झाबुआ~जिले मंे अधिकांशतः निजी स्कूल संचालक छात्र-छात्राओं की यूनिफार्म एवं स्टेशनरी सामग्रीयों के लिए एक ही दुकान निर्धारित कर दोहरा लाभ अर्जित कर रहे~~


 जयस ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर ऐसे स्कूल संचालकों और दुकानदारों पर कार्रवाई की मांग की~~

झाबुआ। जिले में नया शैक्षणिक सत्र आरंभ होने के साथ ही निजी स्कूल संचालकों की भी चांदी-चांदी होने लगी है। एक तरफ जहां ऐसे अधिक स्कूल संचालक बच्चों के अभिभावकांे से नए सत्र में शासन-प्रशासन की गाईड लाईन का पालन किए बगैर एडमिशन के नाम पर मोटी फीस वसूल रहे है तो वहीं स्कूल गणवेश, जूते-मोजे, टाई, बेल्ट और सभी स्टेशनरी सामग्रीयों के लिए भी अपनी एक दुकान चिन्हीत कर उसी दुकान पर बच्चों के अभिभावकों को भेजकर कमशीन का भी धंधा कर रहे है। ऐसे में निर्धन एवं मध्यम वर्ग के अभिभावकांे को इन संचालकांे को मनमानी फीस देने के साथ निर्धारित की गई दुकान से ही मनमाने पैसे देकर सभी सामग्रीयां खरीदने को भी विवश होना पड़ रहा है।
बच्चों के अभिभावकों की इन्हीं समस्याओं को लेकर जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) की जिला इकाई ने जिलाध्यक्ष विजय डामोर के नेतृत्व में 12 जुलाई, मंगलवार को दोपहर कलेक्टोरेट पहुंचकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर शिकायत दर्ज करवाई है। जिसमें ऐसे स्कूल प्रबंधकों और दुकानदारों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की मांग की है। जयस द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि झाबुआ शहर सहित संपूर्ण जिले में स्थित अधिकांश प्राइवेट स्कूल के संचालक जून माह से आरंभ हुए शैक्षणिक सत्र के बाद से ही विद्यालयों में नवीन प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों पर प्रवेश के नाम पर मनमानी फीस देने के लिए दबाव बना रहे है। साथ ही अपने द्वारा निर्धारित द्वार की गई दुकानों से यूनिफार्म, स्टेशनरी सामग्रियां खरीदने के लिए भी बाध्य कर रहे है। इस तरह की शिकायत पिछले कुछ दिनों से लगातार जागरूक अभिभावकों द्वारा भी प्रशासनिक स्तर पर की जा रहंी है, लेकिन अब तक ऐसे स्कूलों के संचालकों और प्रबंधकों पर कार्रवाई नहीं की गई है, जो शासन-प्रशासन के नियमों का खुला उल्लंघन कर रहे है।  
दाम भी अधिक और मुनाफा भी दुगुना
ऐसे निजी स्कूल संचालक एक ओर तो जहां प्रवेश फीस में सरकारी नियमांे की धज्जियां उड़ाते हुए अपने अनुसार फीस ले रहे और स्कूल प्रबंधन की ओर से निर्धारित की गई कपड़े और स्टेशनरी सामग्री दुकाने से अभिभावकों से यूनिफार्म और स्टेशनरी सामग्रीयां खरीदवाने से दुकानदार इन्हें अधिक दाम पर यह सामग्रीयां बचेने के साथ मुनाफा भी दुगुना अर्जित कर रहे है। इन पर कार्रवाई करने के प्रति जवाबदार शिक्षा विभाग एवं आदिवासी विकास विकास विभाग तथा शिक्षाविद अधिकारी भी आंखें मूंदकर बैठे हुए है।
रूपकली एंपोरियम की शिकायत दर्ज करवाई....................
जयस द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में झाबुआ शहर अंतर्गत आने वाले अधिकांश प्रायवेट स्कूल में पढ़ने वाले ंबच्चों को विद्य़ालय के प्रबंधन द्वारा स्कूल यूनिफॉर्म क्रय करने के लिए रूपकली एंपोरियम नामक दुकान पर जाने के लिए अभिभावकों को बाध्य किया जा रहा है। जिसके संचालक अशोक भंडारी द्वारा सभी प्राइवेट स्कूलों के यूनिफॉर्म, जूते उनकी दुकान पर ही उपलब्ध होने से बच्चों के अभिभावक एवं परिजनों से मनमाने पैसे वसूले जा रहे है। जिस पर पालकों द्वारा आपत्ति लेने पर दुकानदार द्वारा दबंगई से कहा जाता है कि लेना हो तो लो, नहंी तो मत लो। ऐसे में अभिभावक भी शहर में अन्य दुकानों पर संबंधित स्कूल की यूनिफार्म और अन्य सामग्रीयां नहीं मिलने से उन्हें महंगे दामांे पर भी यह सामग्रीयां खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस बीच सबसे अधिक परेशानी निर्धन एवं मध्यम वर्ग के परिवार के लोगों पर पड़ रहा है। महंगाई और मंदी के बीच एक तरफ परिवार जैसे-तैसे चल पा रहा है, तो स्कूल प्रबंधक मनमानी स्कूल फीस भरवाकर तथा गणवेश और स्टेशनरी सामग्रीयां भी मनमाने दामांे में खरीदने को मजबूर कर रहे है।
तत्काल कार्रवाई की मांग......................
जयस द्वारा इसको लेकर जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में ऐसे स्कूल संचालकों एवं फर्म रूपकली एंपोरियम के अलावा ऐसी अन्य यूनिफॉर्म व्यापारी और स्टेशनरी के विक्रेताओं, जहां मिलीभगत और कमीशन का खेल चल रहा है, इनके खिलाफ जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई की मांग की है, अन्यथा उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दी गई है। ज्ञापन सौंपते समय जयस के कल्याणपुरा अध्यक्ष मुकेश गुंडिया, संजय भूरिया, मथियास निनामा, सुनील भूरिया, अल्पेश निनामा आदि उपस्थित थे।


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