*बाकानेर~कुर्बानी का त्यौहार ईद-उल-अज़हा देशभर में सादगी और अकीदत के साथ मनाया~

बाकानेर सैयद अखलाक अली~~

देश दुनिया और प्रदेश के साथ धार जिले के मनावर तहसील के विभिन्न ग्रामों में सादगी के साथ ईद उल अजहा का त्यौहार मनाया गया ।इस्लाम के बड़े त्यौहारों में से एक ईद-उल-अज़हा जिसे बकरा-ईद भी कहते है आज देश भर में सादगी और अकीदत के साथ मनाया जा रहा हैं।

इस्लाम के जनक और आखिरी पैगम्बर हज़रत मोहम्मद (सल्ल.) ने अपने सहाबा (अनुयायियों) को कुर्बानी का महत्व बताकर क़ुरआन के हवाले से इर्शाद फरमाया की आज के दिन अल्लाह के नज़दीक सबसे पसंदीदा अमल कुर्बानी करना है और ये तुम्हारे बाप हज़रत इब्राहिम अलै. की सुन्नत है जिसे अल्लाह ने कयामत तक हर साहिबे-हैसियत पर फ़र्ज़ किया है।

इसके बाद अल्लाह के नबी ने तफ्सील से अपने सहाबा (अनुयायियों) को क़ुरआन में नाज़िल किया गया किस्सा सुनाते हुए इर्शाद फरमाया की हज़रत इब्राहिम अलै. अल्लाह के सबसे मेहबूब और पसंदीदा नबियों में से एक नबी थे और हज़रत इब्राहिम अलै. पर अल्लाह ने बहुत सी आज़माइशें डाली और उन आजमाइशों को इब्राहिम अलै. ने बड़ी हिम्मत और खुशी के साथ अल्लाह की रज़ा के लिए बर्दाश्त किया और उन आजमाइशों में बन्दगी का पूरा हक अदा करके दिखाया। एक रात हज़रत इब्राहिम अलै. ने ख्वाब देखा की अल्लाह उनसे इर्शाद फरमा रहे है ऐ इब्राहिम अपनी मेहबूब चीज़ हमारे लिए कुर्बान करो तो इब्राहिम अलै. ने 100 ऊंट की कुर्बानी की, इसके बाद फिर ख्वाब देखा अल्लाह फिर इर्शाद फरमा रहे है ऐ इब्राहिम अपनी सबसे ज़्यादा मेहबूब चीज़ को हमारे लिए कुर्बान करो। इब्राहिम अलै. समझ गए कि अल्लाह क्या चाहते है फिर अपने बेटे हज़रत इस्माईल अलै. से कहा की बेटे मैने एक ख्वाब देखा है जिसमे में तुमको ज़िब्ह कर रहा हूँ बाप की बात सुनकर इस्माईल अलै. ने कहा अब्बाजान कर डालिए जिसका आपको अल्लाह ने हुक्म दिया है इंशाअल्लाह आप मुझे सब्र करने वालो में से पाएंगे। इसके बाद हज़रत इब्राहीम अलै. अपने बेटे इस्माईल को लेकर अरब के एक शहर मिना में गए। इस्माईल अलै. ने अपने बाप  इब्राहिम अलै. से कहा अब्ब्जान आप अपनी आँखों पर पट्टी बांध लीजिए कहीं ऐसा ना की औलाद की मोहब्बत अल्लाह के हुक्म पर गालिब आ जाए। इसके बाद इब्राहिम अलै. ने इस्माईल अलै. को लिटाया और उनके गले पर छुरी चलाने लगे। ऊपर आसमान में फरिश्तों में कोहराम मच गया कि कोई बाप अपने बेटे पर छुरी कैसे चला सकता हैं। इधर अल्लाह ने छुरी को हुक्म देकर उसके काटने की सिफत (खूबी) को रोक दिया। यहाँ इब्राहिम अलै. गले पर छुरी चला रहे है लेकिन छुरी चलने का नाम नही ले रही। इसके बाद अल्लाह ने जिब्रील अलै. को हुक्म दिया कि जल्दी से जन्नत से एक जानवर लेकर जाओ और इस्माईल को अलग कर दो। चुनाँचे जिब्रील अलै. जन्नत से दुम्बा लेकर गए इस्माईल अलै. को अलग करके उनकी जगह दुम्बा रख दिया और इस तरह हज़रत इब्राहिम अलै. के हाथों जानवर की कुर्बानी हुई। फिर अल्लाह ने इर्शाद फरमाया ऐ इब्राहिम तूने अपने ख्वाब को सच्चा कर दिखाया।

इसके बाद सहाबा ने सवाल किया ऐ अल्लाह के रसूल ये कुर्बानी क्या है और इसको करके हमे क्या मिलेगा। तो आप (सल्ल.) ने इर्शाद फरमाया ये तुम्हारे बाप हज़रत इब्राहिम अलै. की सुन्नत है और कुर्बानी करने से तुम्हे जानवर के हर बाल के बदले में एक नेकी मिलेगी। सहाबा ने फिर सवाल किया अगर जानवर ऊन वाला हो तो, आप (सल्ल.) ने इर्शाद फरमाया हर ऊन के बदले एक नेकी मिलेगी। ईद उल अजहा के खुशी के मौके पर वरिष्ठ पत्रकार नौशाद कुरेशी, असलम कुरेशी ,खान अशु, सैयद रिजवान अली अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन सैयद अखलाक अली के साथसभी समाज के लोगों ने एक दूसरे को मिलकर शुभकामनाएं बधाई दिली मुबारकबाद दी ।


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