झाबुआ~वर्तमान युग की बदलती हुई परिस्थितियों में  समण श्रेणी क्या है~~





झाबुआ।तेरापंथ समाज के वरिष्ठ सुश्रावक और संरक्षक ताराचंद गादीया ने बताया कि श्वेतांबर परंपरा में 18वीं शताब्दी में महान क्रांतिकारी आचार्य भिक्षु ने तेरापंथ संप्रदाय की स्थापना की । उनकी परंपरा मे नोवे आचार्य श्री तुलसी हुए । जिन्होंने जैन धर्म को विश्वव्यापी बनाने की दिशा में अनेक क्रांतिकारी कार्य किए । उन कार्यों में एक है समण श्रेणी की स्थापना ।





 वर्तमान युग की बदलती हुई परिस्थितियों में एक नए अध्याय की आवश्यकता थी । गुरुदेव तुलसी ने अपनी साधना और चिंतन से जैन धर्म को भारत में ही नहीं वरन पूरे विश्व में फैला दिया । गुरुदेव तुलसी ने इस हेतु समण श्रेणी का निर्माण किया और उन्हें भारत के कोने कोने में भेजा । भारत से बाहर विदेश की धरती पर भेजकर उन्होंने जैन धर्म को व्यापक बनाया । 





साधु-साध्वी पांच महाव्रत का पालन करते हैं तथा वाहनों का उपयोग नहीं कर सकते हैं इस बात को भी ध्यान में रखते हुए गुरुदेव तुलसी ने समण श्रेणी का निर्माण किया । जो साधु की तरफ पांच महाव्रत तो पालते है लेकिन धर्म के प्रचार प्रसार और धर्म के सिद्धांतों को जन जन तक पहुंचाने के लिए वाहनों का प्रयोग कर सकते हैं । गुरुदेव तुलसी की दूरदृष्टि का यह परिणाम है कि आज समण श्रेणी देश विदेश में जैन धर्म का व्यापक प्रचार प्रसार कर रहे हैं ।तथा जैनधर्म के सिद्धांतों को जन जन तक पहुंचा रहे हैं । वही समणी जी की विदेश यात्रा के दोरान भारत के बाहर विदेशों में रहने वाले लाखों जैन और विदेशी लोगों ने जैन धर्म को समझा और अपनाया हैं उसी का परिणाम है कि आज अमेरिका जैसे देश में लगभग 40 विश्वविद्यालयो मे जैनधर्म का अध्ययन कराने हेतु प्रारंभ हो चुके है




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