झाबुआ~हिन्दी दिवस विशेष
४५ सालों से खूब पढ़ा और सुना जा रहा है साहित्य साधक डॉ रामशंकर चंचल को ~~                 

झाबुआ। मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल में जन्में झाबुआ की पावन और पवित्र माटी के साहित्य साधक डॉ रामशंकर चंचल कक्षा आठवीं से लिखना शुरू हुऐ थे।यह क्रम और धर्म उनका लगातार चल रहा है।१८ साल की उम्र में इंदौर आकाशवाणी में अपने स्वर में रचना पाठ की थी। आज भी आकाशवाणी, दूरदर्शन, यू टूयब, वीडियो, मंच आदि पर अपनी  रचनाओ ,सैकड़ो पत्र और पत्रिकाओ में अपनी रचनाओं के माध्यम से आज देश ही नहीं पूरे विश्व में अपनी अद्भुत अविरल छवि बनाकर जिले झाबुआ के साथ प्रदेश देश को भी गौरव दिला कर एक बेहद सराहनीय कार्य किया है। आज उम्र के ६५ साल में भी उनका अद्भुत अविरल लेखन देख सचमुच बेहद गर्व होता है। हिन्द दिवस के इस सुखद पर्व पर उनको सैकड़ो शुभकामनाएं । 

Share To:

Post A Comment: