झाबुआ~इंद्रियों के विषयो में तल्लीन जीव का आत्म लक्ष्य कायम नही रहता है ।’- प्रवर्तक जिनेन्द्र मुनिजी~~





झाबुआ । पांच इन्द्रियो के विषयों में आसक्त होकर जीव आत्म लक्ष्य को भुल जाता हे । इन इन्द्रियों के विषयों में तल्लीन जीव का आत्म लक्ष्य कायम नही रहता है । उक्त प्रेरक   विचार स्थानक भवन में महती धर्मसभा में पूज्य जिनेन्द्र मुनिजी मसा. ने व्यक्त किये । विषयों की आसक्ति के कारण जीव साधु-संतो की व्याख्यान वाणी, आराधना का लाभ नही ले पाता है । जीव को धर्म पर श्रद्धा होना बहुत ही  मुश्किल है । आपने कहा कि  आज तीर्थंकर  भगवान महावीर स्वामी का शासन विद्यमान है, साधु-साध्वी, श्रावक- श्राविका धर्म आराधना कर रहे है । जो श्रद्धापूर्वक आराधना कर रहे है  वे धन्य है । ऐसे पांचवें आरे में धर्म की प्राप्ति मुश्किल है, श्रद्धा आना मुश्किल है । हमे ऐसा धर्म बडी मुश्किल से मिला है । आज व्यक्ति श्रद्धा से,धर्म से कैसे विचलित हो जाता है । मैं विराधना से विरक्त होकर आराधना में सम्यकत्व प्रवृर्ति करु। सम्यकत्व के स्वरूप को समझ कर सम्यकत्व को ग्रहण करूं, ऐसे विचार व्यक्ति में आना चाहिये। देव-गुरू-धर्म का स्वरूप  समझने पर  व्यक्ति में सम्यकत्व की प्राप्ति होगी । । देव अरिहंत सिद्ध मेरे भगवान है, गुरू जो भगवान की आज्ञा अनुसार पालन करते है, केवली भगवान द्वारा धर्म का पालन करू , ऐसा संकल्प लेने पर सम्यकत्व  जागृत होता है । नौ तत्वों पर श्रद्धा करना सम्यकत्व है ।

’जहां  माया, छल,कपट नहीं हो,वह मार्ग श्रेष्ठ है।’’
अणुवत्स पूज्य संयतमुनि जी मसा. ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी की आत्मा इस भव से पहले हमारे जैसी ही थी, वे भी  संसार में परिभ्रमण करते थे, हम भी संसार में परिभ्रमण कर रहे है । भगवान ने जाना कि संसार असार है, संसार को छोडना है, अन्तिम भव  में निर्वाण को प्राप्त हुए ।  हमें भी यह जानना है कि संसार असार है । संसार का पुरुषार्थ करते करते जीव भ्रमण कर रहा है, परन्तु मोक्ष के लिये पुरुषार्थ ,  करना  आवश्यक है, यह नही समझ रहा है । ज्ञानी की बात सुनना, उसे आचरण में लाना आवश्यक है । संसारी मनुष्य में कपट की भावना होती है, वह ठगता रहता है, माया करता है, धोखा देता है,ऐसे मनुष्य के साथ हम मिलजुल कर रह रहे है । हमे ऐसे  व्यक्ति से सावधान रहना जरूरी है । आज धर्म-तपस्या से रोकने वाले भी ठगने वाले होते है । व्यापारी ग्राहक को ठग रहा है,ग्राहक ठगा जा रहा है । आज कल  तो थोड़े से लाभ के लिये जीव देवी-देवता को भी ठगता है । गुरु को भी लोग ठग रहे है ।  भगवान की वाणी सुनकर उस पर श्रद्धा रख कर और उसे  आचरण में लाना चाहिये । जीव अंधश्रद्धा लेकर बैठा हुआ है , उसकी इच्छा पूरी नही होने पर वह अनेक प्रकार के उपाय कर जीवन बर्बाद करता है ।
धर्मसभा में आज संजेली, रावटी एवं अन्य स्थानो से दर्शनार्थ श्रद्धालु पधारे ।        




Share To:

Post A Comment: