भोपाल~सरकार की मंशा को धता : करोड़ों खर्च लगे सागौन पेड़ों का कौड़ी के मोल हो रहा सौदा~~

अफसरों की निगरानी में काटे जा रहे जंगल, बना दिए खेत~~

भोपालसैयद रिजवान अली~~

सरकार ने सागौन रक्षण के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए। उनके विस्तार और विकास के लिए बड़ा अमला भी तैनात किया। लेकिन "बागड़ ही खेत खा रही है..." की कहावत को चरितार्थ करते हुए अफसरों ने ही सागौन जंगलों का सौदा कर दिया। हालात बिगड़ते हुए जंगलों के स्थान पर मैदान की तस्वीर बनने लगी है। छोटे फायदे के लिए बड़े नुकसान पर जुटे ग्रामीणों को रोकने टोकने वाला वन विभाग का अमला खामोश जेब गरमाई में जुट गया है।
मामला धार जिले के उमरबन विकासखंड के हैं। जहां वन अफसरों की मिलीभगत से जंगल से लगातार सागौन के पेड़ काटकर खेती की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि धार ज़िले के  लावणी  कक्ष क्रमांक  243/244/246/245 जंगल अंदर ही अंदर खोखले होते जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि जंगलों में अवैध तरीके से सागौन के पेड़ों को काटकर गांव के लोग खेती कर रहे हैं।

दो गुट में बंटे ग्रामीण
जंगल से सागौन पेड़ों की कटाई को लेकर गांव के लोगों में दो अलग-अलग भाग हो गए हैं। जिसके कारण गांव के कुछ लोगों ने  वन विभाग के उच्च अधिकारियों को शिकायत करके अवैध तरीके से काटे जा रहे सगौन के पेड़ों पर अंकुश लगाने की मांग की है। गांव के लोगों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि गांव के ही कुछ परिवार जंगल में सागौन के पेड़ों को काटकर धान की खेती कर रहे हैं।

अफसरों की आंख मुन्दाई
सूत्रों का कहना है कि स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों को सागौन कटाई की जानकारी है। लेकिन इस तरह अवैध तरीके से सागौन के पेड़ों को काटकर वन भूमि पर अतिक्रमण कर खेती करने वाले लोगों पर विभाग की ओर से किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की जा रही है।

जिम्मेदारी से बच रहे अधिकारी
वन विभाग के कई जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि जिस स्थान पर सागौन के पेड़ काटकर धान की फसल लगाई जा रही है, वह क्षेत्र उत्तर वन परिक्षेत्र डिवीजन में नहीं आता है। इस परियोजना को केंद्र और प्रदेश सरकार की संयुक्त योजना से संचालित किया जाता है, लेकिन विगत लंबे समय से लगातार इस क्षेत्र में सागौन के पेड़ों को काटकर जंगल को खेती में बदलने का काम किया जा रहा है। इससे बीट लावणी के जंगल में लंबे समय से सागौन माफिया सक्रिय हैं। शिकायतों को लेकर
एसडीओ वन विभाग श्री संतोष लगातार आश्वस्त कर रहे हैं कि मामले की जांच के लिए जल्दी ही टीम भेजी जाएगी, लेकिन उनका आश्वासन झूठा ही साबित हो रहा है।
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