*खेतिया~खानदेश की कुलस्वामिनी देवी मां कानबाई उत्सव पर विशाल शोभायात्रा* ~~

खेतिया से राजेश नाहर~~

खेतिया... खानदेश का परंपरागत सांस्कृतिक व पारिवारिक  एकता का पर्व मा कानबाई उत्सव कल रविवार माताजी की प्रतिमाओं की स्थापना के साथ प्रारंभ हुआ,श्रद्धालुओ ने गाजे बाजे के साथ माता जी की प्रतिमा अपने घरों पर स्थापित किया। खानदेश का यह पर्व मां कानबाई उत्सव पर दूर-दूर से परिवार इस उत्सव में हिस्सा लेने के लिए शहर पधारे है,शहर में लगभग 350 से 400 स्थानों पर माता जी की प्रतिमा स्थापित की गयी परिवार कुटुंब के साथ मनाए जाने वाले इस उत्सव पर परिजन दूर-दूर से खेतिया पहुंचे  रात जागरण कर पूरी रात माता की आराधना की।
आज सुबह परंपरागत तरीके से  विसर्जन जुलूस निकालकर नम आँखों से माताजी को बिदाई दी।इतनी बड़ी संख्या में प्रतिमाओं की स्थापना के साथ  भव्य चलसमारोह में लगभग 50,000 से अधिक श्रद्धालु ने अपने-अपने परिवारों में पहुंचें कर  माता को शीश नवाकर विदाई दी।खानदेश का यह सांस्कृतिक पर्व अति उल्लास के साथ आज सम्पन्न हुआ।माँ कानबाई पर्व खानदेश का बड़ा धार्मिक व सांस्कृतिक पर्व है,जो पूरे कुटुंब के साथ परम्परा का निर्वहन करते मनाया जाता है।निकाली शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह बहुत अधिक रहा,जहाँ महिलाएं माताजी के समक्ष फुगड़ी नृत्य करते दिखाई दी वही युवा खानादेशी संगीत पर बने माँ कानबाई के गीतों पर नृत्य करते रहे।विसर्जन स्थल पहुंचने से पूर्व श्रद्धालुओं ने माताजी की प्रतिमाओं के साथ जाकर सेंधवा रोड़ पर बने कानबाई माताजी के मंदिर पर दर्शन किये,, आज शहर के हर गली चौराहे पर माताजी की शोभायात्रा ही नज़र आ रही थी जहाँ आमने सामने आने पर माताजी की परस्पर भेंट व बिदाई के साथ कानबाई मात की जय का जयघोष सुनाई देता रहा।विसर्जन स्थल हनुमानजी मंदिर के निकट लगातार भीड़ बनी रही,,माताजी को बिदाई देते समय श्रद्धालुओं की आँखे नम हुई,,शहर के पेयजल वितरकों ने जगह जगह पर पेयजल हेतु प्रबन्ध किये।मालवा निमाड़ में मनाए जाने वाले गणगौर पर्व के अनुरूप ही यह पर्व मनाया जाता है,परिवार कुटुंब एक होकर देवी माँ की आराधना करते है।नप के चल रहे निर्माण कार्य के चलते आज परम्परगत शोभायात्रामार्ग परिवर्तन करने से विवाद की स्थिति बनी वही लोगो मे नगर पंचायत को लेकर नाराजगी बनी रही। पुलिसप्रशासन  चल समारोह में पूरे समय उपस्थित रहा ।


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