झाबुआ~हम परमात्मा के पास शुद्ध काया और वचन से तो जाते हैं किंतु शुद्ध मन से नही जाते है, इस कारण से हम परमात्मा की निर्मलता को देख नहीं पा रहे है - आचार्य श्री नित्यसेन सूरीश्वर जी मसा.~~

चातुर्मास में ग्रंथ और शास्त्र की शोभा यात्रा निकली ...............

झाबुआ। मनुष्य के लिये चातुर्मास मे आराधना अत्यंत आवश्यक बतयी है, साथ ही परमात्मा के वाणी को श्रवण करना भी आवश्यक बताया गया है । जब तक व्यक्ति योग का उपयोग नहीं करता वह कितनी भी प्रवृत्ति करे निष्फल होती है । जीवन को जीवंत रखने के लिये , भ्रमण को समाप्त करने के लिये क्रियाएं करना भी आवश्यक है । वर्तमान में हमने केवल संसार की प्रवृत्ति को ही आवश्यक मान लिया है जबकि निवृत्ति मूलक प्रवृत्ति मोक्ष की और ले जा सकती हे ! ’’योग सार ’’ ग्रंथ हमें संसार के बंधन से कैसे निवृत्ति मिले यह समझाता है । 

 मानव जीवन आत्म कल्याण के लिये मिला.............


आचार्य श्री ने कहा कि  मानव जीवन आत्म कल्याण के लिये मिला है । मोक्ष के द्वार अभी भी खुले हैं , बंद नहीं हुए है, आवश्यकता हेै कषायों से निवृत्त होना । हमारी प्रवृत्ति संसार बढाने की है । यह ग्रंथ संसार से मुक्ति कैसे मिले...? यह ज्ञान देता है ।

  परमात्मा का स्वरूप केैसा है....?..................  


 इस अवसर पर मुनिराज़ निपुणरत्न विजयजी मसा ने योग सार ग्रंथ के बारे मे बताया की इस ग्रंथ मे 5 विभाग हेै जिसमे कुल 206 गाथा का वर्णन आता है । प्रथम विभाग की चर्चा करते हुए मुनिश्री ने कहा कि  परमात्मा का स्वरूप केैसा है....? यह हमने कभी समझा ही नहीं है । हम परमात्मा के पास शुध्द काया और वचन से तो जाते हैे किंतु शुध्द मन से नही जाते हेै, इस कारण से हम परमात्मा की निर्मलता को देख नही पा रहे है । मन पर नियंत्रण सबसे कठिन होता हैे वचन और काया का नियंत्रण तो हो सकता है । आवश्यकता मन को आत्मा के साथ जोड़ने की हैे । आपने कहा कि  इस ग्रंथ के माध्यम से समता भाव हेतु क्या सत्व हमारे पास होना चाहिए समझ सकते है । इस महान ग्रंथ के लेखक ने अपना नाम नहीं दिया इसमें यह संदेश मिलता है कि कितना भी बड़ा काम करे, नाम की  अपेक्षा नही रखे । आपने कहा कि हमारे मूल आत्मस्वभाव को खंडित करने में बाह्य अभ्यंतर कारण जिसमे राग , द्वेष और एकान्तर भाव होते हैं और योग सार ग्रंथ इन सबसे आत्मरक्षा करता है ।  धर्म श्रवण मे रुचि होने से जीव सम्यक दर्शन की और आगे बढ़ता हैे और अरुचि और देरी करने से जीव स्वयं अपनी आत्मा का अनादर करता हेै ।



ग्रंथ और शास्त्र की शोभा यात्रा निकली -
धर्म सभा के पूर्व आज शुक्रवार को योग सार ग्रंथ और जम्बू कुमार स्वामी शास्त्र की लाभार्थी परिवार कमलेश कोठारी और प्रदीप बस सर्विस परिवार के निवास से शोभायात्रा निकली । पौषध हाल मे दोनो ग्रंथ और शास्त्र विधि पूर्वक आचार्य श्री को वोहराया गया । इस अवसर पर साधु -साध्वी मंडल भी उपस्थित थे । सभा का संचालन डा प्रदीप संघवी ने किया


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