भोपाल~इस देश के प्रथम नागरिक मालिक आदिवासी है~ भगवान मुजाल्दा~~

भोपाल सैयद रिजवान अली~~

 आदिवासियों की सांस्कृतिक व औपचारिक अभिव्यक्ति, पहचान, भाषा, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा पर उनके हक, अधिकार और उनकी संस्कृतियों, परंपराओं को मजबूत करने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा 13 सितंबर 2007 को संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) ने आदिवासियो के अधिकारों की घोषणा की थी, इसी उपलक्ष्य में प्रति वर्ष ^आदिवासी अधिकार दिवस^ के रूप में मनाया जाता है, आप सभी से अनुरोध है, की गांव, ब्लॉक, जिला स्तरीय पर धूम धाम से मनाए!!
हम हमारे अधिकारों को आसानी से छोड़ेंगे नही
जल, जंगल औऱ जमीन का अधिकार "प्राकृतिक अधिकार" है, इसमे हमारे पुरखों का संघर्ष है, संविधान की पांचवीं छठी अनुसूचि में प्रदत स्वशासन का अधिकार हम लेकर रहेंगे!!
आदिवासी संस्कृति से बड़ा कांसेप्ट इसकी रीति-रिवाज और परम्परा है..!!
आदिवासी समुदाय की रीति रिवाज और परम्परा से भी बड़ा कांसेप्ट इसकी प्राकृतिक जीवनशैली है!!
हम आदिवासियों की पहचान हमारे जल, जंगल और ज़मीन से है, हम इतने समृद्ध हैं, इतने विस्तृत हैं, बावजूद इसके हम आज भी अपने संवैधानिक अधिकारों और मुलभुत चीजों से वंचित हैं!!
हम आज भी अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं, संघर्षरत हैं!!
13 सितंबर 2007 को विश्व आदिवासी अधिकार घोषणा पत्र 144 देशों की सहमति से जारी किया गया, ताकि विश्व के 90 देशों में रह रहे करीब 37 करोड़ आदिवासियों के भूमि, भाषा, जाति, धर्म, इज्जत, आबादी, रोजगार और आत्म निर्णय आदि का संरक्षण और संवर्धन संभव हो सके!!
राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी समाज की सांस्कृतिक, सामाजिक विरासत व अधिकारो के लिए बने सैकडो कानून जब सही मायने मे धरातलीय लागू होंगे तब सही मायने मे वो जिस उद्देश्य के लिए बने है, वो सार्थक होगा!!
अपने हक और अधिकार को जाने व समाज को जगाए..यही आपकी सबसे बड़ी समाज सेवा है.. अन्धविश्वास में अपना कीमती समय खराब न करें!!
यह कड़वी सच्चाई है, कि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को वर्षों से संविधान की किताब में पड़े पड़े दीमक लग चुकी है, लेकिन उन्हें ज़मीन स्तर पर लागू नहीं किया जा रहा है..!!
जल, जंगल, ज़मीन को बचाएं रखना है!!
संविधान में दिए गए अधिकार के (माध्यम) से हमें लड़ना है!!
विश्व का कल्याण करने वाले आदिवासी समुदाय की विशेष संस्कृति ने मानवता को हमेशा बचा कर रखा है, आज भी जल, जंगल औऱ जमीन का संरक्षण करते है, लेकिन उन्हें कई प्रकार के अधिकारों से वंचित रखा जाता है, उनके लिए पूरी दुनिया को विशेष हक़ अधिकार की बात करनी चाहिए!!
देश के सभी आदिवासी समुदाय के लोगों से अपील है, कि पेसा वन अधिकार कानूनों के तहत अपने अधिकारों की मांग करें और साथ में पाँचवीं अनुसूची को पूर्णत: लागू करवाने की लड़ाई लड़ें.!!
जहां आदिवासी हैं, वहीं के जल, जंगल, जमीन सुरक्षित हैं, लेकिन पूंजीवादी मानसिकता के गुलाम उद्योगपतियों को जमीन के नीचे पड़ी बहुमूल्य खनिज ही दिखती है!!उक्त जानकारी वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मीडिया कर्मी भगवान मुजाल्दा ने दी ।और कहा
इस देश के प्रथम नागरिक और मालिक आदिवासी है, लेकिन आज उन्हें हाशिये पर धकेला जा रहा है, देश की कई आदिम जनजातियां लुप्तप्राय होती जा रही हैं, यह हमारे लिए बेहद चिंताजनक हैं, अस्तित्व बचाये या अधिकारों की लड़ाई लड़ें!!
हम मिट्टी, जल, जंगल, जमीन, भोजन, पेड़, पानी, पक्षियों के लिए लड़ रहे हैं, हम जीवन के लिए लड़ रहे हैं, आदिवासीयत को जिंदा रखने के लिए लड़ रहे हैं!!
पूरे विश्व के आदिवासियो को विश्व आदिवासी अधिकार दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं बधाई जोहार !
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