धार~फिसलन भरी डगर...... कठिन हुआ खेल प्रशिक्षण केन्द्र जाने का सफर ~~

अधूरे एसपीडीए ट्रेक-ग्राउंड निर्माण से दिक्कतें बढ़ी, कीचड़ से शाला जाना हुआ मुश्किल ~~

धार ( डाॅ. अशोक शास्त्री )।

एसपीडीए खेल मैदान इन दिनों खेल प्रशिक्षण लेने वाले विद्यार्थियों के लिए परेशानी भरा सफर हो गया है। खेल प्रशिक्षण को लेकर कोई दिक्कतें नहीं है। विद्यार्थियों की दिक्कतें मैदान में स्थित प्रशिक्षण केन्द्र तक पहुंचने की हो गई है। दरअसल मुख्य सड़क से केन्द्र तक  जाने का मार्ग कच्चा और कीचड़युक्त हो गया है। मानसून का दौर जारी है। रिमझिम बारिश में भी खेल शाला तक का सफर फिसलन भरा हो गया है। बच्चें शाला तक जब पहुंच रहे हैं तो उनके जूते कीचड़ में सन रहे है। कमोबेश इसी समस्या का सामना खेल शिक्षकों को भी उठाना पड़ रहा है। कई मर्तबा जूते-चप्पल कीचड़  में धंस जाते है।
सैकड़ों विद्यार्थी आते है
जिले में खेल गतिविधियों के लिए सीमित स्थान और सीमित प्रशिक्षण संस्थाएं मौजूद है। इनमें एसपीडीए खेल मैदान और प्रशिक्षण केन्द्र है। वर्तमान में इस भवन में ताईक्वांडों और कराते की गतिविधियां संचालित होती है। सुबह-शाम के सत्रों में बड़े पैमाने पर विद्यार्थी खेल प्रशिक्षण लेने के लिए नियमित रूप से आते है। खेल में नियमित प्रेक्टिस का बेहद महत्व है। यही कारण है कि कीचड़ युक्त मार्ग होने के बावजूद पालक अपने बच्चें को लेकर आते है। कई लोगों ने मोटर साइकिलों से छोड़ने की कोशिश की, लेकिन फिसलन के कारण रिस्क लेने की बजाय फिसलन भरी डगर पर बच्चों को भेज देते है।
कब होगा निर्माण पूरा
एसपीडीए खेल मैदान की हालत भी बेहद खराब है। यहां पर हॉकी और फुटबॉल जैसी खेल गतिविधियां होती थी और खिलाड़ी प्रेक्टिस भी करते थे।  पूर्व के कलेक्टरों ने सीएसआर फंड के माध्यम से इस ग्राउंड को बेहतर बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार की थी। इसका क्रियान्वयन भी शुरु हो गया था, किंतु पिछले कई समय से यहां पर काम कछुआ गति से चल रहा है। नतीजे में कार्य अपूर्ण होने के कारण खेल मैदान खिलाड़ियों के काम नहीं आ पा रहा है। वहीं निर्माण कार्य के चलते खेल प्रशिक्षण शाला तक का मार्ग भी कीचड़ युक्त और कठिन हो गया है।
छोटे से प्रयास से होगी राहत
नन्हें   खिलाड़ियों को प्रशिक्षण केन्द्र तक जाने से हो रही परेशानी से छोटे-छोटे प्रयासों से निजात मिल सकती है, लेकिन सवाल यह है कि बगैर शिकायत और आवाज उठाए यह काम कौन करेगा। दरअसल मुख्य मार्ग से प्रशिक्षण केन्द्र तक फौरी राहत के लिए मानसून को देखते हुए मोटी मुरम और चूरी को बिछाया जा सकता है। चंद हजारों रुपए का खर्चा है, लेकिन नन्हें खिलाड़ियों की राह सरल हो जाएगी। 


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