धार~23 सर्पो की वन विभाग ने करवाई सपेरों से ‘मुक्ति’, वन में छोड़ा ~~

धार ( डाॅ. अशोक शास्त्री )।

मंगलवार को नागपंचमी पर्व पर  वन विभाग द्वारा सर्पों को सपेरो से छुड़ाने हेतु धार शहर में अभियान चलाया गया। उप वनमंडलाधिकारी धार संतोश कुमार रनशोरे के निर्देश पर वन विभाग की टीमों ने यह कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत 23 सांपों जिसमें कोबरा प्रजाति के 16 और 7 घोड़ा पछाड़ को मुक्त करवाकर वनों में छोड़ा गया है। प्रशिक्षु वन क्षेत्रपाल अमितेष पंवार के नेतृत्व में टीम के वनपाल वासुदेव वर्मा,  राजेश पटेल (वनरक्षक),  अनिल हरोड (वनरक्षक) ने यह कार्रवाई की। इसके तहत टीम सुबह से ही शहर के रहवासी क्षेत्रों में भ्रमण कर रही थी। लोगों को समझाईश दी गई कि सर्प को दूध ना पिलाएं। सर्प पूजा का अर्थ उन्हें पकड़कर परेशान करना नहीं है। कार्रवाई में एनजीओ संचालिका सुश्री विजया शर्मा ने भी जनजागरूकता में भूमिका निभाई। 
सजा का प्रावधान है
वन परिक्षेत्राधिकारी ने बताया गया की सर्पों को पकड़ना, प्रदर्शन करना वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9 के तहत वन्यप्राणी का शिकार माना जाता है। जिसके लिए सजा का प्रावधान है। विज्ञान के अनुसार सर्प दूध को नहीं पचा सकते, क्योंकि सर्प सरीसृप वर्ग में आते है जिनका पाचन तंत्र इतना विकसित नही होता है कि वे दूध पचा सकें। सर्पों को दूध पिलाने से इन्हें फेफड़े का संक्रमण हो जाता है और उनकी मृत्यु हो जाती है। इसलिए आस्था और श्रद्धा के इस पर्व पर एक मूक प्रणि की जान न लें।


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