालित होने वाली कक्षाओं में पढ़ाने के लिए महज 10 शिक्षक है।
पढ़ाई प्रभावित, स्कूल छोड़ा
शैक्षणिक सत्र को प्रारंभ हुए 1 माह हो चुका है। मॉडल स्कूल में पढ़ाई के साथ शिक्षकों की कमी का असर कक्षा के अनुशासन में दिख रहा है। सोमवार को शाला में शिक्षकों के ना होने के कारण कक्षाओं में कुछ बच्चे पढ़ने में व्यस्त थे तो कुछ बच्चे मौज-मस्ती में व्यस्त थे। कुछ कक्षाओं को छोड़कर परिसर में घूम रहे थे। ऐसे विद्यार्थियों को कुछ शिक्षकों ने डपटकर पुन: कक्षा में भेजा है। पढ़ाई प्रभावित होने का सबसे बड़ा उदाहरण सोमवार को दिखाई दिया।  प्रिंस बोड़ाना नाम के विद्यार्थी अपने पिता के साथ टीसी निकालने आए थे। प्रिंस ने बताया कि मॉडल स्कूल की पढ़ाई देखकर एडमिशन लिया था। वर्तमान की व्यवस्थाओं में पढ़ाई प्रभावित होती दिख रही है, इसलिए निजी स्कूल में प्रवेश ले रहे हैं। 
ेअतिथि शिक्षक भी नहीं रखे
मॉडल स्कूल में यूं तो स्थाई रूप से शिक्षकों की नियुक्ति होना चाहिए, लेकिन विद्यालय में नियुक्त शिक्षकों के साथ गेस्ट फेकल्टी के माध्यम से व्यवस्थाएं संचालित की जा रही थी। अनुबंध आधारित इस व्यवस्था में अनुबंध समाप्त होने के बाद नए टीचर्स अनुबंधित नहीं किए गए। जिसके कारण व्यवस्थाएं बिगड़ी है। सबसे मुख्य बात यह है कि वर्तमान में एडमिशन का भी दौर चल रहा है। इसमें अनुपात से अधिक एडमिशन भी किए जा रहे है। सवाल यह है कि प्रवेश से महत्वपूर्ण शैक्षणिक व्यवस्थाएं है। शिक्षकों की स्थाई नियुक्तियां मॉडल जैसी संस्थाओं में होना चाहिए।
इनका कहना है
यह बात सही है कि शिक्षकों की कमी है, किंतु हमने 20 जुलाई को एसएमडीसी की बैठक लेकर गेस्ट टीचर्स को रखने के लिए प्रस्ताव बना लिया है। 1 अगस्त से कक्षाओं में सुचारू रूप से पढ़ाई शुरु हो जाएगी। स्कूल में विद्यार्थियों को 3 दिन की छुट्टी शिक्षकों की कमी के कारण नहीं बल्कि ब्रिज कोर्स के प्रशिक्षण के संस्था में आयोजन के चलते की गई है। विद्यार्थियों को घर में पढ़ाई के लिए कहा गया है।
सोमला सिसौदिया, प्राचार्य मॉडल स्कूल धार
चित्र है- धार। कक्षा 12वीं में टीचर्स ना होने पर विद्यार्थी मिल-जुलकर एक-दूसरे को पढ़ाते हुए।
चित्र है 25धार7-


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