खबर का असर............ 


झाबुआसंजय जैन

गौरतलब है कि इसी विचार न्यूज वेब पोर्टल पर 5 जुलाई मंगलवार को* सामान बाजार कपड़े का थैला लेकर जाए * नामक शीर्षक से समाचार को प्रदर्शित कर प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया था। जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और तुरंत नगर पालिका झाबुआ द्वारा प्रतिबंधित सिंगल यूज पॉलीथिन को लेकर एक टीम का गठन किया गया। 100 माइक्रोन से कम छोटी पॉलीथीन तथा सिंगल यूज प्लास्टिक का निर्माण विक्रय एवं उपयोग व परिवहन पर रोक लगा देने सबंधी जन जागृति अभियान डोर टू डोर जाकर किया गया।
सयुक्त दल द्वारा चालानी कार्यवाही की जावेगी...........
नगर पालिका अधिकारी एलएस डोडिया द्वारा बताया गया कि इस सप्ताह पश्चात प्रदूषण विभाग एवं नगर पालिका के संयुक्त दल द्वारा चालानी कार्यवाही की जावेगी।
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..............खबर का असर............
गौरतलब है कि इसी विचार न्यूज वेब पोर्टल पर 23 जून गुरुवार को* प्राइवेट स्कूलों की किताबें और ड्रेस चुनिंदा  दुकानों पर * नामक शीर्षक से समाचार को प्रदर्शित कर प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया था। जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और  07 जुलाई को जिला शिक्षा अधिकारी ओपी बनडे के द्वारा रामा विकास खंड के अशासकीय विद्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया था। जिसमें स्नेह सदन मिशन स्कूल एवं महाराणा प्रताप कॉन्वेंट स्कूल कालीदेवी में बहुत सी अनियमितता पाई गई थी जिसमें कलेक्टर द्वारा पूर्व में दिए गए आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है था। सूचना बोर्ड पर गणवेश और पुस्तक विक्रेताओं की लिस्ट नही पाई गई थी।





 
मान्यता समाप्ति की कार्यवाही की जाएगी..............
जिला शिक्षा अधिकारी ओपी बनडे  द्वारा बताया गया कि संबंधित स्कूलों के खिलाफ  निर्देशों की अवहेलना करने हेतु सख्त कार्यवाही की जाएगी। कलेक्टर के निर्देशानुसार शासन शासकीय नियमो की अनदेखी कर मनमानी करने वाले विद्यालयों के निरीक्षण हेतु समस्त अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को निर्देशित किया गया है। जो विद्यालय मान्यता संबंधी पात्रता पुर्ण नहीं करते हो उनके खिलाफ़  मान्यता समाप्ति की कार्यवाही की जाएगी।
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क्यो आदेश सिर्फ  औपचारिकता बन कर रह जाता है.............???
झाबुआ। संजय जैन। गौरतलब है कि न्यूज वेब पोर्टल पर समाचार प्रदर्शित के बाद प्रशासन हरकत में तो आता है,लेकिन सिर्फ  खाना पूर्ति और दिखावे हेतु। कार्रवाई के नाम पर छोटे दुकानदार पर ही कार्रवाई की जाती है। लोगों का कहना है सरकार सिंगल यूज पॉलीथिन के निर्माताओं की फैक्ट्रियां ही बंद क्यो नही कर देती है....? बजाय के इतने लोगो पर नजर रखने के। वही दूसरी ओर कलेक्टर के आदेश को अधिकतर स्कूलों ने ताक पर रखा,साथ ही खुले आम आदेश की धज्जियां उड़ाने के बाद भी हर वर्ष की तरह सिर्फ  दिखावे के लिए छोटे कस्बे के स्कूलों का निरीक्षण किया गया। जबकि प्रभावी लोगों की स्कूलों का निरीक्षण करने में अधिकारी शायद हिम्मत ही नहीं जुटा पाते है या यह भी कह सकते है उनसे समय-समय पर कही उन्हें मिठाई तो नही मिल जाती है ...? और वे सब प्रभावी स्कूल संचालक साफ  कही बच निकलते तो नहीं है...?  मजेदार बात तो यह है कि कलेक्टर ने सख्त निर्देश जिला शिक्षा अधिकारी को दिए थे कि यदि अनियमितता मिलती है तो तुरंत ऐसे स्कूलों की मान्यता रद्द करे। इस तरह की दिखावे की कारवाई से तो यही लगता है कि दोबारा फिर से कलेक्टर के निर्देश सिर्फ  औपचारिकता बन कर रह गया है।  
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