झाबुआ~देश और विदेश की सैकडो पत्रिकाओं~~





मे हजारों रचनाए हुई प्रकाशित आदिवासी~~





अंचल के महान साहित्य साधक डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ की~~





झाबुआ।मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचल झाबुआ के महान साहित्य साधक डॉ राम शंकर चंचल विगत ४० सालो से देश और विदेश की सैकडो पत्रिकाएं और समाचार पत्रों में लगातार अपनी कविता,कहानी, गीत गजल आदि साहित्य रचना के माध्यम से अद्भुत और उम्दा लेखन के माध्यम से लगातार हिन्दी साहित्य की सेवा कर रहे हे।





सचमुच यह बेहद आश्चर्य का विषय हैं कि आदिवासी अचल में रहकर साहित्य का सैकडो  देश और विदेश की पत्रिकाएं और समाचार पत्रों में ४० सालो से लगातार प्रकाशित हो रही है।  हिंदी सैकड़ो रचना और पत्रिका की अद्भुत प्रदर्शनी का विगत दिनों एक सुखद अहसास करता आयोजन उषाराज साहित्य अकादमी के तहत हुआ।





जो शहर के कई गणमान्य व्यक्तियों द्वारा और साहित्य प्रेमी  और साहित्यकारो द्वारा अवलोकन किया गया ।





आदरणीय डॉ रामशंकर चंचल ने कहा कि इतने लंबे समय से लगातार लिखते रहना और प्रकाशित होना सचमुच मेरे लिए भी आश्यर्च का विषय हैं। मे इसे माँ शारदा देवी की कृपा ही मानता हूँ जीवन में कितना बार ऐसा समय आया जब बहुत टुटा हूँ । मेरे साथ हुए लगातार हादसों ने बहुत तोड़ा है ,लेकिन आज मे जीने की आदत कल को भूल जाने की इस सोच ने मुझे बहुत साथ दिया। यह जीवन मंत्र मैंने मेरे यहाँ के आदिवासी अंचल के जीवन जीने वाले आदिवासी जन जीवन से मिला है।





आयोजित कार्यक्रम में सैकडो पत्रिकाएं ,समाचार पत्र और उनकी  कृतियां जिसको देख सभी ने बहुत बहुत बधाई  डॉ राम शंकर चंचल को दी। 




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