धार~खंगाली जा रही है फाईलें, पूरक उत्तीर्णों को स्कूल से निकालने के ढूंढ रहे हैं आदेश ~~

कलेक्टर ने गंभीरता से लिया उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बच्चों को शाला से निकालने का मामला ~~

जनसुनवाई में समस्या बताने पहुंचे ‘विद्यार्थी’, शहर कांग्रेस ने भी बच्चों को बाहर करने का किया विरोध ~~

धार ( डाॅ. अशोक शास्त्री )।

कक्षा 12वीं का वार्षिक रिजल्ट बेहतर बनाने के लिए 11वीं के पूरक उत्तीर्ण विद्यार्थियों को कमजोर प्रदर्शन के आधार पर धार ‘उत्कृष्ट विद्यालय’ से टीसी देकर बाहर निकाला जा रहा है। इस तरह का मामला सामने आने के बाद शाला प्रबंधन ने नियमों का हवाला देकर स्वयं का बचाव किया है, किंतु मामले को धार कलेक्टर डॉ पंकज जैन ने गंभीरता से लिया है। सूत्रों की माने तो कलेक्टर द्वारा उत्कृष्ट विद्यालय संबंधित फाईलें खंगाली जा रही है। उस आदेश को भी देखा जा रहा है जिसके आधार पर अभी तक पूरक उत्तीर्ण विद्यार्थियों को शाला से बाहर किया जा रहा था। इधर अभी भी दर्जनों विद्यार्थियों ने स्कूल द्वारा टीसी थमाए जाने के डर से स्कूल से दूरियां बना रखी है। शैक्षणिक सत्र प्रारंभ हो गया है, लेकिन यह बच्चे ना दूसरे स्कूल में प्रवेश ले रहे हैं और ना ही अपनी शाला में कक्षा 12वीं की नियमित पढ़ाई में शामिल हो पा रहे हैं।
12वीं में प्रवेश का नियम नहीं
उत्कृष्ट विद्यालय में कक्षा 11वीं के पूरक उत्तीर्ण करीब 40 के लगभग बच्चों को टीसी देने की प्रक्रिया जारी है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी टीसी लेकर दूसरे स्कूल में प्रवेश के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। इधर उत्कृष्ट विद्यालय में दोहरी दिक्कतें खड़ी हो गई है। दरअसल कक्षा 12वीं में नवीन प्रवेश प्रक्रिया नहीं की जाती है। ऐसी स्थिति में करीब 40 के लगभग बच्चों को स्कूल से बाहर निकालने की प्रक्रिया के बाद कक्षा 12वीं में सीटें रिक्त होने की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। कक्षा 11वीं के पूरक उत्तीर्ण विद्यार्थियों को यदि शाला से नहीं निकाला जाता है तो कक्षा 12वीं में भी कोई व्यवधान उत्पन्न नहीं होगा।
अधिकारों की भी हो रही जांच
पिछले कई सालों से उत्कृष्ट विद्यालय में इस तरह से ही बच्चों को निकाला जा रहा था। इस वर्ष शाला से निकाले जा रहे बच्चों के स्वर मुखर होने के बाद मामला सुर्खियों में आया है। इसके बाद किन आदेशों के तहत इस तरह की प्रक्रिया को लागू किया गया था। उसकी पड़ताल हो रही है। सूत्रों की माने तो विद्यालय प्रबंधन समिति का दशकों पुराना विषय से संबंधित ठहराव-प्रस्ताव को आधार बताया जा रहा है। यदि इस आधार पर ही बच्चों को निकालने की प्रक्रिया चल रही है तो संभवत: कलेक्टर पंकज जैन के कार्यकाल में इस समस्या का निराकरण संभव है। दरअसल विद्यालय प्रबंधन समिति का किसी एक वर्ष का प्रस्ताव आजीवन शाला पर लागू नहीं होता है। इसके अतिरिक्त समिति को प्रवेश और स्थानांतरण नीति तय करने का अधिकार नहीं है। यह सब स्कूली शिक्षा विभाग और राज्य शासन के अधीन की प्रक्रिया है।
बॉक्स-1
पालकों से पूछा पहले नियम की जानकारी नहीं थी
कलेक्टर की जनसुनवाई में विद्यार्थियों ने आवेदन देकर मदद की गुहार लगाई है। इस दौरान कुछ पालक भी अपने बच्चों के साथ पहुंचे थे। कलेक्टर ने पालकों से पूछा कि क्या उन्हें इस तरह के नियमों के जानकारी नहीं थी। इसके बाद उन्होंने विद्यार्थियों का आवेदन सहायक आयुक्त विभाग के सहायक संचालक को प्रेषित किया है। इस मामले में कई विद्यार्थियों ने सीएम हेल्पलाईन में शिकायत भी दर्ज कराई है। वर्तमान में करीब 10-15 विद्यार्थी ही अपने प्रवेश को यथावत रखने के लिए संघर्ष कर रहे है। अधिकांश ने नवीन स्कूलों का चयन कर लिया है।
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शहर कांग्रेस ने विद्यार्थियों के समर्थन में सौंपा आवेदन
विद्यार्थियों से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर शहर कांग्रेस अध्यक्ष जसबीरसिंह   छाबड़ा टोनी भी सक्रिय हो गए हैं। मंगलवार को उन्होंने कलेक्टर को आवेदन सौंपा है। जिसमें बच्चों को बगैर नियम के बेजा स्कूल से निकालने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की और विद्यार्थियों की मदद करने की मांग कलेक्टर से की है। इधर आवेदन सौंपने के दौरान कलेक्टर ने पूछा कि 20 साल से इस तरह से प्रक्रिया चल रही है। आपको अभी पता चला। इसके बाद उन्होंने मुस्कुराते हुए आवेदन संयुक्त संचालक सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग को दे दिया।
चित्र है 26धार1 व 3-


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