भोपाल~मप्र वक्फ बोर्ड चुनाव : राजभवन से लेकर मंत्रालय वल्लभ भवन, सीएम हाउस से लेकर पीएचक्यू जेएचक्यू तक के नुमाइंदे मताधिकार के हक से वंचित~~

नियमों की गलत व्याख्या से बने हालात, कई बड़े वक्फ छूटे, कई दागदार जुड़े

सैयद रिजवान अली / पत्रकार धार .9755786809~~

भोपाल। मप्र वक्फ बोर्ड चुनाव नियमों में अफसरों द्वारा गलत,मनमानी व्याख्या कर एक नई तहरीर लिखने की तरफ कदम आगे बढ़या जा रहा है। आगामी 30 जुलाई को होने वाले इस अहम चुनाव में प्रदेश के कई बड़े वक्फों के प्रतिनिधियों  को जानबूझकर मताधिकार से ही वंचित कर दिया गया। चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखे जाने वाले रजिस्ट्रड वक्फों में राजभवन से लेकर सीएम हाउस तक और मंत्रालाय वल्लभ भवन से लेकर पीएचक्यू तक की मस्जिदों की कमेटियां शामिल हैं। वक्फ बोर्ड सूत्रों का कहना है कि वक्फ अधिनियम 1995 के मुताबिक बोर्ड से पंजीकृत सभी मुतवल्लीयों को ओहदेदार चुनने का कानूनी अधिकार होता है। लेकिन इस चुनाव में भारतीय मतदाता अधिनियम का भी उल्लंघन हो रहा है  बताया जा रहा है कि नियमों की गलत व्याख्या के साथ बोर्ड के अफसरों द्वारा इस मतदान प्रक्रिया में महज उन्हीं मनपसंद वक्फों को शामिल किया जा रहा है, जिनकी सालाना आमदनी एक लाख रुपए से ज्यादा बताई गई  है। इस कथित नियम को भी और अधिक जटिल बनाते हुए 30 जुलाई को होने वाले चुनाव में सिर्फ ऐसे मुतावल्ली शामिल किए जा रहे हैं, जिन पर चंदा निगरानी की कोई राशि बाकी नहीं है। इस नियम का असर ये हुआ कि प्रदेशभर की सैंकड़ों वक्फ कमेटियों में से महज 126 मुतवल्लीयों को ही मताधिकार दिया गया है। यानी अमीरों को तो वोट देने का हक होगा मगर गरीबों को वंचित कर दिया गया है.

वोटर लिस्ट से छूट गए कई नामवर वक्फ..
सूत्रों का कहना कि नियमों की कथित नई व्याख्या ने राजभवन परिसर स्थित मस्जिद के जिम्मेदारों से लेकर सीएम हाउस के पास की मस्जिद के मुतवल्ली तक को मतदान से वंचित कर दिया है। इसी तरह म प्र विधानसभा, मंत्रालाय वल्लभ भवन और पीएचक्यू,जेएचक्यू परिसर में बनी मस्जिदों की कमेटियों के मुतावल्लियों को भी बोर्ड के ओहदेदार चुनाव से षड़यंत्रपूर्वक दूर रखा गया है। पुरानी और   नई ज़िला अदालत के करीब और सुल्तानिया इन्फेंट्री तथा 3ईएमई सेंटर की मस्जिदों की कमेटियां के नुमाइन्दों भी मतदान प्रक्रिया से बाहर ही रखा गया है। बोर्ड अफसरों की इस मनमानी को राजभवन, सीएम हाउस, मंत्रालय की प्रतिष्ठा को धुमिल करने का प्रयास निरूपित किया जा रहा है ..

इनके शामिल होने पर ऐतराज
मप्र वक्फ बोर्ड द्वारा मतदान के लिए जारी वोटर्स की  मुतावल्ली सूची में शामिल कई नामों पर भी आपत्ति जताई जा रही है। कहा जा रहा है कि इन कमेटियों के जिम्मेदारों पर आर्थिक अनियमितता के अलावा भ्रष्टाचार तथा आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। ऐसे में इन कमेटियों के वजूद को लेकर ही संशय है। और ऐसे हालात में इनके मतदान करने या मुतवल्ली मेंम्बर  चुनाव में भागीदारी होने को अवैधानिक बताया जा रहा है।

चुनाव की तारीख को लेकर भी मुश्किलें..
मप्र वक्फ बोर्ड ओहदेदारों के चुनाव के लिए 30 जुलाई की तारीख तय की गई है। लेकिन इस दिन इस्लामी नए साल की पहली तारीख होने की संभावना है। इसी दिन से मुहर्रम के राष्ट्रीय त्योहार की शुरुआत भी होना है। जिसके चलते प्रदेश भर से वोटिंग के लिए आने वाले मुतवल्लियों में शामिल अनेक मस्जिदों, इमामबाड़ों, दरगाहों , करबला और खानकाहों  के जिम्मेदारों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। प्रदेश के कई जिलों में मौजूद अकीदतमंद मुहर्रम माह में सफर करने से भी गुरेज रखते हैं। चुनाव की वजह से इन लोगों को अपने इस परम्परागत नियमों को तोड़कर घर से भी बाहर जाना पड़ सकता है।

अचानक बदला चुनाव स्थल
हालाँकी पूर्व में तय किए गए कार्यक्रम के मुताबिक वक्फ बोर्ड चुनाव चार इमली स्थित वन भवन में होना था। लेकिन इस जगह को अब बदल दिया गया है। अब चुनाव प्रक्रिया एयरपोर्ट रोड स्थित हज हाउस पर संपन्न कराई जाएगी। सुबह से देर शाम तक चलने वाली इस प्रक्रिया के तहत मुतवल्ली श्रेणी के मेंम्बर का चुनाव होगा। इसके बाद सांसद, विधायक और स्टेट बार काउंसिल के मेंम्बर के अलावा इस्लामिक धार्मिक उलेमा यानी काज़ी,इमाम,मुफ़ती, मुअल्लिंम  और सामाजिक श्रेणी के शासंन द्वारा नामांकित मेंम्बर मिलकर बोर्ड अध्यक्ष के रूप में किसी एक व्यक्ति के नाम का चयन करेंगे।


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