धार~मामला इन हाऊस प्रशिक्षण कार्यक्रम का.....

मुख्यालय पर फोन घनघनाए तो शाम को शिक्षकों के ठहरने के लिए खुले ताले ~~

100-100 किलोमीटर दूर से खेल विद्या प्रशिक्षण के लिए बुलाए गए थे शिक्षक ~~

धार ( डाॅ. अशोक शास्त्री )।

सरकारी शालाओं में यूं तो खेल गतिविधियां रस्म अदायगी के तौर पर ही संचालित की जाती है। कभी कभार खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तो लापरवाही की भेंट चढ़ जाते है। ऐसा ही एक मामला जिला स्तरीय खेल विद्या प्रशिक्षण शिविर में नजर आया। इन हाऊस प्रशिक्षण के लिए 100-100 किलोमीटर दूर से शिक्षक कुक्षी पहुंचे थे। उन्हें प्रशिक्षण स्थल शासकीय उत्कृष्ट उमावि में बुलाया गया था। प्रशिक्षण कार्यक्रम औपचारिक साबित हुआ। वहीं शिक्षकों को ठहरने और रूकने के लिए फजीहत का सामना करना पड़ा। दरअसल भोजन कहीं और रखा तो ठहरने की व्यवस्था दूसरी जगह रखी गई थी। दिनभर शिक्षक इधर से उधर भटकते रहे। हालात यह रहे कि एकलव्य आवासीय परिसर जहां पर उन्हें रात ठहरना था वहां पर शाम 7 बजे तक ताले नहीं खुले। दिनभर के थके शिक्षक बरादमें में ही बैठ गए। इसको लेकर जिला मुख्यालय पर फोन घन-घनाए तो करीब साढ़े 7 बजे ताले खोलकर बिस्तरों की व्यवस्था की गई। इस मामले में जिला खेल प्रभारी राधेश्याम गढ़वाल को उनके नंबर पर कई मर्तबा कॉल किए गए, लेकिन उन्होंने फोन रिसिव नहीं किया। 
अंतिम छोर कुक्षी में रखा प्रशिक्षण 
जिले में ऐसी शालाएं जहां पर पीटीआई नहीं है। वहां पर खेल गतिविधि संचालित करने वाले शिक्षकों को खेल विद्या प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया था। दो चरणों में करीब 90 शिक्षकों को इन हाऊस प्रशिक्षण 6 दिन तक दिया जाना है। प्रथम चरण में 12 से 14 सितंबर तक धार, नालछा, तिरला, सरदारपुर एवं कुक्षी ब्लॉक के शिक्षकों को बुलाया गया था। रविवार अवकाश होने के कारण कई शिक्षक 10   सितंबर को ही अपने कार्य क्षेत्र से प्रशिक्षण के लिए मुक्त कर दिए गए थे। 12 सितंबर को गतिविधियां शुरु की जाना थी। प्रथम दिन मशक्कत भरा साबित हुआ। 
15 से 17 भी प्रशिक्षण 
जिला स्तरीय खेल विद्या प्रशिक्षण कार्यक्रम भोपाल से विसी के माध्यम से दिए गए निर्देशों के पालन में किया जा रहा था। इसमें 15 से 17 सितंबर तक डही, निसरपुर, उमरबन, गंधवानी, मनावर व धरमपुरी के शिक्षकों को आमंत्रित किया गया है। इधर सायं 7 बजे तक ताले की स्थिति यथावत रही। इसके चलते कई शिक्षक अपने रूकने के लिए ठोर-ठिकाना ढूंढते रहे। कुक्षी में कार्यक्रम को लेकर सवाल उठने लगे है। दरअसल दुरस्थ अंचलों में सभी ब्लॉकों के शिक्षकों को बुलाने के स्थान पर मध्य क्षेत्र को चुना जाता तो सभी के लिए आसानी होती। उल्लेखनीय है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम को लेकर सभी प्रकार का खर्च शासन द्वारा वहन किया जा रहा है।  

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