झाबुआ~ दूसरी कक्षा तक के बच्चों को नहीं मिलेगा होमवर्क -शासन ने कहा..........बस्ते का ~~

वजन घटाओ, स्कूल संचालन कर रहे मनमानी~~
आदेश का उल्लंघन करने पर सरकारी और निजी स्कूलों के खिलाफ  कार्रवाई का प्रावधान~~


झाबुआ। संजय जैन~~

 सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से लेकर 10वीं तक के विद्यार्थियों को अब भारी-भरकम बैग लेकर स्कूल नहीं जाना पड़ेगा। अभी तक नन्हे-मुन्ने बच्चों को भारी बैग के कारण कंधे झुकने लगते थे और वह ठीक से चल नहीं पाते थे । इसी के चलते स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी आदेश जारी में कक्षा एक से दसवीं तक के विद्यार्थियों के बस्ते का वजन निर्धारित किया है। अब इसी वजन के मुताबिक विद्यार्थी बैग लेकर स्कूलों में पहुंचेंगे। सरकार के इस नियम का उल्लंघन करने वाले स्कूल के खिलाफ  तत्काल कार्रवाई भी की जाएगी।
 
रह गया आदेश सिर्फ  कागजों में सिमटकर ...........................
स्कूली बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने राज्य शासन का आदेश सिर्फ  कागजों में सिमटकर रह गया है। राज्य शासन द्वारा भेजे गए आदेश के तहत स्थानीय स्तर पर कोई गाइडलाइन निजी स्कूल संचालकों को जारी नहीं की गई है। नतीजा ये है कि कक्षा 4 से 8 तक बच्चों को अपने कंधों पर करीब 7 से 8 किलो तक का वजन ढोकर ले जाना पड़ रहा है। निजी स्कूल के संचालकों का कहना है कि उनके द्वारा एनसीईआरटी की गाइडलाइन के अनुरूप ही बच्चों के बैग सिस्टम को हैंडल किया जा रहा है। वहीं जिले के अफसर अभी हाथ पर हाथ रखकर बैठे हैं। उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि कैसे इस गाइडलाइन का पालन करवाया जाए।

तय कर दिया स्कूल बैग का वजन ...........................
मध्य प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की दृष्टि से स्कूल बैग पॉलिसी 2000 के तहत प्रदेश के सभी सरकारी गैर सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों के विद्यार्थियों के स्कूल बैग का वजन तय कर दिया है। विद्यार्थियों के लिए या काफी राहत भरा फैसला है। सरकार के इस फैसले से कक्षा पहली के विद्यार्थी 1.6 से लेकर 2.2 किलो तथा कक्षा दसवीं के विद्यार्थी 2.2 से लेकर 4.5 किलो वजन के बैग ही ले जा सकेंगे।

स्कूल को करना होगा इन नियमों का पालन...........
नए निर्देश के अनुसार स्कूलों को नोटिस बोर्ड व कक्षा में बसते के वजन का चार्ट प्रदर्शित करना होगा। स्कूल डायरी का वजन भी इस वजन में सम्मिलित किया गया है। शाला प्रबंधन समिति समय सारणी तैयार करेगी। जिसमें विद्यार्थियों को प्रतिदिन उपयोग की पुस्तकों व कॉपियां लाने के लिए बताया जाएगा। कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों को अभ्यास पुस्तिका व कॉपियां लाने के लिए बताया जाएगा। आठवीं तक के विद्यार्थियों को अभ्यास पुस्तिका, होमवर्क बुक तथा अन्य सामग्री को साला में ही रखने की व्यवस्था करना होगी। बिना पुस्तक के कंप्यूटर,नैतिक शिक्षा,सामान्य ज्ञान,स्वास्थ्य,शारीरिक शिक्षा,खेल एवं कलाओं की कक्षाएं लगाना होंगी। स्कूल बैग हल्के वजन के हों और जो विद्यार्थियों के कंधों पर फिट हो सके ऐसे बैग स्कूल में लागू किए जाएंगे। छात्र स्कूल में ट्रॉली बैग नहीं ला सकेंगे। पालकों से संवाद के लिए डिजिटल माध्यम अपनाया जाएगा।

हर 3 माह में वस्तुओं का वजन जांचा जाएगा............
सरकार के नए नियम के तहत कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को कोई भी होमवर्क अब नहीं दिया जाएगा। कक्षा ग्यारहवीं व बारहवीं के वस्तुओं का वजन शाला प्रबंधन समिति द्वारा विभिन्न विषय स्ट्रीम के आधार पर तय किया जाएगा। सरकार के इस आदेश का क्रियान्वयन जिला शिक्षा अधिकारी को प्राथमिकता के साथ करना है। और उन्हें अपने जिले में रहने वाली शालाओं का चयन कर प्रत्येक तीन माह में स्कूल बैग की वजन की जांच करना
है। इसके साथ ही बैग का वजन निर्धारित सीमा में हो इसका पालन भी शक्ति के साथ करना है।

कक्षा वार बस्ते का वजह इस प्रकार निर्धारित किया गया है................
कक्षा बस्ते के वजन की सीमा पहली 1.6 से 2.2 किलो तक दूसरी 1.6 से 2.2 किलो तक तीसरी 1.7 से 2.5 किलो तक, चौथी 1.7 से 2.5 किलो तक, पांचवीं 1.7 से 2.5 किलो तक, छठवीं 2.0 से 3.0 किलो तक, सातवीं 2.0 से 3.0 किलो तक, आठवीं 2.5 से 4.0 किलो तक नौवीं 2.5 से 4.5 किलो तक ,दसवीं 2.5 से 45 किलो तक वजह इस प्रकार निर्धारित किया गया है।

कक्षा 9 से 12 तक.............
यहां एनसीईआरटी की बुक चल रही हैं। इसमें प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें नहीं चलाई जाती हैं। सिलेबस पहले से निर्धारित है। ऐसे में बड़े बच्चों की कक्षाओं में बस्ते का ज्यादा बोझ नहीं है। शिक्षा विभाग ने स्थानीय स्तर पर कक्षा 9 से कक्षा 12 तक आदेश जारी कर दिया है।
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